रेडियो के लाभ और हानि

रेडियो के लाभ और हानि

विज्ञान से लाभ-हानि की बात करे तो सब जगह विज्ञानं है और उसके नफा-नुकसान है. विज्ञान आधुनिक युग की देन है. आज विज्ञान के कारण हमारे बहुत से काम शीघ्र और सुविधापूर्वक हो जाते हैं. पिछले जमाने में विज्ञानं की सहूलियत ना होने से औरत घर में खुद हाथ से चक्की पर आटा पिसती थीं, कुएँ से पानी भारती थीं, पुरुष खेतों में हल जोतते थे, मिट्टी के बर्तन बनाते थे. पर समय के साथ अब कितना परिवर्तन हो गया है. अब तो खेतों में ट्रक्टर का उपयोग होने लगा है| गर्मी से छुटकारा पाने के लिए बिजली का पंखा, मनोरंजन के लिए रेडियो, टेलीविजन और फिल्मे हैं. यात्रा के लिए बसें, गाड़ियाँ, हवाई जहाज और पानी के जहाज हैं. आवागमन के इन साधनों से हमें बहुत दूर नहीं लगते। चाँद और मंगल पर पहुँच कर तो मनुष्य ने अपनी बुद्धि की श्रेष्ठता का प्रमाण दिया है.

रेडियो का महत्व 

24 दिसम्बर 1906 की शाम कनाडाई वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडेन ने जब अपना वॉयलिन बजाया और अटलांटिक महासागर में तैर रहे तमाम जहाजों के रेडियो ऑपरेटरों ने उस संगीत को अपने रेडियो सेट पर सुना, वह दुनिया में रेडियो प्रसारण की शुरुआत थी।
भारत में रेडियो – १९२७ तक भारत में भी ढेरों रेडियो क्लबों की स्थापना हो चुकी थी। 1936 में भारत में सरकारी ‘इम्पेरियल रेडियो ऑफ इंडिया’ की शुरुआत हुई जो आज़ादी के बाद ऑल इंडिया रेडियो या आकाशवाणी बन गया। रेडियो का महत्व कल भी था, आने वाला समय और बेहतर होगा

रेडियो के लाभ और हानि 

रेडियो एक संकेत वाहक के रूप में प्रयोग किया जाता है जिसमें रेडियो तरंगों अंतरिक्ष में संचार करती है. रेडियो एक तरफा और दो तरफा बंधन से बना होता है। एक तरह से रेडियो में s S दिशा प्रदान करता है इसमें दो रास्ते में एक संदेश के प्रसारण अथवा रिवर्स दिशाओं आगे सन्देश भेजा जाता है.

रेडियो सिंप्लेक्स और द्वैध का बंधन है. सिम्पलेक्स रेडियो s S प्रदान करता है, सूचना के आदान प्रदान और वैकल्पिक स्विच उपकरण को एक ऑपरेटिंग आवृत्ति की आवश्यकता होती है। वंही द्वैध रेडियो s S प्रदान करता है एक साथ दो तरह से (प्राप्त और ट्रांसमिशन) उपकरणों स्विचन के बिना, सूचना का आदान-प्रदान होता है.

रेडियो को संचार के हिसाव से 4 भागों में बांटा जा सकता है-

1. LW,SV-रिपीटर्स का उपयोग किए बिना HF और वीएचएफ संचार
2. उपग्रह संचार
3. माइक्रोवेव संचार
4. सेलुलर संचार

रेडियो के फायदे और नुकसान 

मनुष्य सदा से अपना मनोरंजन करता आया है । मन की शान्ति के लिए वह नई-नई खोज करता गया । नए-नए आविष्कार करने में वैज्ञानिकों को होड़ लग गई । मानव ने प्रकृति को अपने हाथ का खिलौना बना लिया । आज घर में बिजली से बनी प्रत्येक वस्तु वैज्ञानिक आविष्कार का चमत्कार है ।

रेडियो भी उन्हीं आविष्कारों में से एक है । इटली के मार्कोनी और भारत के जगदीशचन्द्र बसु, दोनों ने ही ध्वनि तरंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने का प्रयास किया । मार्कोनी को 1901 में सफलता मिली जब उन्होंने एक समाचार इंग्लैण्ड से न्यूजीलैण्ड भेजा ।

जगदीश चन्द्र बसु ने 1859 में छोटे पैमाने पर यह प्रयास किया था । परतंत्र भारत उनकी इस खोज को कोई महत्वपूर्ण स्थान न दे पाया और वे इस वैज्ञानिक दौड़ में पीछे रह गए और मार्कोनी अमर हो गए । भारत का प्रथम रेडियो स्टेशन 1927 में स्थापित हुआ और आज हर प्रान्त में कई-कई रेडियों स्टेशन हैं । रेडियो की आवाज हम तक कैसे पहुँचती है ? इसकी एक प्रक्रिया है- पहले आकाशवाणी केन्द्र बिजली द्वारा ध्वनि को बिजली की लहरों में परिवर्तित कर देता है ।

