डायटिंग में इन 8 बड़ी गलतियों से बचना जरूरी

डायटिंग में इन 8 बड़ी गलतियों से बचना जरूरी
आप क्या खाते हैं और कितना खाते हैं, इस पर लगाम लगाना तो मुश्किल है ही। साथ ही यह चेक करना भी आसान नहीं है कि आप कैसे खाते हैं। अगर आप ऐसा करने की कोशिश कर चुके हैं तो आपको पता होगा कि डायट मेंटेन करने में आपसे क्या गलतियां हुई होंगी। डायटिंग आसान नहीं है, लेकिन यह जटिल भी नहीं होनी चाहिए।

1. पर्याप्त एक्सरसाइज न करना

आपको एक वर्कआउट रूटीन बनाना होगा ताकि आप अपनी लाइफस्टाइल में बिना कोई बड़ा बदलाव किए इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें। फुलटाइम नौकरी करते हुए हेल्थी बने रहना काफी मुश्किल होता है। खासतौर पर तब, जब आपको दिनभर ऑफिस में कड़ी मशक्कत करने के बाद जिम जाने का वक्त न मिले। अच्छी बात यह है कि केवल 30 मिनट का वर्कआउट भी आपकी हेल्थ को दुरुस्त करने के लिए काफी है।

2. जल्दी-जल्दी खाना

जब आप खाना खाते हैं तो आपका पेट भर गया है इस बात को महसूस करने में आपके दिमाग को 20 मिनट का वक्त लगता है। इसलिए खाना हमेशा आराम से खाना चाहिए ताकि आपके दिमाग को इस बात के सिग्नल मिल सकें कि आपका पेट भर गया है। साथ ही भरा पेट महसूस होने का मतलब है कि आप कम खाएंगे। तेज खाने वाले हो सकता है कि हमेशा मोटे न हों, लेकिन इन्हें अपच जैसी अन्य शिकायतें हो सकती हैं।

 3. ब्रेकफस्ट न करना

ब्रेकफस्ट, दिन के भोजन का एक महत्वपूर्ण अंग है। आपका शरीर रातभर में काफी भूखा हो जाता है और ब्रेकफस्ट से आपको अपनी भूख मिटाने का मौका मिलता है। साथ ही आपके दिन की शुरुआत भी एनर्जी और न्यूट्रीशन के साथ होती है। ब्रेकफस्ट छोड़ने से आपको सुबह के वक्त थकान महसूस होती है और आप गैर जरूरी स्नैक्स और कैलोरीज ले लेते हैं। जो लोग एक अच्छा ब्रेकफस्ट लेते हैं, वे दिन में कम खाने का रुझान रखते हैं। जल्दी खाने वाले आमतौर पर ज्यादा खाते हैं और इससे उनका वेट बढ़ता है।

4. कैलरी ज्यादा घटाना

कैलरी इनटेक घटाने से वजन कम होता है, लेकिन कैलरी बहुत ज्यादा घटाने का नतीजा वेट लॉस के तौर पर नजर नहीं आता है। ऐसा करने पर उलट

नतीजे आते हैं। कैलरी बहुत कम करने से वजन बढ़ता है। आपके शरीर को एक बेसलाइन कैलरी लेवल की जरूरत होती है ताकि बेसिक फिजियॉलजिकल फंक्शंस कायम रहें। अगर आप इस बेसलाइन के नीचे जाते हैं तो आपका मेटाबॉलिज्म गिरता है। अगर आप एक्सट्रीम लो कैलरी डाइट (800 कैलरी प्रतिदिन) लेते हैं तो आपका मेटाबॉलिक रेट उस डाइट को लेने के 48 घंटों के भीतर 10 फीसदी गिर जाता है।

5. पर्याप्त पानी न पीना

शरीर की कई प्रक्रियाओं के लिए पानी बेहद जरूरी होता है। इस बात पर बहस की जा सकती है कि आपको दिन में कितना पानी पीना चाहिए, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि पानी शरीर के लिए बेहद जरूरी है। यहां तक कि हल्के डीहाइड्रेशन में भी आपका मेटाबॉलिज्म 3 फीसदी तक गिर जाता है। अगर आप डायटिंग पर हैं तो पानी के महत्व को कम करके न आकें।

6. लिक्विड डायट

लिक्विड कैलरीज खाली कैलरीज होती हैं, भले ही ये फ्रूट जूस से मिल रही हों। फ्रूट जूस में हेल्थी न्युट्रिएंट्स होते हैं। लेकिन इनमें फाइबर का अभाव होता है, जो होल फ्रूट्स से मिलता है। इनसे खून में मामूली शुगर जाता है। क्रीमी, शुगर वाली ड्रिंक्स, शुगर वाली कॉफी और सोडा वाली ड्रिंक्स में काफी कैलरी होती है और ये सब डायटिंग को बेमतलब कर देती हैं। अगर आप वजन घटाना चाहते हैं तो पानी का सहारा लें।

7. खाते वक्त तनाव

दुखी होकर, उदासी में या तनाव में खाना खाने से आपकी डायट और कैलरी का संतुलन गड़बड़ाता है। जब आप तनाव में होते हैं तो आप जंक फूड और अनहेल्थी स्नैक्स का सहारा लेते हैं। बेचैनी में खाना खाने से आपकी वेस्टलाइन पर नेगेटिव असर होता है। पर्याप्त नींद और हेल्थी फूड से आपको स्ट्रेस ईट से बचने में मदद मिलती है।

8. कार्बोहाइड्रेट और फैट छोड़ देना

वजन घटाने के लिए अपनी डायट से कार्बोहाइड्रेट्स और फैट्स में कटौती करना जरूरी है। लेकिन इसे अपने खानपान से बिलकुल खत्म कर देना सही नहीं है। इसकी बजाय आपको रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स से बचना चाहिए और जरूरी 50 ग्राम कार्ब्स को सब्जियों और चुनिंदा फलों से लेना चाहिए। इनमें बेरी और अन्य हाई-फाइबर सोर्स शामिल हैं। लो-फैट डायट के खतरों में हार्मोन असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस शामिल हैं, जो आमतौर पर डायबीटीज, वेट गेन, कॉग्निटिव समस्याओं से जुड़े होते हैं।

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