इंटरनेट कनेक्टिविटी को बढ़ाता है ऑप्टिकल फाइबर बदल रहा है संचार का भविष्य

इंटरनेट कनेक्टिविटी को बढ़ाता है ऑप्टिकल फाइबर बदल रहा है संचार का भविष्य

इस आधुनिक समय में अस्तित्व की कुंजी है संचार। द्रुत संचार के लिए कई अलग-अलग तरह के माध्यम मौजूद हैं। तथापि, फाइबर ऑप्टिक संचार अद्वितीय है। इसकी बात ही कुछ अलग है। परंपरागत रूप से, हमारे पास संचार के लिए विद्युत तार होते हैं। फाइबर ऑप्टिक्स उच्च गति के साथ आगे बढ़ने वाली रौशनी के साथ विद्युत कनेक्टिविटी की जगह ले लेता है। इसलिए, फाइबर ऑप्टिक संचार ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से प्रकाश के पल्सों को भेजते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जानकारी भेजने का एक तरीका है। इस प्रकाश से एक विद्युत चुम्बकीय वाहक तरंग बनता है, जो जानकारी ले जाने के लिए मॉड्यूलेटेड है। 1970 के दशक में पहली बार विकसित, फाइबर ऑप्टिक्स ने दूरसंचार उद्योग में क्रांति ला दी और सूचना युग के आगमन में एक प्रमुख भूमिका निभाई। विद्युत संचरण की तुलना में अधिक फायदों के कारण, ऑप्टिकल फाइबर ने विकसित दुनिया में प्रमुख नेटवर्कों में तांबा तार संचार में बड़े पैमाने पर बदलाव किया है।

ऑप्टिकल फाइबर की अभी तक पाँच पीढ़ियाँ हुई हैं। वे मुख्यतः तरंग दैर्घ्य, दर और रिपीटर स्पेसिंग में उन्नत हुए हैं। यहाँ उन पीढ़ियों का उल्लेख है जिनसे संचार का चेहरा बदला है और बदल जाएगा।

मल्टी टेराबिट ऑप्टिकल नेटवर्क

डेंस वेव डिवीज़न मल्टीप्लेक्सिंग (डीडब्लूडीएम) मल्टी-टेरेबिट प्रसरण के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। वर्धित बैंडविड्थ की आवश्यकता ने मल्टी-टेराबिट ऑप्टिकल नेटवर्क के विकास में रुचि पैदा कर दी है। शोधकर्ता 100 जीबीपीएस वाले उच्च बैंडविड्थ को प्राप्त करने पर विचार कर रहे हैं। फाइबर ऑप्टिक घटकों की लागत में लगातार कमी के साथ, भविष्य में बेहतर बैंडविड्थ की उपलब्धता संभव है।

इंटेलीजेंट ऑप्टिकल ट्रांसमिशन नेटवर्क

बैंडविड्थ के गतिशील आबंटन की अनिश्चितता के कारण पारंपरिक ऑप्टिकल नेटवर्क तेजी से विकसित होने वाली डेटा सेवाओं के लिए अनुकूल नहीं होते हैं। वे मुख्य रूप से नेटवर्क कनेक्टिविटी के मैन्युअल कॉन्फ़िगरेशन पर निर्भर करते हैं, जो अधिक समय लेते हैं और आधुनिक नेटवर्क की मांगों को पूरा करने में सक्षम नहीं होते हैं। इंटेलीजेंट ऑप्टिकल नेटवर्क ऑप्टिकल नेटवर्क के विकास में एक भावी ट्रेंड है और इसमें बैंडविड्थ आबंटन की अनिश्चितता को अपनाने की क्षमता हो जाएगी।

पॉलिमर ऑप्टिक फाइबर

पॉलिमर ऑप्टिकल फाइबर तांबा केबल, बेतार संचार प्रणाली और ग्लास फाइबर जैसे अन्य डेटा संचार समाधानों की तुलना में कई लाभ प्रदान करते हैं। ग्लास ऑप्टिकल फाइबरों की तुलना में, पॉलिमर ऑप्टिकल फाइबर ऑप्टिकल संकेतों का आसान और कम महंगा प्रसंस्करण प्रदान करते हैं और अधिक लचीला होते हैं।

