मिलिट्री सैटेलाइट लॉन्च करेगा इसरो, भारतीय सेना की क्षमताओं में होगी बढ़ोत्तरी

मिलिट्री सैटेलाइट लॉन्च करेगा इसरो, भारतीय सेना की क्षमताओं में होगी बढ़ोत्तरी

800 करोड़ रुपए की लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन पर काम कर रही है। यह सैटेलाइट तो अक्टूबर में लॉ़न्च होनी है लेकिन आने वाले कुछ महीनों में इसरो कुछ महत्वपूर्ण सैटेलाइट भी लॉन्च करने वाला है। यह सैटेलाइट सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होंगे और भारतीय सेना की आंख बनकर पड़ोसी देशों पर नजर रखेंगे। सैटेलाइट के जरिए धरती और समुद्री सीमाओं पर पैनी नजर रखने में मदद मिलेगी।इसरो जीसैट-7ए को सितंबर में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के लिए लॉन्च करेगा। वहीं इस साल के अंत तक सर्विलांस के लिए रीसैट-2ए को लॉनिच किया जाएगा। जीसैट-7ए को जीएसएलवी एमके2 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। यह वायुसेना को विभिन्न ग्राउंड रडार स्टेशनों, एयरबेस और एडब्ल्यबएसीएस एयरक्राफ्ट्स को इंटरलिंक करने की सुविधा प्रदान करेगा। यह आईएएफ की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ ही उसके वैश्विक परिचालन में वृद्धि करेंगे।

यह सैटेलाइट जीसैट-7 या रुक्मिणी के समान ही होगी जिसे कि 29 सितंबर 2013 को लॉन्च किया गया था। यह विशेष रूप से नौसेना के लिए थी। रुक्मिणी भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) को मॉनिटर करने में मदद करती है। इस सैटेलाइट में लगभग 2,000 नॉटिकल माइल हैं जो नौसेना को युद्धपोतों, सबमरीन और मरीटाइम एयरक्राफ्ट की रीयल टाइम जानकारी मुहैया करवाती है। इसके अलावा इसने गहरे समुद्र में सेना की कार्यक्षमता को बढ़ाने का काम किया है।

रुक्मिणी नौसेना की आसमान में आंख मानी जाती है। यह भारतीय हिंद महासागरों में चीनी युद्धपोतों पर नजर रखती है। रीसैट-2ए इस साल के आखिर तक पीएसएलवी रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। यह एक एडवांस रीमोट सेंसिंग सैटेलाइट होगी जो देश की सर्विलांस क्षमताओं को बढ़ाएगी।

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