दुनिया को भारत देगा 5जी का तोहफा

दुनिया को भारत देगा 5जी का तोहफा

देश में मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां इन दिनों अपने अपने सर्कल में फोर जी नेटवर्क को फैलाने की प्रक्रिया तेज है, लेकिन अब देश में इससे भी कई गुणा तेज फाइव जी तकनीक पर काम शुरू हो गया है। सबसे खास बात ये है कि दुनियाको 5जी की ये सौगात खुद भारत देगा। 5जी तकनीक विकसित करने के लिए आईआईटी पटना में 5जी इनोवेशन लैब की शुरुआत हो रही है। दुनिया को 5जी की परिभाषा से पहली बार रूबरू कराने वाले बिहार निवासी और डेनमार्क के आलबोर्ग विवि के प्रोफेसर रामजी प्रसाद के नेतृत्व में दुनियाभर में रह रहे भारतीय वैज्ञानिक इसमें जुट रहे हैं। प्रोफेसर रामजी प्रसाद ने कहा कि यूं तो अमेरिका, जापान, चीन सभी 5जी विकसित करने में जुटे हैं। पर, हम चाहते हैं कि सबसे पहले हम इसे विकसित करें। चूंकि दुनिया के अन्य देशों में भी भारत की मेधा ही काम कर रही है, ऐसे में मुझे उम्मीद है कि हम इसे पहले विकसित कर लेंगे। वायरलेस कम्युनिकेशन के जनक कहे जाने वाले तोकोहू विवि, जापान के प्रो. शू कातो ने भी माना कि भारत 5जी तकनीक का विकास कर सकता है। उन्होंने कहा कि चीन, जापान या फिर भारत कोई भी इसे पहले विकसित कर सकता है। इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्स्ट्स की मानें तो 5जी को विकसित चाहे जो भी क्यों न करे, संचार के क्षेत्र में ये एक बड़ी क्रांति होगी, जो पूरी दुनिया को बदल देगी।

आईआईटी पटना में पिछले दिनों 5जी पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुरू हुआ था। इस मौके पर प्रो. प्रसाद ने बताया था कि साल 2018 तक हम 5जी तकनीक विकसित करने में सफल होंगे। 2020 तक इसे पूरे तरीके से देश प्रयोग करने लगेगा। केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार ने 5जी तकनीक विकसित करने के लिए आईआईटी पटना सहित आईआईटी मुंबई, आईआईटी मद्रास और आईआईएससी बेंगलुरु को 36 करोड़ रुपए दिए हैं। हम चाहते हैं कि सभी साथ मिलकर काम करें और हम इस दिशा में दुनिया में अव्वल साबित हों। संचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सबसे बेहतर प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। आईआईटी पटना के निदेशक प्रो. पुष्पक भट्टाचार्य ने कहा कि दुनिया में हम इतिहास बनाने जा रहे हैं। ये बिहार सहित पूरे देश के लिए गर्व की बात है। इसके साथ ही केंद्रीयमंत्री रविशंकर प्रसाद ने आईआईटी पटना में सुपर कंप्यूटिंग रिसर्च सेंटर खोलने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत में सुपर कंप्यूटिंग रिसर्च के लिए कुल 42 सेंटर खुलने जा रहे हैं। इसमें से एक सेंटर आईआईटी पटना में खुलेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि आईआईटी पटना में बड़े स्तर पर शोध हो। देश के तकनीकी विकास में आईआईटी पटना का योगदान बढ़चढ़कर मिले। उन्होंने आईआईटी पटना में डिजिटल पोस्टऑफिस खोलने की भी घोषणा की।

जानकार बताते हैं कि 5जी तकनीक की स्पीड 3जी के मुकाबले 1000 गुना ज्यादा होगी। मतलब ये कि इस तकनीक की मदद से तीन घंटे की फिल्म आप सिर्फ 3-5 सेकेंड में ही डाउनलोड कर लेंगे। सिर्फ स्पीड ही नहीं, 5जी से आपकी पूरी जीवनशैली ही बदल जाएगी। सिर्फ इंसान ही नहीं इसके जरिए मशीनें भी आपस में बात करेंगी। इंसान से भी मशीनें बात करेंगी। जैसे-अगर आप घर पर पंखा चलता छोड़कर कहीं बाहर निकल गए हैं, तो पंखा आपको सूचना देगा कि मैं चल रहा हूं, मुझे बंद कीजिए।

