क्या ओटीटी से है मनोरंजन का भविष्य? क्या मल्टी स्क्रीन से ही होगा उद्योग का बचाव?

क्या ओटीटी से है मनोरंजन का भविष्य? क्या मल्टी स्क्रीन से ही होगा उद्योग का बचाव?

डिजिटलीकरण से वीडियो देखने के तरीके में बहुत अधिक बदलाव आया है और वर्तमान में वीडियो कंटेंट कई मीडिया और उपकरणों पर दर्शकों के लिए उपलब्ध हैं। वीडियो के लिए इस सर्वव्यापी मांग ने मीडिया व्यवसायों के लिए इसे स्क्रीन-रहित पहली बना दिया है। वीडियो के लिए सर्वव्यापी मांग ने मीडिया व्यवसायों के लिए इसे स्क्रीन-रहित पहेली बना दिया है। एक ओर, मीडिया कंपनियों को पे टीवी की पेशकश की तरह ही लीनियर टीवी के केंटेंटॆ और सेवाओं को आकर्षक बनाना है; दूसरी ओर, उन्हें उपभोक्ता मांगों को पूरा करने और प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अपने केंटेंट को कई प्लैटफार्मों के माध्यम से कई उपकरणों पर उपलब्ध कराना पड़ता है। देश में 160 मिलियन केबल और सॅटॅलाइट परिवारों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सारे भारतीय दर्शकों के साथ भारत दुनिया भर में मीडिया उद्योग के लिए एक अनोखा अवसर प्रदान करता है। फिर भी, विज्ञापनदाताओं के साथ-साथ प्रसारणकर्ता और सेवा प्रदाता तकनीकी प्रगति और साथ ही अगली पीढ़ी के व्यापार मॉडलों की असंख्य जटिलताओं से जूझ रहे हैं। भारत की चुनौती पुरानी प्रौद्योगिकियों, नियमों और नीतियों में निहित है।

व्यूरशिप आदत नाटकीय रूप से बदल रही है क्योंकि दर्शक हर जगह और कई स्क्रीनों पर अपने केंटेंट की मांग कर रहे हैं। मल्टीस्क्रीन और ओवर द टॉप (ओटीटी) का युग आ गया है और इसके साथ ही प्रसारणकर्ताओं के लिए चुनौतियाँ और अवसर सामने आए हैं। पिछले छह महीनों में, एचबीओ, यूनिविजन,सीबीएस,टर्नर और डिश नेटवर्क सहित उद्योग के प्रमुख दिग्गजों ने दीर्घकालिक कार्यनीति की घोषणा की जो दर्शकों की बदलती खपत और व्यूरशिप आदतों के अनुरूप होगी।

इन विकासों ने मीडिया के परिदृश्य के लिए एक बेहद बड़े बदलाव का संकेत दिया है। हम आधिकारिक तौर पर मल्टीस्क्रीन और ओवर द टॉप (ओटीटी) के युग में आ चुके हैं और इसके साथ ही चुनौतियाँ और अवसर भी हमारे सामने आए हैं। लिनीयर स्ट्रीमिंग और ओटीटी के माध्यम से कंटेंट देखने वाले दर्शकों की संख्या पारंपरिक लिनीयर चैनलों के माध्यम से कंटेंट ऐक्सेस करने वाले दर्शकों की संख्या की तुलना में अपेक्षाकृत कम है। इसलिए, इस समय गुणवत्ता और विश्वसनीयता बड़ी समस्या नहीं हैं।

अनुसंधान फर्म इन्फोनिक्स के मुताबिक इस बीच वैश्विक ओटीटी बाजार , जिसमें नेटफ्लिक्स जैसे वैकल्पिक प्रोग्रामर शामिल हैं, के साल 2018 में 10 बिलियन डॉलर से अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

