आने वाले दिनों में और अधिक बेहतर होगा डिजिटल मीडिया और मनोरंजन मीडिया उद्योग

आने वाले दिनों में और अधिक बेहतर होगा डिजिटल मीडिया और मनोरंजन मीडिया उद्योग

डिजिटलीकरण राष्ट्र के त्वरित विकास में योगदान देते हुए उत्तरोत्तर रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र परिदृश्य में परिवर्तन ला रहा है। भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है और इसमें डिजिटलीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। औद्योगिक परिचालनों के डिजिटलीकरण के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से विस्तार हुआ है। डिजिटल मीडिया और मनोरंजन उद्योग के उद्भव से भारत में व्यापार अवसरों को और बढ़ावा मिला है।

आज का विश्व एक वैश्विक तकनीकी उन्नयन के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसने इंटरनेट और डिजिटल मीडिया प्लैटफॉर्म के उपयोग को अगले स्तर पर ले जाने में मदद की है। बदलते उपभोक्ता मांगों, कामकाजी लोगों की बढ़ती आबादी, तेजी से बदलती हुई प्रौद्योगिकी और ई-कॉमर्स कंपनियों के विकास से प्रेरित, भारतीय अर्थव्यवस्था के पास तीव्र गति से आगे बढ़ने के लिए कई सारी गुंजाइशें नज़र आ रही हैं। वर्तमान में कंटेंट का डिजिटलीकरण पूरी तरह से बदल गया है। यह समझने की जरूरत है कि मीडिया कंपनियाँ कंटेंट के निर्माण, उत्पादन, विपणन, वितरण और मुद्रीकरण के बारे में क्या सोचती हैं। जैसे-जैसे उनके दर्शक को मनोरंजन का उपभोग करने के नए तरीके ढूँढ़ निकालते हैं, चाहे वह टैबलेट, स्मार्टफोन के माध्यम से हो या फिर कनेक्टेड टीवी, पीसी, गेमिंग या मिश्रित रियलिटी उपकरणों के माध्यम से हो, ध्यानाकर्षण करने के लिए ऐसी प्रतियोगिता इससे अधिक पहले कभी नहीं थी। इस विकास ने परंपरागत व्यवसाय मॉडलों को बाधित किया है और यह उद्योगभर में मौजूद संगठनों को नए तरीको से पहचानने के लिए प्रेरित कर रहा है ताकि वे जल्द से जल्द किसी भी उपकरण पर सही समय पर सही कंटेंट प्रदान कर सकें और उसे सही तरीके से वितरित कर सके, जो सभी व्यापार अंतर्दृष्टि और अनुमानों से समर्थित हों और जिन्हें भविष्य में निर्णय लेने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

आने वाले दिनों में और अधिक बेहतर होगा

डिजिटल मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग से भारत के प्रमुख उप-क्षेत्र का उद्भव प्रभावित हुआ है। ये क्षेत्र डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अत्यधिक सक्रिय हैं और इस व्यवसाय से जुड़ी कंपनियाँ काफी मुनाफा कर रही हैं। आईए उनके बारे में विस्तार से जानें – 

  1. डिजिटल मनोरंजन

भारतीय जनसंख्या को महानगरीय, उप-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है। भारत की शहरी आबादी इंटरनेट पर काफी सक्रिय है जबकि ग्रामीण लोग धीरे-धीरे आधुनिक मीडिया प्लैटफॉर्म का प्रयोग करने लगे हैं। पहले, रेडियो भारत में मनोरंजन का प्राथमिक स्रोत था फिर टेलीविजन के उद्भव से मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा मिला।

आजकल, इंटरनेट भारतीय शहरी आबादी के लिए मनोरंजन का एक प्रमुख स्रोत बन गया है। यूट्यूब इंटरनेट पर सबसे बड़े डिजिटल मनोरंजन मंच के रूप में उभर कर आया है। व्यक्तियों से लेकर बड़े मनोरंजन ब्रैंडों तक, बड़ी संख्या में लोग इस अल्ट्रा-आधुनिक प्लैटफॉर्म पर बेहतर राजस्व उत्पन्न कर रहे हैं। टी-सीरीज, टिप्स, राजश्री, यशराज, शेमारू, इरॉस, यूटीवी, ज़ी, सोनी, स्टार, इत्यादि जैसे भारत की मुख्य मनोरंजन कंपनियों के अपने सक्रिय यूट्यूब चैनल हैं।

