4जी के बाद अब 5जी की धूम होगी 2019 तक हर हाथ होगी 5जी की स्पीड

4जी के बाद अब 5जी की धूम होगी 2019 तक हर हाथ होगी 5जी की स्पीड

देश की मोबाइल इंडस्ट्री में इन दिनों 4जी मोबाइल नेटवर्क को लेकर होड़ लगी है। हर मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनी 4जी नेटवर्क के नाम पर ग्राहकों को अपने पाले में बनाए रखने के साथ ही दूसरी कंपनियों के ग्राहकों को अपनी ओर खींचने में लगी हुईं हैं, लेकिन इन सबके के बीच अब देश में 5जी मोबाइल नेटवर्क को लॉन्च करने की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। सच तो ये है कि मोबाइन नेटवर्क की पांचवीं पीढ़ी यानी 5जी और वायरलेस सिस्टम अब हमारी पहुंच से बहुत दूर नहीं है। दावे किए जा रहे हैं कि जिस तरह आज हर हाथ में मोबाइल है, ठीक उसी तरह साल 2019 तक हर हाथ में 5जी नेटवर्क वाली मोबाइल सर्विस होगी। दस गुना तेज गति से सेवाएं देने के साथ ये एनर्जी की बचत भी करेगा। आईआईटी के स्थापना दिवस पर विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित और आईआईटी हैदराबाद के डायरेक्टर प्रो. उदय बी देसाई ने ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस शोध कार्य पर आईआईटी हैदराबाद, मद्रास, बांबे, दिल्ली और  पटना के अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस (आईआईएससी) मिलकर काम कर रहे हैं। इस बाबत इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने करीब 15 करोड़ रुपये अनुदान दिया है। प्रयोगशाला में इसका अध्ययन सफल पाया गया है। प्रो. उदय बी देसाई ने बताया कि आने वाले समय में घर के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को देश विदेश के किसी भी कोने से खोला या बंद किया जा सकेगा। इसके लिए डिवाइस और सेंसर पर किया जा रहा शोध कामयाब रहा है। इंटरनेट ऑफ थिंक्स डिवाइस और सेंसर पर शोध के कई चरण पूरे हो चुके हैं। शोध के इन चरणों के अंतर्गत फ्रिज और एसी में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाकर उसे संचालित करने के साथ यह भी देखा गया है कि उसके अंदर क्या रखा है। घर का दरवाजा खुला है या बंद, यह भी इससे देखा जा सकता है। जिस तरह वाईफाई के जरिए हम इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह पेटोकॉल (टेक्नोलॉजी) है जिससे हम किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को कहीं से भी संचालित कर सकते हैं। शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल पहले कंपनियां करेंगी, उसके बाद घर में लोग इस्तेमाल कर सकेंगे।

यानी जल्द ही भारत में 3जी और 4जी नेटवर्क से बढ़कर 5जी नेटवर्क की सुविधा मिल सकेगी। इस पर जोरशोर से काम चल रहा है। यही नहीं साल 2019 तक फाइव-जी सेवा लांच की जा सकती है। इस रिसर्च के लिए मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी ने आईआईटी को 15 करोड़ रुपये का बजट दिया है। ये जानकारी आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. उदय बी देसाई ने दी है। एक्सपर्ट के मुताबिक 5जी नेटवर्क 4जी के मुकाबले में 20 गुना तेजी से डेटा ट्रांसमिट कर सकेगा। 5G नेटवर्क 1 सेकंड में 20 गीगाबाइट्स तक की स्पीड पकड़ सकेगा। 5जी पर भले ही भारत में काम चल रहा हो, लेकिन चीन ऐसा देश हैं, जहां इस पर टेस्टिंग शुरू हो चुकी है। बताया जाता है कि चीन जल्द ही इसे आम लोगों तक भी पहुंचा देगा। भारत में आईआईटी दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, पटना और आईआईटी मद्रास मिलकर फाइव-जी पर काम कर रहे हैं। मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में दुनिया को पता चल गया है कि भारत में 5जी ट्रायल शुरू हो चुका है, लेकिन अब एक मोबाइल चिप जायंट ने इसके लिए समय सीमा तय कर दुनिया को हैरान कर दिया। हॉन्ग कॉन्ग में क्वालकॉम 4G/5G समिट के दौरान कंपनी ने पहले 5जी मॉडम, स्नैपड्रैगन एक्स50 के बारे में ऐलान किया, जो 5 Gbps तक की डाउनलोड स्पीड को सपोर्ट करेगा। यानी फिलहाल 4G LTE में मैक्सिमम 450Mbps और 150Mbps की स्पीड मिल पाती है, या ये मानें कि 4G LTE की क्षमता ही इतनी है। इसके आगे, कंपनी ने इतना तक कहा कि 2018 में ये हकीकत होगा और बाजार में एक्स50 मॉडम वाले स्मार्टफोन मौजूद होंगे। इसका मतलब है कि 2018 में 5G की भी शुरुआत संभव है। क्वॉलकॉम ने कहा है कि इस मॉडम को 5G के लिहाज से ही तैयार किया जा रहा है। क्वॉलकॉम ने कहा है कि अगले साल के सेकेंड हाफ में इसके सैंपल कस्मटर्स को भेजे जाएंगे और 2018 की शुरुआत में इसकी शिपिंग शुरू कर दी जाएगी। 5 Gbps डाउनलोड की बड़ी स्पीड को 800 MHz बैंडविथ के साथ mmWave स्पैक्ट्रम से हासिल किया जाएगा। एक्स50 28GHz बैंड में मिलीमीटर वेव (mmWave) स्पैक्ट्रम पर काम करेगा। इसमें वह MIMO (मल्टीपल इनपुट, मल्टिपल आउटपुट) एंटीना टेक्नॉलजी को यूज करेगा। मिलीमीटर वेव्स लंबी दूरी के लिए ट्रांसमिट नहीं हो सकती और 5जी स्पीड को रिएलिटी में आने के लिए ढेरों इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि वो डिवाइस कैसे होंगे? यानी स्मार्टफोन होंगे या राउटर्स होंगे जिसमें X50 लगाए जाएंगे, इसलिए किसी फ्लैगशिप डिवाइस में आप इसे जल्दी तो नहीं ही देखेंगे।

