5जी को मिला बढ़ावा इसे वास्तविकता बनाने के लिए सरकार ने तैयार किया पैनल

5जी को मिला बढ़ावा इसे वास्तविकता बनाने के लिए सरकार ने तैयार किया पैनल

वर्तमान में कई जगहों पर चौथी पीढ़ी या 4जी कनेक्शन के बावजूद भी, कई उपयोगकर्ताओं के लिए एक निर्बाध सेलफोन कॉल करना या अपने मोबाइल पर इंटरनेट सर्फिंग करना एक चुनौती बनी हुई है। खासकर यदि आप एक चलती गाड़ी में बैठे हुए हैं या किसी छोटे-से शहर या गांव के निवासी हैं  या ऐसे किसी भी क्षेत्र में हैं, जहाँ बेस स्टेशनों और टावरों की संख्या कम हैं।

इसके बावजूद भी, भारत अपनी “डिजिटल भारत” और “मेक इन इंडिया” की पहल को गति देने के लिए साल 2020 तक पांचवीं जनरेशन या 5जी नेटवर्क को लागू करने के लिए तैयार हो रहा है और वैश्विक प्रौद्योगिकी अंगीकरण के साथ तालमेल बनाए रखने की कोशिश में हैं, जहाँ युवा पीढ़ी स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, अन्य स्मार्ट वेयेरेबल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) संचालित उपकरणों से कनेक्ट होने वाले डिवाइसों का इस्तेमाल करने के आदी हों चुके हैं और कनेक्टेड गाड़ियों को चलाने के लिए भी उत्सुकता दर्शा रहे हैं।

सरकार ने यह घोषणा की है कि उसके द्वारा 5जी भारत 2020 फोरम की स्थापना की गई है, जिसमें सचिव, विशेषज्ञ और शिक्षाविद शामिल हैं। सरकार ने आगे कहा कि यह 5जी के समय से पहले शुभारंभ के लिए 500 करोड़ रुपए का एक कॉर्पस तैयार करेगा। सरकार द्वारा जारी की गई एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, भारत का उद्देश्य अगले पांच से सात वर्षों में भारतीय बाजार के 50 प्रतिशत और वैश्विक बाजार के 10 प्रतिशत को लक्षित करते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद विकास करना और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।

सरकार को उम्मीद है कि 5जी की शुरुआत करने के लिए उठाया गया यह कदम भारत में 5जी प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और समाधानों का डिजाइन तैयार करने और फिर उनका निर्माण करने में मदद करेगा, जिसके परिणामस्वरूप शहरी भारत में 10 जीबीपीएस (गीगाबिट्स प्रति सेकंड) और ग्रामीण भारत में 1 जीबीपीएस की इंटरनेट गति सहित 100 प्रतिशत कवरेज के साथ अगली पीढ़ी के सर्वव्यापी अल्ट्रा हाई ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर का त्वरित प्रयोग करने को सुविधाजनक बनाने के अलावा 5जी मानक में कुछ आवश्यक आईपीआर (बौद्धिक संपदा अधिकार) को विकसित करने में भी सहायता मिलेगी।

सरकार ने की रोडमैप तैयार करने हेतु एक पैनल की स्थापना

सरकार ने वर्ष 2020 तक भारत में 5जी मोबाइल नेटवर्क का रोलआउट करने के उद्देश्य से एक रोडमैप तैयार करने के लिए एक पैनल की स्थापना की है। सरकार के द्वारा उठाए गए इस कदम में न केवल वायरलेस कनेक्शन की गति को अत्यंत तेज बनाने का वादा किया गया है बल्कि इसमें इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट साधनों के प्रसार के लिए भी संभावना होगी। 5जी नेटवर्क अधिक गति प्रदान करने और लैटेंसी को कम करने का वादा करता है, कई ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं को सेवा पहुँचा सकता है और इसे इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (आईओटी), जिसका आशय डेटा भेजने और प्राप्त करने की क्षमता के साथ रोजमर्रा की वस्तुओं के इंटेलिजेंट बनने से है, के लिए भी अनुकूलित किया जा सकता है।

दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने यह बताया है कि उनके द्वारा एक उच्च स्तरीय 5जी समिति का गठन किया गया है, जो 5जी की दृष्टि, मिशन और लक्ष्यों पर काम करेगी। 5जी का आरंभ करने के लिए सरकार का यह दबाव इस तर्क से प्रेरित है कि भारत जो दूरसंचार सेवाओं के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है, को तब पीछे नहीं रह जाना चाहिए, जब पूरा विश्व 5जी को अपनाने में जुटा हुआ हो। इससे पहले भारत में 4जी को अपनाने में भी देरी हुई थी। मनोज सिन्हा ने आगे कहा कि जब साल 2020 में संपूर्ण विश्व में 5जी को अपनाया जाएगा, मेरा विश्वास ​​है कि तब भारत भी उनके साथ उसी समय ही 5जी को अपनाएगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के द्वारा अगस्त में 5जी नेटवर्क और आईओटी की शुरुआत के लिए नियमों और मानकों को तैयार करने पर एक परामर्श पत्र जारी किया गया है।

इस परामर्श पत्र में पिछली नीलामी में 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में न बिके 4जी वायुतरंगों का मूल्यनिर्धारण करने के साथ ही साथ 5जी स्पेक्ट्रम के लिए रोलआउट दायित्वों और स्पेक्ट्रम कैप्स पर टेलीकॉम ऑपरेटरों के विचार की मांग की गई थी। क्षेत्र नियामक ने 5जी सेवाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले 3,300-3,400 मेगाहर्ट्ज और 3,400-3,600 मेगाहर्ट्ज बैंडों में स्पेक्ट्रम की मूल्यांकन पद्धति पर उद्योग के विचारों की भी मांग की थी। एक स्पेक्ट्रम नीलामी संभावित रूप से सरकार के लिए और अधिक राजस्व पैदा कर सकती है लेकिन इसके लिए दूरसंचार कंपनियों को और अधिक निवेश करने की आवश्यकता होगी।

दूरसंचार सलाहकार कंपनी कॉमफस्ट के निदेशक, महेश उप्पल का मानना है कि निकट भविष्य में ऐसी तकनीकों का प्रारंभ करना व्यवहार्य नहीं लगता है। दूरसंचार कंपनियाँ निश्चित रूप से 5जी सेवाएँ प्रदान करना चाहेंगे, जब वे इस्तेमाव के लिए तैयार हो जाएँ। हालांकि, वे इस क्षेत्र की मौजूदा वित्तीय स्थिति में स्पेक्ट्रम के लिए बोली नहीं लगा सकते हैं। एक सरकार के रूप में, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि नेटवर्क विकास के लिए सार्वजनिक नीति का उद्देश्य  राजस्व को बढाने के रास्ते में एक बंधक नहीं बन जाए।

भारत के सबसे बड़े दूरसंचार सेवा प्रदाता, भारती एयरटेल लिमिटेड ने कहा है कि यह एक तथाकथित विशाल मल्टीपल-इनपुट मल्टीपल-आउटपुट (एमआईएमओ) तकनीक का प्रयोग करेगा, जो 5जी नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करेगा। एयरटेल ने अपने एक बयान में बताया है कि यह एक पूर्व 5जी तकनीक है, जो भारत में डिजिटल क्रांति और डेटा विस्फोट के फलस्वरूप होने वाली डेटा मांग को पूरा करने के लिए नेटवर्क को भविष्य के दिनों के लिए तैयार करेगी। एयरटेल ने आगे यह बताया कि  यह तकनीक मौजूदा नेटवर्क का इस्तेमाल का करते हुए मौजूदा नेटवर्क क्षमता का पांच से सात गुणा तक विस्तार करेगी, जिससे दक्षता में भी सुधार होगा। इस दूरसंचार कंपनी ने कहा है कि एयरटेल बेंगलुरु और कोलकाता में एमआईएमओ का क्रियान्वयन कर रहा है और जल्द ही देश के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार करेगा।