जापान, चीन, अमेरिका के साथ 5जी तकनीक विकसित करने की होड़ में भारत का भी जुटना वाकई में देश के लिए गर्व की बात है। आईआईटी पटना में इसकी शुरुआत हो चुकी है।बिहार के रहने वाले और डेनमार्क के आलबोर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रामजी प्रसाद इस रिसर्च टीम को लीड कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि संभव है कि हम दुनिया में सबसे पहले 5जी तकनीक को विकसित कर पाएंगे। 5जी तकनीक की सबसे बड़ी खासियत ये होगी कि आपात स्थिति में जिस तरह नेटवर्क ठप हो जाता है, वैसा इस तकनीक में नहीं होगा। 5जी तकनीक वायरलेस वर्ल्ड वाइड वेब पर आधारित होगी। 5जी की स्पीड एक टेराबाइट होगी। मतलब फिलहाल 3जी की जो स्पीड है, उसके करीब 1000 गुना अधिक स्पीड मिलेगी। हालांकि अभी इसकी स्पीड परिभाषित नहीं हुई है।

इंटरनेट पर सबसे परेशानी वाला वक्त वो होता है, जब हम कोई वीडियो डाउनलोड कर रहे हों और इंटरनेट की स्पीड कम होने की वजह से वह वीडियो डाउनलोड होने में बहुत ज़्यादा वक्त लगा दे। 3जी मोबाइल इंटरनेट और तेज़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन आने से पहले तो मूवी डाउनलोड करना कुछ मिनटों नहीं, बल्कि घंटों का काम हुआ करता था। ऐसे में ये जानना एक बड़ी हैरानी का विषय हो सकता है कि 5जी से पूरी मूवी सिर्फ 5 सेकेंड्स में ही डाउनलोड हो जाएगी।जी हां, आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा है। नई टेक्नोलॉजी, जिस पर फिलहाल काम चल रहा है, ये संभव बना देगी कि आपको वर्तमान में मिल रही इंटरनेट स्पीड से 1000 गुना ज़्यादा तेज़ डाउनलोड स्पीड मिले। दरअसल एक्सपर्ट्स 5जी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, जिससे आप पूरी मूवी को अविश्वसनीय लगने वाली स्पीड पर केवल 5 सेकेंड में ही डाउनलोड कर सकेंगे। अभी हम जो इंटरनेट स्पीड यूज़ कर रहे हैं, यह स्पीड उससे 1000 गुना ज़्यादा तेज़ होगी।इसके लिए नेटवर्क को पहले से तेज़ बनाने की योजना बनाई गई है, जिससे यूज़र्स आसानी से, बिना किसी बफरिंग के वीडियो देख सकेंगे और बहुत ही तेज़ गति से उन्हें डाउनलोड भी कर सकेंगे। दुनिया भर के रिसर्चर्स इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ सर्रे में इस नई तकनीक पर काम में जुटे हुए हैं। सैमसंग और फुजिट्सू जैसी दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी भी ऐसी मोबाइल इंटरनेट तकनीक की खोज में सहयोग कर रहे हैं, जो अभी मौजूद किसी भी इंटरनेट स्पीड से कहीं ज़्यादा तेज़ हो।

बताया जाता है कि साल 2018 तक वायरलेस 5जी यूज़र्स के लिए बाज़ार में उतरी जाएगी और उसकी स्पीड 4जी की एडवांस टेकनोलॉजी से कहीं ज़्यादा तेज़ होगी। 5जी फोन्स के शुरुआती प्रोटोटाइप्स पर इंटरनेट की गति 3.77 जीबी प्रति सेकेंड दर्ज की गई है, जो कि गूगल फाइबर नेटवर्क से 300 गुना ज़्यादा तेज़ है और आज की सबसे तेज़ मोबाइल इंटरनेट 4जी से भी बहुत तेज़ है।

यानी भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में भले ही अभी 4जी तकनीक भी नहीं पहुंच पाई हो लेकिन 5जी की तैयारी शुरू हो गई है। इस सुविधा के आने के बाद दावा किया जा रहा है कि महज 5 सेकेंड में ही मूवी डाउनलोड की जा सकती है।भारत के पटना आईआईटी के अलावा साउथ लंदन के गिल्डफर्ड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सरे में इस पर रिसर्च चल रहा है। 5जी को तैयार करने में जुटे शोधकर्ताओं का कहना है कि 2018 तक ये तकनीक सार्वजनिक उपयोग के लिए तैयार हो जाएगी। अभी इसका सफल इस्तेमाल प्रयोगशाला के स्तर पर किया जा रहा है। इस तकनीक के जरिये घर के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे स्मार्ट वॉच आदि के साथ ही स्वचालित कारों को भी जोड़ा जा सकेगा। इस नई तकनीकि की वजह से लोगों को इंटरनेट का बिल्कुल अलग ही अहसास पता चलेगा। 5जी तकनीक को तैयार करने में चीन, अमेरिका और स्वीडन जैसे देश की बड़ी कंपनियों ने बड़े निवेश किए हैं। एटीएंडट, जापान की डोकोमो और एरिक्सन जैसी कंपनियां जल्द से जल्द 5जी तकनीक तैयार कर लेना चाहती हैं।

