क्या बंद होने वाला है Gmail अकाउंट ?

क्या बंद होने वाला है Gmail अकाउंट ?

जी हां, जीमेल इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए ये एक बुरी खबर हो सकती है क्योंकि दुनिया की दिग्गज तकनीकी कंपनी गूगल ने घोषणा की है कि वो अपनी ईमेल सेवा जीमेल (Gmail) को बंद करेगी, लेकिन आपके लिए बहुत ज्याता घबराने की जरूरत नहीं है। दरअसल, गूगल ने ये ऐलान कुछ चुनिंदा ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए ही किया है और बताया है कि इस साल के अंत तक वो इन सिस्टम को अपना सपोर्ट देता रहेगा। गूगल की इस घोषणा का असर क्रोम ब्राउजर के पुराने वर्जन, विंडोज एक्सपी और विंडोज विस्टा (Windows XP & Windows Vista) पर पड़ेगा, क्योंकि गूगल इसके लिए जीमेल को सपोर्ट नहीं देगा। गूगल की तरफ से की गई घोषणा के मुताबिक 8 फरवरी 2017 से कंपनी ऐसे सिस्टम या वर्जन पर काम करने वाले ऐसे जीमेल यूजर्स को नोटिफिकेशंस देने लगेगी, जो वर्जन 53 से या इससे कम वाले क्रोम ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं। यानी क्रोम ब्राउजर के पुराने वर्जन, विंडोज एक्सपी और विंडोज विस्टा (Windows XP & Windows Vista) का इस्तेमाल करने वालों गूगल की तरफ ये मैसेज मिलने शुरू हो गए होंगे। जैसा कि हमने पहले ही बताया, गूगल का ऐलान कुछ चुनिंदा ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने वालों पर ही होगा, लेकिन इन ऑपरेटिंग सिस्टम्स को भी यूज करने वालों की संख्या कोई नहीं है। खासकर विंडोज एक्सपी के यूजर्स की संख्या काफी है।

जीमेल को बंद करने के इस ऐलान का सबसे ज्यादा असर Windows XP & Windows Vista ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को पड़ेगा। अब तक लोग पुराने सिस्टमों पर भी ब्राउजर अपडेट कर लेते थे,लेकिन गूगल की इस नई घोषणा से पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अपना क्रोम ब्राउजर अपडेट नहीं कर पाएंगे और अपडेट न हो पाने से पुराने ब्राउजर को सिक्योरिटी प्लग-इन्स नहीं मिल सकेंगे, जिसके चलते ऐसे यूजर्स हैकरों के निशाने पर आ सकते हैं। जाहिर है इसके पीछे की वजह यह है कि पुरानी डिवाइसों-ऑपरेटिंग सिस्टमों का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स खुद को अपडेट करें और नए सिस्टम लें। गूगल ने भी यूजर्स से नए ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर में अपग्रेड करने की अपील की है। गूगल ब्लॉग पर कंपनी की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक अगर यूजर्स क्रोम ब्राउजर के पुराने वर्जन में जीमेल का इस्तेमाल करेंगे, तो हैंकिंग का खतरा ज्यादा बढ़ जाएगा। इसी तरह का मामला Windows XP & Windows Vista के साथ भी है, क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट ने इनको सपोर्ट देना बंद कर दिया है।