5जी की शुरआत में हैं आर्थिक लाभ भी

डिजिटल आर्थिक नीति पर गठित आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) समिति के अनुसार इसके हितलाभों में जीडीपी में वृद्धि, अतिरिक्त रोजगार और तेज डिजिटलीकरण शामिल हैं।

14 सितंबर को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय मोटर शो, क्वालकॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्टीव मोलेनकोप में अपने मुख्य भाषण में आईएचएस 5जी आर्थिक प्रभाव अध्ययन के बारे में बात करते हुए कहा कि केवल 5जी मोबाइल मूल्य श्रृंखला अकेले ही साल 2035 में 3.5 अरब डॉलर तक राजस्व में वृद्धि कर सकती है, और 22 लाख नौकरियाँ उत्पन्न कर सकती हैं। इस अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया है कि इसी अवधि में वास्तविक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 5जी का कुल योगदान भारत जैसे देश के समान ही काफी बड़ा होगा।

क्वालकॉम के मुताबिक 5जी सभी प्रकारों के स्पेक्ट्रम (लाइसेंस प्राप्त, साझा किए गए, लाइसेंस रहित) और बैंड (कम, मध्य, उच्च), डिप्लॉयमेंट मॉडलों की एक विस्तृत श्रृंखला (पारंपरिक मैक्रो सेल से लेकर हॉटस्पॉट तक) और साथ ही साथ इंटरकनेक्ट करने के नए तरीकों (जैसे कि डिवाइस से डिवाइस और मल्टी-हॉप मेष) का भी समर्थन करेगा।

5जी को अभी भी मानकीकृत किया जाना बाकी है, इसके बावजूद भी विक्रेता 5जी के विकास प्रयासों में निवेश कर रहे हैं। इन प्रौद्योगिकियों के विकास और डिप्लॉयमेंट में अल्काटेल-ल्यूसेंट, एरिक्सन, हुआई टेक्नोलॉजीज, नोकिया सॉल्यूशंस और नेटवर्क, एटी एंड टी इंक, मोटोरोला सॉल्यूशंस इंक, एनटीटी डोकोमो इंक, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी लिमिटेड, चाईना मोबाइल और वेरिज़ॉन कम्युनिकेशंस जैसी प्रमुख कंपनियाँ शामिल हैं।

वास्तव में, 28 जून को शंघाई में, चाईना मोबाइल और हूवाई ने मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (एमडब्ल्यूसी) में संयुक्त रूप से सेवा आधारित वास्तुकला (एसबीए) पर विश्व के सर्वप्रथम 5जी कोर नेटवर्क प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया था। यह प्रोटोटाइप 3जीपीपी के 5जी एसबीए मानक का पालन करता है। एक ऑनलाइन कोरियाई पोर्टल, बिज़नेस कोरिया में एक 26 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच, दक्षिण कोरिया, चीन और जापान सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देश 5जी फ्रिक्वेंसियों को प्राप्त करने और इस प्रौद्योगिकी में लीडर के रूप में अपनी स्थिति को सुरक्षित करने करने के उद्देश्य से 5जी मोबाइल दूरसंचार के लिए अनुसन्धान करने हेतु टीम बना रहे हैं।

28 जून को रिलीज़ किए गए जीएसएमए इंटेलिजेंस और चाईनी एकाडेमी ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कम्यूनिकेशंस टेकनॉलॉजी (सीएआईसीटी) के अध्ययन के मुताबिक, चीन ऑपरेटर साल 2020 तक वाणिज्यिक 5जी नेटवर्क का लॉन्च करने के लिए तैयार हैं और साल 2025 तक दुनिया के सबसे बड़े 5जी बाजार के रूप में चीन की स्थापना होने की उम्मीद की जा रही है। दक्षिण कोरिया, चीन, जापान, अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजिल सहित कई देशों में 2020 तक 5जी नेटवर्क को शुरू करने की संभावना है। यहाँ तक ​​कि पाकिस्तान सरकार ने भी अप्रैल में कहा कि वह जल्द ही 5जी नेटवर्क को आरंभ कर देंगे। अगर भारत वास्तव में एक सुनहरा और कनेक्टेड भविष्य चाहता है, तो इस दिशा में काम करना होगा।

संबंधित पोस्ट