फिर इन लहरों को आकाश में छोड़ दिया जाता है । इन लहरों को रेडियो रिसीवर पकड़ लेते हैं और सुनने वाले रेडियों के बटन दबाकर मनचाहे कार्यक्रम सुन सकते हैं । रेडियो अनेक प्रकार के होते हैं लेकिन मुख्य रूप से हम इन्हें तीन भागों में वर्गीकृत कर सकते हैं- स्थानीय, अखिल भारतीय और विदेशों से सम्बन्धित ।

स्थानीय रेडियो पर केवल प्रान्त विशेष के कार्यक्रम, अखिल भारतीय रेडियो पर पूरे भारत के कार्यक्रम और विदेशी रेडियो से विदेशों के कार्यक्रम सुनने को मिलते हैं । रेडियों के अन्दर एक सुई होती है जिसे बटन की सहायता से इधर-उधर घुमाया जाता है । जिससे उस केन्द्र से सम्पर्क जुड़ जाता है और आवाज आने लगती है ।

रेडियो के अनेक लाभ हैं । घर बैठे देश ओर विदेश के ताजा समाचार मालूम हो जाते हैं । क्रिकेट इंग्लैण्ड में हो और आखों देखा हाल हिन्दी और अंग्रेजी में बारी-बारी से प्रस्तुत होता है । इसके अतिरिक्त पुराने नए फिल्मी गाने, कलाकारों से वार्तालाप, शास्त्रीय संगीत, नाटक, महत्वपूर्ण वार्ताएं, स्त्रियों के घरेलू कार्यक्रम, जिनमें उन्हें-खाना बनाने की विधियाँ, कपड़ों की देखभाल, घरेलू चिकित्सा के उपाय आदि के बारे में जानकारी दी जाती है ।

किसानों के कृषि से सम्बन्धित कार्यक्रम जिसमें उन्हें कौन सी फसल किस मौसम में बोनी चाहिए, फसल को कब बोना और काटना चाहिए, कब और कहाँ बेचना चाहिए आदि जानकारी मिलती है । इसके अतिरिक्त सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक परिस्थितियों की जानकारी, पर्वों पर विशेष कार्यक्रम, बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानियाँ आदि अनेक कार्यक्रम प्रसारित होते हैं:

रेडियो-जहाज, पुलिस, सेना के वाहनों आदि में लगा होता है । जिसके द्वारा वह अपना संदेश मुख्य कार्यालयों तक पहुँचाने हैं । हवाई जहाज यदि उड़ता हुआ किसी विपत्ति में फंस जाए जो रेडियों द्वारा ही कार्यालय में सूचित किया जाता है । रेडियों का एक रूप ट्रांजिस्टर भी है ।

जिसे लोग कानों पर लगाकर सुनते है । विशेष कर जब क्रिकेट मैच हो तब लोग कमेन्टरी सुनने के लिए उसका उपयोग करते हैं क्योंकि छोटा होने के कारण लोग उसे अपनी जेब, बैग या अटैची में रख लेते हैं । रेडियो क्षण भर में विश्व में घटित महत्वपूर्ण सूचनाएं हम तक तुरन्त पहुँचा देता है ।

व्यापारी वर्ग के विज्ञापन भी रेडियों से प्रसारित होते हैं । जिससे आकाशवाणी को अतिरिक्त आय होती है और व्यापारियों को ग्राहक मिल जाते हैं और ग्राहकों को अपनी पसन्द का सामान । मनोरंजन के इस साधन में कोई बुराई नहीं है । हर कला का दृष्टिकोण इस में समाहित है । मनोरंजन का यह साधन पहले भी लोकप्रिय था, आज भी लोकप्रिय है और भविष्य में भी रहेगा ।

रेडियो कम्युनिकेशन संचार का आसान और विश्वसनीय साधन। सुविधा के अनुसार इसे वाकी टॉकीज की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है जहां संचार का कोई अन्य माध्यम उपलब्ध ना हो, रेडियो संचार प्रणाली कम खर्चीली और आसान कीमत पर हर पर्यावरण की स्थिति के लिए उपयोगी है।

मन की बात | मन का रेडियो बजने दे जरा
मन की बात आकाशवाणी पर प्रसारित किया जाने वाला एक कार्यक्रम है जिसके जरिये भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत के नागरिकों को संबोधित करते हैं। इस कार्यक्रम का पहला प्रसारण 3 अक्तूबर 2014 को किया गया।

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