गूगल के इस ऐलान के बाद अब आपके मन ये सवाल उठ रहा होगा कि आखिर गूगल को ऐसा ऐलान करने की जरूरत ही क्यों पड़ी। दरअसल गूगल क्रोम ब्राउजर का नवीनतम (लेटेस्ट) वर्जन v55 है। इस वर्जन में तमाम जरूरी और ताजे सिक्योरिटी अपडेट्स हैं, जबकि Windows XP & Windows Vista के लिए बनाया गया आखिरी क्रोम ब्राउजर v49 था। गूगल के इस कदम के पीछे की वजह यह है कि यूजर्स खुद को ज्यादा सुरक्षित करने के लिए नवीनतम डिवाइसों और ऑपरेटिंग सिस्टम में अपग्रेड करें, ताकि वे आए दिन आने वाली इंटरनेट की चुनौतियों का सामना कर सकें। गूगल की इस घोषणा के बाद भी पुराने क्रोम ब्राउजर और जीमेल का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सिक्योरिटी अपडेट्स नहीं मिल सकेंगे, उनके जीमेल के नए प्लग-इन्स नहीं आ सकेंगे, बग फिक्स नहीं हो पाएंगे और दिसंबर 2017 के बाद उन्हें जीमेल का बेसिक एचटीएमएल वर्जन ही दिखाई देगा।  इसके अलावा गूगल जीमेल यूजर्स की सुरक्षा को लेकर भी कड़े प्रयास कर रहा है और इस कड़ी में कंपनी ने हाल ही में घोषणा की थी कि फरवरी से यूजर्स जावास्क्रिप्ट फाइल्स को ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। यानी .js एक्सटेंशन वाली फाइलें अब जीमेल के जरिये नहीं जा सकेंगी। इससे पहले जीमेल .exe, .msc और .bat जैसे एक्सटेंशन वाली फाइलों को अटैचमेंट के रूप में भेजने पर पाबंदी लगा चुका है। इतना ही नहीं गूगल ने चार साल बाद आईओएस डिवाइसों के लिए भी अपने जीमेल ऐप को अपडेट किया है. इस नए अपडेट के जरिये यूजर्स को ‘undo send’ जैसा प्रमुख फीचर मिल सकेगा। इसके बारे में गूगल ने कुछ चुने हुए यूजर्स को नोटिफिकेशन भी भेजने शुरू कर दिए हैं कि उनके जीमेल अकाउंट को इनबॉक्स से रिप्लेस कर दिया गया है। यह सर्विस वेब और एंड्राइड दोनों पर उपलब्ध है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउजर में सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिलते जिसकी वजह से उन्हें हैक करना हैकरों के लिए आसान हो जाता है। गूगल के अधिकारिक बयान के मुताबिक अगर यूजर्स पुराने क्रोम वर्जन में जीमेल यूज करेंगे तो हैकिंग का खतरा बढ़ जाएगा। इसी तरह एक्सपी और विस्टा के साथ भी है जिसका सपोर्ट अब माइक्रोसॉफ्ट ने भी बंद कर दिया है।

दुनिया के सबसे बड़ी ई-मेल सर्विस कंपनी Gmail के इस ऐलान के बाद सबसे ज्यादा असर Windows XP और Windows Vista यूजर्स को पड़ेगा क्योंकि ब्राउजर तो लोग आमतौर पर अपडेट कर लेते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पुराने Os और ब्राउसर में सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिलते जिसकी वजह से उन्हें हैक करना हैकरों के लिए आसान हो जाता है। गूगल लोगों को पुराने OS और ब्राउसर से नए में जाने को कह रहा है। गूगल के अधिकारिक बयान के मुताबिक अगर यूजर्स पुराने क्रोम वर्जन में Gmail यूज करेंगे तो हैकिंग का खतरा और बढ़ जाएगा। इसी तरह XP और Vista के साथ भी है जिसका सपोर्ट अब माइक्रोसॉफ्ट ने भी बंद कर दिया है। गूगल ने अपने ब्लॉग पोस्ट में यूजर्स को क्रोम अपडेट करने की सलाह दी है। गूगल ने ये कदम इसलिए उठाया है ताकि यूजर्स खुद से डाटा को ज्यादा सुरक्षित कर सकें और ऑपरेटिंग सिस्टम को अपग्रेड कर सकें। गूगल के इस कदम का एक और मकसद है कि आने वाले दिनों में लोग इंटरनेट की चुनौतियों और डाटा की सुरक्षा के मोर्चे पर डटकर सामना कर सकें। गूगल के जारी बयान के मुताबिक पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर पुराने क्रोम ब्राउजर और जीमेल का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सिक्योरिटी अपडेट्स नहीं मिल पाएंगे जिसकी वजह से उनके जीमेल के नए प्लग इन्स नहीं आ सकेंगे, बग फिक्स नहीं हो पाएंगे और दिसंबर 2017 के बाद उन्हें जीमेल का बेसिक एचटीएमएल वर्जन ही दिखाई देगा। इससे पहले जीमेल पर .exe, .msc, और .bat जैसे एक्सटेंशन वाली फाइलों को अटैचमेंट के रूप में भेजने पर भी पाबंदी लगा चुका है। गूगल ने हाल फिलहाल में 4 साल के बाद आईओएस डिवाइसों के लिए अपने जीमेल ऐप को अपडेट किया है। इन नए अपडेट के जरिये यूजर्स को undo send जैसा प्रमुख फीचर मिल सकेगा।