  1. डिजिटल मीडिया और समाचार

शहरी भारत में, समाचार पत्र और पत्रिकाएँ ई-न्यूज़पेपर और ई-पत्रिका द्वारा प्रतिस्थापित होते जा रहे हैं। लोग चलते-फिरते अपडेट रहना चाहते हैं। बड़े समाचार चैनलों और एजेंसियों के मोबाइल ऐप और वेबसाइटें डिजिटल प्लैटफ़ॉर्म पर समाचारों के नए स्रोत हैं। बीबीसी, टीवी टुडे नेटवर्क, ज़ी मीडिया नेटवर्क आदि भारत के डिजिटल मीडिया सेक्टर के कुछ बड़े नाम हैं। इन प्रमुख समाचार कंपनियों ने अपने प्रिंट और टीवी समाचार कार्यक्रमों के डिजिटल समकक्षों को संरचित किया है।

भारत का अखबार उद्योग दुनिया के सबसे विविध उद्योग है। दैनिक जागरण, टीओआई, इंडियन एक्सप्रेस, दि हिंदू, द इकोनॉमिक टाइम्स, दैनिक भास्कर, बीबीसी हिंदी, बिजनेस टुडे इत्यादि भारत की प्रमुख सक्रिय ई-न्यूज़पेपर कंपनियाँ हैं। 

  1. डिजिटल विज्ञापन

विज्ञापन मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र का महत्वपूर्ण राजस्व उत्पादक है। इंटरनेट के आने के बाद भारत का विज्ञापन तंत्र काफी हद तक एक प्रमुख मनी-स्पिनर सेक्टर के रूप में परिवर्तित हो गया है। बड़ी कंपनियों, मध्यम श्रेणी के उद्योगों और एसएमई के लिए डिजिटल विज्ञापन वर्तमान में विज्ञापन का सबसे महत्वपूर्ण रूप बन गया है।

रेडियो, टीवी, प्रिंट और आउट-ऑफ-होम (ओओएच) विज्ञापन के बाद इंटरनेट शीर्ष विज्ञापन मंच बनता दिख रहा है। भारत में डिजिटल विज्ञापन तेज गति से विकसित हो रहा है। गूगल इंटरनेट का सर्वोत्तम ऐडवर्टाईज़िंग किंग है और उसने विज्ञापनों को संभालने के लिए अपने नियामक तंत्र को विशेष रूप से बनाया है। डिजिटल विज्ञापन में उत्पाद या सेवा का प्रचार, ब्रैंड के प्रति जागरूकता को बनाना, ग्राहक से जुड़ना और इंटरनेट पर एकीकृत विपणन संचार के पूरक पहलू शामिल हैं।

  1. सामाजिक मीडिया

सोशल मीडिया इंटरनेट का एक अभिन्न अंग है। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, पिंटरेस्ट, गूगल इत्यादि इंटरनेट पर सर्वाधिक आकर्षक सामाजिक मीडिया चैनलों के रूप में उभरे हैं।

भारत में, सामाजिक मीडिया ने लोगों के संवाद करने के तरीके को बदल दिया है। हालांकि ग्रामीण आबादी अब भी सोशल मीडिया पर निष्क्रिय है, आगामी वर्षों में सोशल मीडिया पर ग्रामीण लोगों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। 

  1. ई-कॉमर्स

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन खरीददारी में जबरदस्त विकास देखा है। टेक-सैवी और इंटरनेट-सक्रिय युवा जनसंख्या तेज गति से ऑनलाइन गतिविधियों में शामिल हो रही है। डिजिटलीकरण में इस तरह की गतिशील वृद्धि ने देश में ई-कॉमर्स उद्योग क्षेत्र को बढ़ाया है। आने वाले वर्षों में, ई-कॉमर्स सेक्टर में और तेजी आने की उम्मीद है।

अग्रिम तकनीक और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण, ई-कॉमर्स विनिर्माण के बाद सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्र होने की तैयारी में है। स्मार्टफोनो और टैबलेटों जैसे उपकरणों के इस्तेमाल में द्रुत बढ़ोत्तरी हुई है क्योंकि सरकार “डिजिटल इंडिया” अभियान के माध्यम से अपने नागरिकों को एक डिजिटल जीवन शैली जीने के लिए प्रेरित कर रही है। 

