GST के बाद बदल गई मनोरंजन की दुनिया

GST के बाद बदल गई मनोरंजन की दुनिया

तमाम विरोध के बीच तीस जून की आधी रात को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सैकड़ों हस्तियों के बीच जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स को देश भर में लागू कर दिया गया। सरकार ने इसे एक देश, एक टैक्स बताया, तो प्रधानमंत्री मोदी ने इसे गुड एंड सिंपल टैक्स करार दिया। अलग – अलग संगठनों ने जीएसटी का जोरदार विरोध किया, कई कारोबारी संगठन भी इसके खिलाफ खड़े हुए, लेकिन इन सबके बीच ये नई टैक्स व्यवस्था आखिरकार लागू हो चुकी है। टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद अब अलग – अलग कारोबारी अपना नफा – नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। ऐसे में हम भी यानी मनोरंजन जगत से जुड़े लोग भी ये पता लगाने में लगे हैं कि हमारे लिए ये जीएसटी किस तरह का बदलाव लेकर आया है। देश भर में 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद हमारे एंटरटेनमेंट बिल यानी मनोरंजन खर्च का क्या होगा? जीएसटी लागू होने के बाद इसका मिला-जुला असर देखने को मिलेगा, लेकिन बड़ी संभावना यही है कि इससे मनोरंजन पर खर्च कम ही होगा।

सबसे पहले बात करते हैं केबल टीवी और डीटीएच यानी डायरेक्ट टु होम सर्विस की। अभी शुरुआती जो चीजें सामने आईं हैं उनसे लग रहा है कि जीएसटी के युग में ये दोनों चीजें सस्ती होंगी। यानी जीएसटी केबल टीवी और डीटीएच के ग्राहकों के लिए अच्छा है और दोनों ही सर्विसेज के रेट में कमी आएगी। जीएसटी काउंसिल ने केबल टीवी और डीटीएच सर्विसेज के लिए 18% टैक्स तय किया है। फिलहाल इन सेवाओं पर अलग-अलग राज्यों में 10 से 30 फीसदी तक टैक्स लगता रहा है। इसके अलावा 15 पर्सेंट सर्विस टैक्स भी चुकाना पड़ता था, लेकिन अब ये 18 फीसदी पर फिक्स कर दिया गया है। जीएसटी लागू होने के बाद टीवी देखना आपके लिए सस्ता हो जाएगा, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या केबल ऑपरेटर्स, एमएसओ और केबल टीवी कारोबार से जुड़ी दूसरी एजेंसियां इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचने देंगी। ये सवाल इसलिए क्योंकि केबल टीवी ऑपरेटर्स और एमएसओ अपनी मनमानी के लिए कुख्यात हैं। केबल टीवी डिजिटाइजेशन के बाद भी ये अपने तरीके से ग्राहकों से टैरिफ वसूल रहे हैं। ऐसे में ये सवाल तो बनता ही है कि क्या ये घटी हुई टैक्स की रकम ग्राहकों की जेब में डालेंगे या नहीं। इस मामले में केबल टीवी ऑपरेटर्स के रिकॉर्ड बेहद ही खराब रहे हैं। आपको याद होगा कि इनकी करतूतों की ही वजह से देश में केबल टीवी डिजिटाइजेशन की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी। ये लोग अपने ग्राहकों की सही संख्या साफ नहीं करते थे। इस तरह ये सरकार को पूरा टैक्स नहीं देते थे, लेकिन अब केबल टीवी डिजिटाइजेशन के बाद सरकार ने इनके हाथ बांध दिए हैं। इन्हें अपने ग्राहकों की सही संख्या सरकार को बतानी ही पड़ रही है क्योंकि जितने घरों में सेट टॉप बॉक्स लग रहे हैं, सरकार को उसकी जानकारी देनी पड़ रही है और उसी के मुताबिक उन्हें प्रति कनेक्शन सरकार को टैक्स भरना पड़ रहा है। पर अब टैक्स बचाने या यूं कहें कि चुराने के लिए अब केबल ऑपरेटर्स दूसरी चाल चल रहे हैं। केबल टीवी ग्राहकों को वो कच्चा बिल दे रहे हैं, जिसमें टैरिफ प्लान कुछ और यानी ज्यादा दर्ज होता है। यानी केबल ऑपरेटर्स अपने ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूलते हैं और सरकार को कम टैरिफ दिखाकर कम टैक्स जमा करते हैं। इस तरह केबल टीवी ऑपरेटर्स की मनमानी और चोरी दोनों ही जारी है। हालांकि सरकार अब ऐसे केबल टीवी ऑपरेटर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला किया है। ऐसे केबल टीवी ऑपरेटर्स के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।