चीनी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिनस्ट्रिी ऑफ इंडस्‍ट्री एंड इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी (एमआईआईटी) 5जी से जुड़ा रिसर्च और जांच का काम 2018 तक पूरा कर लेगा। इसके दो साल बाद टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स 5जी सेवा दे सकेंगे।चीन की योजना भारत से पहले साल 2020 तक देश में 5जी मोबाइल सर्विस लॉन्‍च कर देने की है।चीनी सरकार ने संचार के क्षेत्र में 5जी तकनीक का परीक्षण शुरू कर दिया है। उसकी योजना 2020 तक देश में 5जी मोबाइल सर्विस लॉन्‍च कर देने की है। बता दें कि भारत अभी 3जी तकनीक भी पूरे देश में नहीं पहुंचा पाया है। हालांकि देश के कई हिस्सों में अब 4जी तकनीक की शुरुआत कर दी गई है। चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मिनस्ट्रिी ऑफ इंडस्‍ट्री एंड इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी (एमआईआईटी) 5जी से जुड़ा रिसर्च और जांच का काम 2018 तक पूरा कर लेगा। इसके दो साल बाद टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स 5जी सेवा दे सकेंगे।एमआईआईटी के चीफ इंजीनियर झैंग फेंग ने कहा किचीन ने 5जी तकनीक से जुड़े रिसर्च के मामले में कई अहम कामयाबी हासिल कर ली है। एमआईआईटी ने इस रिसर्च के लिए जो टीम बनाई है, उसके प्रमुख साओ शुमिन ने कहा किरिसर्च का मकसद विश्‍व स्‍तर की 5जी सेवा मुहैया कराना और दूरसंचार उद्योग को गति देना है। चीन में फिलहाल 905 मिलियन से ज्यादा मोबाइल इंटरनेट यूजर्स हैं। इनमें से 380 मिलियन 4जी इस्‍तेमाल करते हैं।

सिर्फ चीन ही नहीं अगले कुछ वर्षों में भारत में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए 5जी तकनीक की लांचिंग हो सकती है, क्योंकि कुछ कंपनियों ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि यहां अब भी 2जी और 3जी का दौर ही चल रहा है, 4जी तकनीक अभी बिल्कुल शुरुआती चरण में है। दूसरी ओर दुनिया के कई देशों में 5जी तकनीक पर तेजी से काम चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक नये तरह की क्रांति के सूत्रपात में 5जी तकनीक की व्यापक भूमिका होगी, जिसके जरिये दुनिया कई क्षेत्रों में व्यापक बदलाव की साक्षी बनेगी। कैसे होगा ये बदलाव और कितना प्रभावी होगा 5जी तकनीक आपको बताते हैं।

टेलीकॉम उपकरण बनानेवाली स्वीडन की कंपनी एरिक्सन ने हाल ही में भारत में नये रेडियो सिस्टम की शुरुआत की है। कंपनी की ओर से ये कहा गया है कि इस नये रेडियो सिस्टम के माध्यम से कंपनी को भविष्य में भारतीय उपभोक्ताओं को कनेक्टिविटी के लिए 5जी टेक्नोलॉजी यानी पांचवीं पीढ़ी की तकनीक मुहैया कराने में सुविधा होगी। कंपनी के प्रेसिडेंट और चीफ एग्जीक्यूटिव हंस वेस्टबर्ग ने कहा कि एरिक्शन रेडियो सिस्टम के माध्यम से मुहैया कराई जानेवाली 5जी सेवा ग्राहकों को करीब 20 फीसदी कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा सकती है। कंपनी का मानना है कि वर्ष 2020 तक वैश्विक स्तर पर 5जी के कॉमर्शियलाइज होने की दशा में प्रतिमाह मोबाइल डाटा की मांग 25 एक्साबाइट्स तक पहुंच सकती है। आपको बता दें कि एक एक्साबाइट्स एक बिलियन गीगाबाइट केबराबर होता है। वेस्टबर्ग के हवाले से छपी रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में वर्ष 2020 तक मोबाइल इंटरनेट कनेक्टिविटी का दायरा सौ फीसदी तक पहुंच जायेगा और इसमें से आधा नेटवर्क 3जी और 4जी का होगा, जबकि उस समय दुनिया में इनोवेशन का अगला चरण 5जी के रूप में प्रदर्शित होगा। वर्ष 2020 तक हमारे पास इंटरनेट से कनेक्टेड अनेक नये उपकरण हो सकते हैं। इसके अलावा, वीडियो ट्रैफिक 22 गुना बढ़ जायेगा और मोबाइल उपकरण टेलीविजन की तरह हो जायेगा, जिसमें उपभोक्ता लाइव फिड्स हासिल करते हैं। ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ का भी दिनोंदिन विस्तार हो रहा है। ऐसे में ज्यादा उपकरणों के इंटरनेट से कनेक्टेड होने की दशा में इसके नेटवर्क पर स्पीड और कनेक्टिविटी को बरकरार रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। यही कारण है कि दुनिया 5जी की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है। हालांकि, कारोबारी तौर पर 5जी का इस्तेमाल हो पाने की उम्मीद वर्ष 2020 तक है, लेकिन मौजूदा रणनीति इसकी पृष्ठभूमि को पूरी तरह से मजबूती प्रदान करने की है। कंपनी का नया रेडियो सिस्टम मल्टी-स्टैंडर्ड, मल्टी-ब्रांड और मल्टी-लेयर टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करेगा और 5जी की तैयारी करेगा। कंपनी का दावा है कि ये सिस्टम कम ऊर्जा की खपत करेगा और भारत में सघनता से नेटवर्क मुहैया कराने में सक्षम हो सकता है।