चार डिजिटल ट्रेंड

मीडिया उद्योग का डिजिटलीकरण बदलते उपभोक्ता व्यवहार और उम्मीदों, खासकर युवा पीढ़ियों के बीच जो कभी भी, कहीं भी तुरंत कंटेंट ऐकसेस करने की मांग करते हैं, से प्रेरित है। आईए सबसे महत्वपूर्ण उपभोक्ता, पारिस्थितिकी तंत्र और तकनीकी रुझानों का विश्लेषण किया जाए, जो मीडिया उद्योग में डिजिटल नवप्रवर्तन को प्रेरित कर रहे हैं। 

  1. जनसांख्यिकी

वैश्विक मध्यम वर्ग के बढ़ने (2009 में 1.8 बिलियन लोगों से 2030 में अनुमानित 4.9 बिलियन तक) के साथ, सुविधा, शिक्षा, प्रीमियम कंटेंट और वीडियो-ऑन-डिमांड पर ध्यान केंद्रित करने वाली नई मीडिया सेवाओं की भी मांग बढ़ेगी। इस बीच, 1981 से 1997 तक के बीच पैदा हुई पीढ़ी उन प्रौद्योगिकी सेवाओं की मांग कर रही है, जो सुविधा, यादगार अनुभव और कंटेंट तक त्वरित ऐक्सेस प्रदान करती हैं। इसी समय, विश्व की एक जनसंख्या वृद्ध हो रही है, इसलिए मनोरंजन और शिक्षा सेवाओं के अलावा स्वास्थ्य और कल्याण सेवाएँ भी डिज़ाइन की जा रही हैं। 

  1. नए उपभोक्ता व्यवहार और आशाएँ

उपभोक्ताओं को मीडिया से क्या अपेक्षा है, वे इसे कैसे उपभोग करते हैं, इस पर ये जनसांख्यिकीय बदलाव एक नाटकीय प्रभाव डाल रहे हैं।

  • बदलती उपभोक्ता अपेक्षाएँ और व्यवहार युवा पीढ़ी दुनिया भर के कंटेंट का आनंद उठाने के लिए उत्सुक हैं।
  • संपादकीय कंटेंट, विज्ञापन और प्रचार उपभोक्ता आसानी से संपादकीय कंटेंट के रूप में छिपे मार्केटिंग को पहचानने में लगे हैं। जैसे-जैसे बढ़ती संख्या में इंटरनेट उपयोगकर्ता ऐड-ब्लॉकिंग सॉफ्टवेयर का प्रयोग करने लगे हैं, विपणक अपनी कार्यनीति बदल रहे हैं और स्टोरी टेलिंग या ब्रैंड संबंधी उपयोगी जानकारी प्रदान करने के माध्यम से उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के तरीके तलाश रहे हैं।
  • सुरक्षा, गोपनीयता और विश्वास: उपभोक्ता इस बात से जागरूक हो रहे हैं कि उनके दैनिक जीवन को डेटा में बदला जा रहा है, जिन्हें तृतीय पक्ष द्वारा विश्लेषित और मुद्रीकृत किया जा सकता है। अपारदर्शी और जटिल गोपनीयता नीतियों और कस्टमाईज़ेशन एल्गोरिदम के कारण उपभोक्ता उन उन सेवाओं को अपना सकते हैं, जो उन्हें अधिक पारदर्शिता और बेहतर डेटा गोपनीयता प्रदान करें।
  1. पारिस्थितिक तंत्र की चुनौतियाँ

चूंकि मीडिया उद्योग अपने ग्राहक आधार की बदलती आदतों के अनुसार खुदको बदलता है, हमने मीडिया क्षेत्र के परिदृश्य में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं।