आर्थिक विचार

एक बार जब कोई मीडिया कंपनी मल्टीपल स्क्रीनों पर कंटेंट को वितरित करना शुरू करती है, तो यूनिकास्ट बनाम मल्टिकास्ट की तुलनात्मक रूप से उच्च वितरण लागत काफी चौंका सकती है। नतीजतन, सैटेलाईट की मल्टीकास्ट क्षमता एक बहुत आकर्षक विकल्प बन जाती है। तीन अच्छे से तैनात किए हुए सैटेलाईटों की क्षमता का एक खंड एक नेटवर्क को लगभग हर संभावित दर्शकों को शामिल करते हुए और लगभग निश्चित लागत पर दर्शकों की संख्या की परवाह किए बिना दुनिया भर में कहीं भी वितरित कर सकता है। सैटेलाईट के साथ, मीडिया कंपनियों के लिए अंतिम मील तक कंटेंट का वितरण सुरक्षित, पहुँच योग्य और उच्च गुणवत्ता वाला हो जाएगा।

कंटेंट वितरण पर एक करीबी नजर

इंटरनेट और पारंपरिक कंटेंट वितरण नेटवर्क (सीडीएन) अवसंरचना ओटीटी मीडिया के वितरण के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है। लेकिन जैसे ही उद्योग लिनीयर ओटीटी वितरण और विज्ञापन-आधारित व्यवसाय मॉडल के लिए आवश्यक सेवा स्तर में जाता है, दिक्कतें आ सकती हैं। अनियोजित ट्रैफ़िक सर्ज, जैसे कि लाइव लिनीयर कार्यक्रमों और समाचारों से होने वाले ट्रैफ़िक सर्ज स्थलीय सीडीएन को प्रभावित कर सकते हैं।

जैसे पारंपरिक व्यापार मॉडल बदल रहा है, वैसे ही वितरण मॉडल को भी बदलना चाहिए। आज के सैटेलाईट भविष्य के वितरण मॉडल का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। चूँकि त्वरित परिवर्तन जारी है, हाइब्रिड सैटेलाईट सेवाएँ लिनीयर स्ट्रीमिंग को अपनाने में इच्छुक प्रसारणकर्ताओं और प्रोग्रामरों के लिए आकर्षक मूल्य प्रस्ताव प्रस्तुत करती हैं।

हाईब्रिड नेटवर्क का लचीलेपन

सैटेलाइट ऑपरेटरों ने लंबे समय से यह स्वीकार किया है कि मीडिया ग्राहकों की मांगों को पूरा करने में सबसे बड़ी चुनौतुयों में से एक है बढ़ते मल्टीस्क्रीन वातावरण के लिए मल्टीपल फॉर्मेटों में वितरित करने की आवश्यकता। इस चुनौती का सामना करने के उद्देश्य से इंटेलसैट ने मौजूदा सैटेलाईट सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इंटेलसैटवन स्थलीय नेटवर्क का निर्माण किया। इस नेटवर्क में फाइबर, फाइबर-प्लस-सैटेलाईट और टेलीपोर्ट सेवाओं के आधार पर प्रबंधित सेवाएँ शामिल हैं।

अंततः, हम मानते हैं कि वर्तमान बुनियादी ढांचे के साथ संयुक्त इन सैटेलाईटों की मदद से मीडिया कंपनियाँ ओटीटी के माध्यम से अनुकूलित, प्रसारण गुणवत्ता वाले लिनीयर स्ट्रीमों को मल्टीस्क्रीन उपकरणों तक पहुँचाने और वितरित करने में सक्षम होंगी और और उनके लिए विज्ञापनों के नए अवसर खुलेंगे।

टीवी देखने के परिदृश्य को बदल रही है क्लाउड तकनीक

क्लाउड प्रौद्योगिकी दुनिया भर में कई उद्योगों में अर्थव्यवस्थाओं और व्यापार मॉडलों पर अपनी छाप छोड़ रही है। यह कंप्यूटिंग, भंडारण और नेटवर्क बैंडविड्थ और लचीले, असीम और विश्व स्तर पर समन्वित संचालन को सक्षम बनाता है। यह व्यापार की जरूरतों के अनुरूप अवसंरचना के समयानुरूप स्केलिंग का मौका देता है और वितरण मॉडल विकसित करने में मदद करता है जिससे व्यवसाय अपने अंतिम उपयोगकर्ताओं तक सीधे पहुँच सकें।

प्रसारण एक उद्योग के रूप में परिवर्तन के शिखर पर है। इंटरनेट एक व्यवहार्य और अत्यधिक वांछनीय कंटेंट वितरण अवसंरचना में बदल चुका है। इसके फलस्वरूप, उद्योग भर में भारी बदलाव हो रहे हैं, जिससे प्रसारणकर्ताओं के लिए अंतिम उपयोगकर्ता तक वितरण के अवसर सामने आ रहे हैं। क्लाउड आर्किटेक्चर को ध्यानपूर्वक चुना जाना चाहिए ताकि कंटेंट की सुरक्षा की गारंटी मिल सके।