आपको बता दें कि इस साल की शुरुआत में एरिक्शन ने प्री-स्टैंडर्ड 5जी टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया था, जिसमें 15 गीगा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया गया था और पांच जीबीपीएस (गीगाबाइट्स प्रति सेकेंड) की दर से इसे डिलिवर करने में कामयाबी हासिल हुई थी। वेस्टबर्ग ने कहा कि हालांकि 5जी स्टैंडर्ड वर्ष 2020 तक ही पूरी तरह से स्थापित हो पायेगा, लेकिन 2018 के दौरान इसका प्री-कॉमर्शियल लॉन्च किया जायेगा। वेस्टबर्ग ने उम्मीद जताई कि पुणे स्थित एरिक्शन के प्लांट में 2016 की दूसरी तिमाही में इस संबंध में काम शुरू हो सकता है। एरिक्शन की योजना के मुताबिक, वो इस प्लांट में करीब 15 से 20 मिलियन डॉलर तक का निवेश कर सकती है, ताकि इस सेंटर को एक बड़े एक्सपोर्ट हब के तौर पर विकसित किया जा सके और दुनिया के करीब 180 देशों में भारत से ही इसके उपकरणों की आपूर्ति की जा सके। इसके अलावा, एक ऐसे सॉफ्टवेयर को भी विकसित करने के लिए भारी रकम खर्च की जा रही है, ताकि ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ को कम बैट्री की खपत में ज्यादा से ज्यादा कारगर बनाया जा सके। साथ ही, इंटरनेट ऑफ थिंग्स को ज्यादा बेहतर बनाने के लिए अनेक डिवाइसेज को विकसित किया जायेगा। ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ ऐसे कनेक्टेड डिवाइस हैं, जिनसे किसी अन्य डिवाइस का संचालन आसान होता है। हालांकि, ये डिवाइस बेहद उपयोगी हैं, लेकिन अभी लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि इनकी कीमत ज्यादा है और बैट्री लाइफ कम होने के साथ सेलुलर कवरेज की दशा भी बहुत अच्छी नहीं है। सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और कंपनी की रेडियो बिजनेस यूनिट के हेड अरुण बंसल के हवाले से छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इन तरीकों से कंपनी भारत में मोबाइल उपभोक्ताओं को 5जी की रोड पर तेजी से लाने की तैयारी में है। 2जी, 3जी और 4जी के मुकाबले 5जी तकनीक न केवल स्पीड में काफी फास्ट होगा, बल्कि कई अन्य मामलों में भी कुछ अलग होगा। मौजूदा तकनीकों का इस्तेमाल जहां सामान्य उपभोक्ताओं को इंटरनेट कनेक्टिविटी मुहैया कराने के लिए किया जा रहा है, वहीं 5जी तकनीक को इंटरनेट के औद्योगिक इस्तेमाल के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। वेस्टबर्ग  के मुताबिक, साल 2020 तक दुनिया में 7.7 अरब मोबाइल ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर होंगे और करीब 70 फीसदी लोगों के पास स्मार्टफोन मौजूद होगा। इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी की मदद से दुनिया में रोजगार के नये मौके पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को इससे गति मिलेगी। यानी आने वाले कुछ वर्षों में तकनीकी की दुनिया में बड़े बदलाव देखने को मिलने वाले हैं जो दुनिया की शक्ल-ओ-सूरत ही बदल कर रखने वाली है।

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