  • स्टार्टअप अवरोध प्रतिभा, प्रौद्योगिकी तक ऐक्सेस और ‘दुनिया को बदल डालो’ रवैया दुनिया भर में स्टार्टअपों को विकसित होने का मौका देता है, जिससे नए व्यवसायों और मॉडलों का बनना संभव होता है।
  • हर कोई कंटेंट निर्माता है  यूनिलीवर, इंटेल आदि जैसे कई ब्रैंड और संगठन अब उपभोक्ताओ का ध्यान आकर्षित करने के लिए ब्रॉडकास्टरों की भूमिका निभाते हुए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
  • वित्तीय संसाधनों तक ऐक्सेस रचनात्मक लोग नए उत्पादों और सेवाओं को वित्तपोषित करने के लिए नए तरीके ढूंढ रहे हैं। कंटेंट निर्माता पारंपरिक मीडिया कंपनियों को दरकिनार कर रहे हैं और इसके बदले क्राउड-फंडिंग जैसे फाईनेंसिंग के नवीन स्रोतों को अपना रहे हैं।
  • नियामक अनिश्चितता बौद्धिक संपदा से संबंधित कानूनी रूपरेखा मीडिया उपभोक्ताओं की नई पीढ़ी के लिए तैयार नहीं है, जो दुनिया भर में कहीं से भी किसी भी कंटेंट तक त्वरित ऐक्सेस पाने की अपेक्षा करते हैं। परिणामस्वरूप, कई उपभोक्ता कंटेंट ऐक्सेस करने के लिए पारंपरिक माध्यमों को बाईपास कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य में यूएस नेटफ्लिक्स ऐक्सेस करने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) सेवाओं का उपयोग करना।
  1. प्रौद्योगिकी रुझान

मोबाइल और इंटरनेट प्रयोग में हुई वृद्धि ने युवा पीढ़ी के उपभोक्ताओं के लिए जीवन से जुड़े रहने का एक नया रास्ता दिखाया है। इससे मीडिया कंपनियों को अपना हुनर दिखाने का अवसर मिल रहा है। कनेक्टिविटी में वृद्धि के साथ-साथ, प्रौद्योगिकी अब कहीं भी कभी भी कंटेंट ऐक्सेस करने का अवसर देती है।

इन विस्तृत प्रौद्योगिकी प्रगतियों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, कई तकनीकी ट्रेंड ऐसे भी हैं जो मीडिया उद्योग के डिजिटल रूपांतरण के लिए केंद्रीय होंगे।

  • डाटा विश्लेषिकी और वास्तविक-समय कंटेंट प्रबंधन डाटा संग्रह और विश्लेषिकी कंपनियों को कई चैनलों और उपकरणों में उपभोक्ता अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है, जिससे उन्हें प्रासंगिक और सार्थक अनुभव प्रदान करने में सहायता मिलती है। डाटा विश्लेषिकी का यह वास्तविक-समय उपयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मीडिया संगठन अब न सिर्फ कंटेंट, बल्कि उस कंटेंट से संबंधित अनुभवात्मक सेवाएँ भी प्रदान करते हैं।
  • मोबाइल और सामाजिक शक्ति  मोबाइल और सामाजिक शक्ति मीडिया को उपयोग किए तथा देखे जाने के तरीके को बदल रही है। विशेष रूप से सामाजिक मीडिया पर साझा करने के माध्यम से निरंतर और त्वरित ऐक्सेस उपयोगकर्ताओं को किसी भी ब्रैंड और संस्था को बढ़ावा देने या फिर नष्ट करने के लिए सशक्त बनाता है। रातों रात प्रसिद्धि या तत्काल प्रतिष्ठात्मक संकट नई बातें हैं, जिन्हें व्यापार और प्रौद्योगिकी दृष्टिकोण से प्रबंधित किया जाना चाहिए।

मीडिया उद्योग का औद्योगिकीकरण नई डिजिटल प्रक्रियाएँ मीडिया के निर्माण, वितरण और मुद्रीकरण के तरीके को परिवर्तित कर रही हैं। परंपरागत रूप से, मीडिया उद्योग कंटेंट की रचना और वितरण का अनुकूलन करने पर ध्यान केंद्रित रहा, लेकिन आज कई कंपनियाँ कंटेंट का निर्माण करने के लिए कैटलॉग और तालिकाओं को डिजिटाइज़, नए अधिकार प्रबंधन प्रणालियों को लॉन्च कर रही हैं तथा और ऐल्गोरिदम लिख रही हैं।

मीडिया उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा, सुरक्षा की वजह से कई कंपनियाँ निजी क्लाउड मॉडल से जुड़ी हुई हैं। हालांकि, लागत में बढ़ोतरी, स्केलेबिलिटी मुद्दा और बेहतर क्लाउड सुरक्षा के साथ हाइब्रिड मॉडल की तरफ रूझान देखा जा रहा है। ये मॉडल सार्वजनिक और निजी क्लाउड का एक संयोजन हैं, जिसमें निजी क्लाउड अधिक संवेदनशील डाटा को संभालने में सहायता करता है।

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