चूँकि प्रसारण वैश्विक कंटेंट ऐक्सेस के मौजूदा मार्केट डायनमिक्स और वितरण प्लैटफॉर्म के रूप में इंटरनेट पर प्रतिक्रिया दर्शाता है, क्लाउड कंप्यूटिंग की बुनियादी सुविधा ही टीवी नेटवर्क और कंटेंट मालिकों के लिए अपने व्यवसाय को बढ़ाने का एकमात्र विकल्प है।

ओटीटी के साथ तेज होने जा रही है प्रतियोगिता

भारत में ओटीटी वीडियो बाजार पर फ्रॉस्ट ऐंड सुलिवन के बाजार अंतर्दृष्टि में यह पता चला है कि भारत में हर महीने लगभग 66 मिलियन अद्वितीय रूप से कनेक्टेड वीडियो दर्शक हैं और तकरीबन 1.3 मिलियन भुगतान करने वाले ओटीटी वीडियो सब्सक्राइबर मौजूद हैं। भारत में स्मार्ट डिवाइसों के उपयोग में हो रही बढ़ोत्तरी के साथ-साथ, कंटेंट मालिक और ऐग्रीगेटर सदस्यता और विज्ञापन के माध्यम से पहुँच बढ़ाने और राजस्व उत्पन्न करने के लिए गैर-टीवी प्लैटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। ओटीटी वीडियो वितरण में सफलता विभिन्न प्रकार के कंटेंट, नए कंटेंट, उचित मूल्य और बेहतरीन उपयोगकर्ता अनुभव प्रदान करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

टीवी प्रसारणकर्ताओं के विकास को तेज कर रहे हैं ओटीटी प्लैटफॉर्म

डिजिटल फ्रंट पर टीवी प्रसारणकर्ताओं के बढ़ते प्रयास और डिजिटलीकरण की धीमी प्रगति के साथ ही साथ डिजिटल या ओवर द टॉप प्लैटफार्मों की ओर बढ़ने के इस अभियान में भी तेजी आने की उम्मीद है। हमने एकल टीवी परिवारों में अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए ओटीटी सेवाओं पर नजर रखने वाले प्रसारणकर्ताओं पर एक नज़र डाला था। प्रसारक एकल-टीवी घरों में दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लैटफॉर्म का इस्तेमान करने के बारे में विचार करते हैं। हमने मुद्रीकरण के लिए प्रसारणकर्ताओं द्वारा कई सारे ऐपों और स्ट्रीमिंग प्लैटफार्मों के विकास और लॉन्चिंग को देखा है। हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटरनेट सक्षम उपकरणों में वृद्धि जैसे बुनियादी ढांचे में सुधार करने से ओटीटी सेवाओं को समर्थन प्राप्त होगा और विज्ञापन राजस्व में और अधिक बढ़ोतरी होगी।

साल 2014 में भारत के सक्रिय ओटीटी वीडियो सब्सक्राइबरों की संख्या 12 मिलियन थी। साल 2020 तक भारत के सक्रिय ओटीटी वीडियो ग्राहकों की संख्या के 105 मिलियन तक बढ़ने की संभावना है। हालांकि ब्रॉडबैंड शुल्क अभी ज्यादा हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, यह उम्मीद की जा रही है कि टेलीकॉम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा गहन होगी और 4जी के शुभारंभ के साथ डेटा टैरिफ दरों में भी कमी आने की संभावना है।

टीवी प्रसारक अब अपने स्वयं के ओटीटी प्लैटफार्मों को विकसित करने के लिए तैयारी में जुटे हुए हैं और कई प्रसारकों ने यूट्यूब से अपने सभी कंटेंटों को हटा लिया है। स्टार नेटवर्क ने अपने ओटीटी प्लैटफॉर्म हॉटस्टार का लॉन्च करने से कुछ समय पहले यही किया था। इस ऐप ने अपने लॉन्च के बाद दो हफ्तों के दौरान ही 4 मिलियन से अधिक डाउनलोड पहले ही जेनरेट कर लिया और प्रीमियम दर्शकों को लक्षित करने वाले विज्ञापनदाताओं का ध्यान आकर्षित किया।