अभी भारत में 4G नेटवर्क आया ही है लेकिन दुनिया में 5G नेटवर्क पर तेजी से काम भी शुरू हो चुका है। हालांकि 2020 में दुनियाभर में 5G नेटवर्क को लाने की योजना है, लेकिन चीन ने सबसे आगे निकलते हुए इसका ट्रायल भी शुरू कर दिया है। आखिर 5G नेटवर्क क्या है? 5G नेटवर्क आने के बाद दुनिया कैसी होगी? हमारे आपके लिए ये एक अल्ट्रा स्पीड नेटवर्क होगा जिसमें 20 गीगाबाइट प्रति सेकंड की स्पीड मिलेगी। मोबाइल पर टच करते ही एक सेकंड के हजारवें हिस्से यानी एक मिलीसेकंड से भी कम समय में वेबपेज खुल जाएगा या वीडियो चलने लगेगा। पूरी फिल्म 5G नेटवर्क पर पांच से छह सेकंड में डाउनलोड हो जाएगी। यानी 5G नेटवर्क पर मोबाइल इंटरनेट चलने से हमारी दुनिया आज की अपेक्षा कई गुना ज्यादा तेज हो जाएगी, लेकिन ये तेजी इतनी आसानी से नहीं आने वाली है। 5G सेवा चालू करने के रास्ते में अभी बाधाएं हैं जिससे पार पाने की तैयारियां चल रही हैं। प्रोसेसिंग के लिए पावरफुल तकनीक का विकास इस अल्ट्रास्पीड नेटवर्क 5G की लेटेंसी बहुत कम है। टच या क्लिक के बाद डाटा रिक्वेस्ट भेजने और डाउनलोड होने में जितना समय लगता है उसे लेटेंसी कहते हैं। यानी काफी कम समय में डाटा प्रोसेस होगा और इसके लिए बहुत ज्यादा प्रोसेसर पावर की जरूरत होगी। साथ ही 5G नेटवर्क के लिए मोबाइल डिवाइस भी बनाने पड़ेंगे। फास्ट स्पीड के लिए इंटेलिजेंट नेटवर्क वीडियो देखने की जरूरत की वजह से 4G का विकास हुआ, जबकि 5G का विकास इंटरनेट से जुड़ी लोगों की कई जरूरतों की वजह से हो रहा है। 5G के लिए इंटेलिजेंट नेटवर्क बनाया जाएगा ताकि यह एक मिलीसेकंड से भी कम समय में किसी भी लोकेशन में यूजर की मांगों को पूरा कर सके। 4G नेटवर्क में ये संभव नहीं हो पा रहा है। 5G इंटरनेट एक तरह से सेल्फ ड्राइविंग कार की तरह होगा, जो खुद रिसोर्सेज तलाश कर यूजर्स को सोल्यूशन देगा। 5G के लिए ड्रोन और बैलून पर बेस स्टेशन 5G का सिद्धांत है – सब चीज के लिए इंटरनेट और सभी जगह इंटरनेट। कनेक्टिविटी की ये क्रांति लाने के लिए हो सकता है कि 5G के सिग्नल पहुंचाने वाले बेस स्टेशन्स के लिए ड्रोन्स और बैलून्स का इस्तेमाल हो। कनेक्टेड दुनिया का निर्माण 5G एक ऐसी कनेक्टेड दुनिया का निर्माण करेगा जो हर तरह की जानकारियां देगा। फिलहाल दुनिया के 15 अरब डिवाइस एक दूसरे से कनेक्टेड हैं। 2020 के अंत तक 5G के लिए कम से कम दुनियाभर के 50 अरब डिवाइसेस को कनेक्ट करने की योजना है ताकि लोगों तक हर तरह की सूचनाएं पहुंचाई जा सके। 5G नेटवर्क सेवा देना किसी एक कंपनी के बस की बात नहीं है। इसके लिए सरकारों, दुनियाभर की कंपनियों और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक साथ काम करना होगा। 5G नेटवर्क तभी सफल होगा जब दुनियाभर के लोगों और देशों के बारे में कई तरह की जानकारियों तक इसका एक्सेस होगा। यूनिवर्सल स्टैंडर्ड पर 5G सेवा शुरू करने की चुनौती यूनाइटेड नेशंस के इंटरनेशनल टेलिकम्यूनिकेशंस यूनियन को उम्मीद है कि 2020 से ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुसार 5G सेवाओं की शुरुआत हो जाएगी। दुनियाभर के टेलीकॉम कंपनियों के लीडर्स के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि एक समान स्टैंडर्ड बनाकर 5G की सेवाएं देने में फायदा है।