अब बात करते हैं मूवी देखने पर होने वाले खर्च की। जीएसटी काउंसिल ने 100 रुपये या उससे कम के सिनेमा टिकटों पर 18 पर्सेंट टैक्स का फैसला लिया है। वहीं, इससे ज्यादा के टिकट पर 28 फीसदी टैक्स देना होगा। ये नया टैक्स स्ट्रक्चर पहले लागू होने वाले मनोरंजन टैक्स की जगह ले लिया है, जो राज्यवार अलग-अलग था। अब तक मूवी टिकट के रेट राज्य सरकारों के मनोरंजन टैक्स के मुताबिक तय किए जाते रहे हैं, जो जीरो से लेकर 110 फीसदी तक होती थी । जैसे यदि आप झारखंड में मूवी देखते थे तो वहां 110% टैक्स देना होता था, जबकि उत्तर प्रदेश में ये दर 60 पर्सेंट थी, लेकिन, अब आपको सिर्फ 28 पर्सेंट टैक्स ही देना होगा। हालांकि असम, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के लोगों को ज्यादा रकम चुकानी होगी क्योंकि फिलहाल यहां कोई मनोरंजन टैक्स नहीं वसूला जाता था।

जीएसटी की नई व्यवस्था लागू होने के बाद अम्यूजमेंट और थीम पार्क्स के टिकटों के रेट बढ़ गए हैं। अब तक इन पर 15 फीसदी का सर्विस टैक्स वसूला जाता रहा है, लेकिन जीएसटी के स्लैब में इन्हें 28 पर्सेंट के रेट के तहत रखा गया है। यानी अब इन पार्क्स में मनोरंजन के लिए टैक्स करीब करीब दोगुना चुकाना होगा।

जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद महंगे रेस्तरां और फाइव स्टार होटल्स में खाना महंगा हो गया है। यहां खाना खाने और ठहरने पर अब आपको 28 पर्सेंट का टैक्स देना होगा। नॉन-एसी रेस्तरां में 12 पर्सेंट देना होगा, जबकि एसी रेस्तरां में खाने पर 18 फीसदी चार्ज होगा। हालांकि सालाना 50 लाख रुपये तक के टर्नओवर वाले छोटे होटल, रेस्तरां और ढाबा को राहत देते हुए सिर्फ 5 पर्सेंट जीएसटी का फैसला हुआ है। फिलहाल इन सर्विसेज पर वैट, सर्विस टैक्स, स्वच्छ भारत सेस, कृषि सेस जैसे करों को मिलाकर कुल 20 पर्सेंट के करीब टैक्स देना होता था।

क्रिकेट के शौकीनों के लिए जीएसटी बुरी ख़बर लेकर आया है। जीएसटी के युग में लोगों को आईपीएल देखना महंगा हो जाएगा। आईपीएल जैसे स्पोर्टिंग इवेंट्स को देखने पर 28 पर्सेंट टैक्स लगेगा। अब तक इन पर 20 फीसदी सर्विस टैक्स चुकाना होता था। इसका मतल ये है कि टिकट के दाम में इजाफा हो जाएगा। इसके अलावा सर्कस, थिएटर, क्लासिकल डांस और ड्रामा पर 18 फीसदी टैक्स लगेगा। ये मौजूदा टैक्स दर से कम है।

आज के समय में मौज करने के लिए लोग बहुत पैसा खर्च करते हैं। मूवी देखना और बड़े होटलों में खाना लोगों की लाइफस्टाइल का हिसा बनता जा रहा है.। एक जुलाई से वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू हो चुका है, जिसके चलते कुछ जगहों पर आपको अभी के मुकाबले अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। वहीं कुछ चीजों में आपका पैसा बचेगा। मौजूदा टैक्सेशन प्रणाली में सर्विस टैक्स, वैट, स्वच्छ भारत सैस, कृषि सेस आदि शामिल हैं जो लगभग 20% टैक्स दर में आते हैं। जीएसटी के आने के बाद आपको 18% टैक्स देना होगा इसके अलावा अलग-अलग रेस्टोरेंट अपने हिसाब से सर्विस चार्ज लेंगे. हालांकि सर्विस चार्ज देना अनिवार्य नहीं है, वो ग्राहक पर निर्भर करता है।

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