फिलहाल gmail क्रोम ब्राउजर वर्जन 53 या उससे कम पर काम करना साल के अंत तक जारी रखेगा और जो यूजर्स बच जाते हैं और पुराना वर्जन यूज कर रहे हैं वे जीमेल के बेसिक HTML वर्जन पर रिडायरेक्टेड हो जाएंगे। आपको बता दें कि गूगल क्रोम नया वर्जन 55 लेकर आने वाली है, जिसमें कई सारे सिक्योरिटी अपडेट शामिल होंगे। फरवरी महीने से जीमेल के टॉप पर अपडेट का एक बैनर सभी को नजर आने लगा है। यह नोटिफिकेशन उन यूजर्स को दिख रहा है जो Gmail का 53 या फिर उससे नीचे का वर्जन वाला ब्राउजर इस्तेमाल करते हैं। गूगल ने यह कदम यूजर्स को सिक्योरिटी और स्पोर्ट सिस्टम को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उठाया है। गौरतलब है कि पुराने ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम में सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिलते, जिसकी वजह से हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है।

दुनिया जैसे-जैसे अपने कामकाज के लिए कंप्यूटर-मोबाइल के जरिए साइबर स्पेस पर निर्भर हो रही है, वैसे-वैसे उसमें सेंधमारी का खतरा भी बढ़ रहा है। सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स को एक ऐसे फिशिंग स्कैम का पता चला है, जिसकी मदद से हैकर्स ने बहुत से जी मेल यूजर्स के यूजरनेम और पासवर्ड पता कर लिए हैं। हैकर्स इतने इफेक्टिव तरीके से काम कर रहे हैं कि अनुभवी टेक्निकल यूजर्स भी धोखा खा रहे हैं। ब्लॉग वेबसाइट वर्ड प्रेस के लिए सिक्यॉरिटी टूल बनाने वाली टीम वर्ड फेंस के रिसर्चर्स के मुताबिक इस फिशिंग स्कैम के जरिए बहुत सारे यूजर्स का जीमेल पासवर्ड हासिल करके उनका डेटा चुराया जा रहा है। इसमें यह भी बताया गया है कि इस स्कैम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि अनुभवी टेक्निकल यूजर्स भी समझ नहीं पा रहे हैं।