जहां तक भारत का सवाल है तो यहां अभी 4G सेवाओं के लिए ही ठीक से इंटरनेट नेटवर्क काम नहीं कर रहा है, इसलिए यहां 5G आने में वक्त लग सकता है, लेकिन दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देश में 4G का नेटवर्क बहुत मजबूत है इसलिए वहां 5G लाना आसान होगा। चीन तो इसका ट्रायल भी शुरू कर चुका है। चीन ने लगभग 100 शहरों में दूरसंचार की 5वीं पीढ़ी यानी 5G टेक्नोलॉजी के दूरसंचार उपकरणों का परीक्षण शुरू किया है। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बर्नस्टेन रिसर्च की रिपोर्ट के आधार पर इस आशय की खबर प्रकाशित की है। चीन ग्राहकों की संख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है और वह सेल्यूलर फोन प्रणालियों में अगली पीढ़ी की दौड़ में आगे रहना चाहता है। चीन में 1.3 अरब फोन यूजर में से 30% 4G टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूरसंचार की 5G टेक्नोलॉजी मौजूदा 4G टेक्नोलॉजी की तुलना में 20 गुना तेज होगी और इसमें ‘डेटा लॉस’ बहुत कम होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 5G टेक्नोलॉजी के परीक्षण के साथ अधिक उपयोक्ता और हाइस्पीड डेटा में सक्षम एंटीना प्रणाली का भी परीक्षण किया जा रहा है।

इंडस्ट्री एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री (MIIT) के मुताबिक, चीन में 1.3 अरब मोबाइल फोन यूजर्स हैं। करीब 30 फीसद यूजर्स 4G नेटवर्क यूज करते हैं। हाई स्पीड 5G नेटवर्क 1 सेकेंड में 20 गीगाबाइट्स तक की स्पीड पकड़ सकेगा। यह 4G की मौजूदा स्पीड से 1 Gbps ज्यादा है। इसके अलावा, एप को क्लिक करने के बाद मिलने वाले रिस्पॉन्स टाइम में भी कमी आएगी। 5G में यह टाइम 1 मिली सेकेंड या उससे भी कम होगा, जबकि 4जी पर यह 10 मिली सेकेंड है। चाइना मोबाइल पहले ही ये एलान कर चुकी है कि 2020 तक वो देश में 5G नेटवर्क सर्विस लॉन्च कर देगी। मिनिस्ट्री 5G से जुड़े रिसर्च और जांच का काम 2018 तक पूरा कर लेगी।

दूरसंचार सचिव जेएस दीपक ने हाल ही में कहा था कि हम इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) में प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में इस बात की संभावना है कि देश को 5G शेष दुनिया के साथ मिले। दीपक ने कहा, “हमें 2G शेष दुनिया से 25 साल बाद मिला, कम से कम विकसित दुनिया से। इसी तरह हमें 3G उस समय मिला जबकि एक दशक पहले यह अमेरिका और यूरोप पहुंच चुका है। इसी तरह 4G उसे वैश्विक रूप से पेश किए जाने के पांच वर्ष बाद हमारे पास पहुंचा। 5जी के मामले में ऐसी संभावना है कि यह हमें शेष दुनिया के साथ ही मिलेगा।

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