ज़ील नेटवर्क के तहत भारत के सबसे पहले ओटीटी प्लैटफार्मों में से एक, डिट्टो टीवी विपणन में अपने निवेश को बढ़ा रहा है। ज़ी अपने डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए विशेष रूप से दो घंटे का अनन्य कंटेंट तैयार करने की योजना बना रहा है और बाद में अपने सभी कंटेंटों को यूट्यूब से हटाने की भी योजना है। कई अन्य प्रसारकों के भी ऐसा करने की उम्मीद है।

आगे की राह

सैटेलाइट ने हमेशा प्रसारण-गुणवत्ता वाले कंटेंट के विश्वसनीय परिवहन और वितरण को सुविधाजनक बनाया है और मीडिया ग्राहकों की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने व्यवसाय मॉडल को सफलतापूर्वक अनुकूलित किया है। इस लचीलेपन के उदाहरणों में एसडी से लेकर यूएचडी तक और फिर 4K तक बदलाव शामिल है। नए, हाई-थ्रूपूट सैटेलाईट सिस्टम कुछ साल पहले की तुलना में काफी अधिक बैंडविड्थ दक्षता और कक्ष में कहीं अधिक क्षमता का वादा करता है।

पहली बार दर्शकों के साथ प्रत्यक्ष, व्यावहारिक संबंध बनाने के लिए एंड-टू-एंड समाधान की आवश्यकता होती है। चूँकि दर्शकों के साथ वीडियो उद्योग का संबंध विकसित हो रहा है वीडियो प्रबंधन, वाणिज्य, ग्राहक प्रबंधन और ऐप्लिकेशन विकास साझेदारों की आवश्यकता होगी।

विभाजन जारी है। आमतौर पर विविधता एक अच्छी बात होती है, लेकिन जब बात ओटीटी अनुप्रयोग को विकसित करने की आती है, तो प्लैटफार्म, एसडीके और प्रमाणन प्रक्रियाओं की विविधता भयानक हो सकती है। न केवल प्रसारणकर्ताओं और कंटेंट मालिकों को लागत प्रभावी रूप से कई प्लैटफार्मों पर संभवतः रोल आउट करने की कार्यनीति की आवश्यकता होती है बल्कि उन्हें अपनी सेवा को जीवनभर इस्तेमाल करने योग्य बनाने हेतु अपने मल्टी-प्लैटफॉर्म पोर्टफोलियो का प्रबंधन करने के लिए उपकरणों की भी आवश्यकता होगी। सामान्य वेब/ मोबाइल/ स्मार्ट टीवी/ गेम कंसोल में प्रतिस्पर्धा करने के अलावा, ओटीटी वितरकों को अब पूरी तरह से नई श्रेणियों के उपकरणों – पहनने योग्य, स्मार्ट घर और यहाँ तक ​​कि आभासी वास्तविकता पर विचार करने की आवश्यकता है।

ऑनलाइन वीडियो प्रयोग में हो रही वृद्धि से यह प्रतीत होता है कि पारंपरिक टीवी व्यवसाय मॉडल शायद टिकाऊ नहीं रहे। प्रासंगिक बने रहने के लिए, मौजूदा प्रसारणकर्ताओं और संचार कंपनियों को ओटीटी-टीवी बाजार में प्रवेश करने और सफल होने के लिए तैयारियाँ करनी होंगी। वे उन ग्राहकों के लिए आकर्षक मूल्य प्रस्ताव बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों और अच्छे कंटेंट के साथ शुरुआत कर सकते हैं, जो अब कई उपकरणों में सहज अनुभव की मांग करते हैं।

लेकिन भारत में वर्तमान परिदृश्य पर विचार करते हुए, ओटीटी बाजार अभी भी अपनी प्रारंभिक अवस्था में है और अल्पावधि में सीमित प्रगति दिखने की उम्मीद है। यद्यपि इसमें लंबे समय में खेल परिवर्तक बनने की क्षमता है, भारत में इसकी उपलब्धियाँ कनेक्टेड डिवाइसों और हाई स्पीड ब्रॉडबैंड के उपयोग में वृद्धि पर काफी निर्भर करेगा।

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