अगर बात करें कि आखिर क्या है ‘फिशिंग’, तो आपको बता दें फिशिंग में यूजर्स असली और नकली का फर्क नहीं कर पाते और अपना यूजरनेम और पासवर्ड नकली वेबपेज में एंटर कर देते हैं क्योंकि हैकर्स किसी असली वेबसाइट की हू-ब-हू नकल तैयार कर देते हैं। ऐसा करते ही यूजरनेम और पासवर्ड का ऐक्सेस हैकर्स को मिल जाता है और वे असली अकाउंट को हैक कर लेते हैं। हैकर्स ट्रस्टेड कॉन्टैक्स के तौर पर टारगेट यूजर को ईमेल भेजते हैं। इस ईमेल के साथ एक अटैचमेंट लगा होता है, जो आमतौर पर पीडीएफ फाइल के तौर पर दिखता है। देखने में यह ईमेल एक सामान्य ईमेल की तरह दिखता है। मगर इसके साथ आया अटैचमेंट दरअसल एक एम्बेडेड इमेज है, जिसे ऐसे तैयार किया गया है कि पीडीएफ फाइल की तरह नजर आए। इस इमेज पर क्लिक करने पर वैसे तो इमेज प्रिव्यू खुलना चाहिए, मगर गूगल का लॉगइन पेज खुल जाता है। दरअसल हैकर्स ने इस इमेज को फेक गूगल लॉगइन पेज से लिंक किया हुआ होता है। ऐसे में यूजर को लगता है कि उसका अकाउंट साइन आउट हो गया। यहीं से असली खेल शुरू हो जाता है। इस साइन-इन पेज पर सब कुछ सामान्य लगता है। गूगल का लोगो, यूजरनेम और पासवर्ड की फील्ड्स, टैग लाइन और अन्य इंडिकेशन ऐसे नजर आते हैं, जैसे यह गूगल का असली लॉगइन पेज है। ब्राउजर की अड्रेस बार पर जो अड्रेस आता है, बस वही संदिग्ध होता है। मगर सभी यूजर्स कुछ भी लॉगइन करने से पहले अड्रेस बार पर यह नहीं देखते कि क्या URL वहां आ रहा है। कोई एक नजर में देखे तो उसे बीच में “https://accounts.google.com,” भी लिखा नजर आता है, जो एकदम गूगल का असली यूआरएल नजर आता है। मगर इससे ठीक पहले “data:text/html” लिखा रहता है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर अड्रेस बार को जूमआउट करें तो यहां पर एक स्क्रिप्ट नजर आती है, जो फाइल को जीमेल के लॉगइन पेज की तरह दिखने के लिए तैयार की गई है।

जैसे ही यूजर इस पेज पर दिख रही फील्ड्स में अपना यूजरनेम और पासवर्ड डालता है, वह सीधे हैकर्स के पास पहुंच जाता है। इसके बाद हैकर्स तुरंत यूजर के अकाउंट से लॉगइन करते हैं और गूगल अकाउंट से जुड़ी बहुत सी सर्विसेज का भी ऐक्सेस हासिल कर लेते हैं। यही नहीं, अगले चरण में वे उस यूजर की ईमेल आईडी से उसके अन्य कॉन्टैक्ट्स को मेल भेजकर जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।

अब आप सोच रहें होंगे कि आखिर इन हैकर्स से बचा जाए तो कैसे, तो चलिए आपको वो भी बताए देते हैं।  आगर गूगल क्रोम के अड्रेस बार में ग्रीन कलर का लॉक नजर आता है तो इसका मतलब है कि साइट सिक्यॉर है। इसलिए पर्सनल डीटेल्स एंटर करने से पहले इस ग्रीन लॉक को चेक कर लिया करें। मामला सिक्यॉरिटी का है, इसलिए कुछ सेकंड एक्स्ट्रा टाइम आप लगा सकते हैं। इसके अलावा आपको हमेशा टू-स्टेप वेरिफिकेशन अपनानी चाहिए। इससे आप अपने अकाउंट को और सिक्यॉर बना सकते हैं और कोई हैक नहीं कर सकता। टू-स्टेप वेरिफिकेशन में आप यह सेटिंग कर सकते हैं कि पासवर्ड डालने के साथ-साथ आपके स्मार्टफोन पर एक वन टाइम पासवर्ड (ओ.टी.पी.) आए और उसे एंटर करने के बाद ही लॉगइन हो। तो थोड़ी सी सावधानी से आप अपना इंटरनेट यूज सुरक्षित रख सकते हैं।

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