केबल बनाम फाइबर इंटरनेट

भारतीय प्रौद्योगिकी बाजार ने पिछले छह महीनों में इंटरनेट के क्षेत्र में कुछ बड़े विकास देखे हैं। रिलायंस जियो 4जी सेवाओं द्वारा शुरू किए गए एक ट्रेंड ने बाजार में हलचल मचा दी और यहाँ तक ​​कि अन्य दूरसंचार ऑपरेटरों को भी सस्ती 4जी इंटरनेट सेवाएँ प्रदान करने के लिए मजबूर कर दिया। जबकि अन्य दूरसंचार कंपनियाँ अभी भी इस दुविधा में हैं कि रिलायंस की इतनी सस्ती इंटरनेट योजनाओं से कैसे निपटा जाए, रिलायंस ने भारतीय इंटरनेट को वैश्विक पैमाने पर स्थान दिलाने के लिए फाइबर ऑप्टिक्स पर आधारित सुपर फास्ट इंटरनेट गीगाफाईबर योजना की भी पेशकश कर ली है। हालांकि, एयरटेल ने भी पीछे न रहते हुए एयरटेल वी-फाइबर की पेशकश की जो कि सुपर फास्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदाने करने के लिए लक्षित इस कंपनी की फाइबर तकनीक है।

फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट संचार के क्षेत्र में अपेक्षाकृत एक नई तकनीक है और यह स्रोत से गंतव्य तक डेटा संचारित करने के लिए फाइबर ऑप्टिक केबल का इस्तेमाल करता है। एक फाइबर ऑप्टिक केबल ग्लास या मिश्रित प्लास्टिक के अत्यंत पतली स्ट्रैंडों, जिन्हें ऑप्टिकल फाइबर के रूप में जाना जाता है, से बनता है। सूचना या डाटा प्रकाश या ऑप्टिकल तकनीक पर प्रसारित होता है, जिसके लिए प्रकाश को समग्र आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत का पालन करने की आवश्यकता होती है। यदि प्रकाश लीक होता है, जो कांच के स्ट्रैंडों द्वारा प्रकाश पैकेटों के अवशोषित किए जाने की स्थिति में होता है, तो संचार में समस्या आती है। जहाँ तक पारंपरिक केबल इंटरनेट का संबंध है, संचार का यह रूप मौजूदा टेलीफोन नेटवर्क का उपयोग करता है और उपयोगकर्ता को एक केबल मॉडेम रखने की आवश्यकता होती है। डाटा को समाक्षीय केबलों के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है।

चूँकि ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क में डाटा को पैकेट के रूप में प्रकाश के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, संचार की गति पारंपरिक एडीएसएल ब्रॉडबैंड की तुलना में बहुत तेज होती है। फाइबर नेटवर्क से डेटा को अधिक दूरी तक तेजी से भेजा जा सकता है। हालांकि एक फाइबर नेटवर्क स्थापित करने की प्रक्रिया अधिक जटिल होती है और पारंपरिक केबल नेटवर्क की तुलना में अधिक समय लेती है।

ऑप्टिक फाइबर विश्वसनीयता के मामले में भी केबल नेटवर्क से बेहतर है। ऐसा इसलिए है क्योंकि डाटा को बिजली से नहीं प्रकाश से प्रसारित किया जाता है। इसलिए, इसमें विद्युत जाने पर या जैसा आम तौर पर किसी भी भौतिक क्षति पर पारंपरिक केबल नेटवर्क के साथ होता है, संचार प्रभावित नहीं होता है।

इंटरनेट को कैसे बढ़ावा देता है ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क

 भारतीय दूरसंचार उद्योग के लिए, ऑप्टिक फाइबर ने कनेक्टिविटी के तीसरे युग (द थर्ड एज ऑफ कनेक्टिविटी) के बहु-आकांक्षित लहर की शुरुआत कर दी है। ऑप्टिक फाइबर को प्रारंभ किए जाने से पहले, ब्रॉडबैंड सेगमेंट कॉपर तार पर पूरी तरह निर्भर था। ब्रॉडबैंड को निर्दिष्ट डाउनलोड गति के साथ हमेशा ‘चालू’ रूप में परिभाषित किया जाता है और ब्रॉडबैंड में अच्छी गुणवत्ता का अनुभव होना चाहिए। हाल ही में, सरकार और भारतीय दूरसंचार ऑपरेटर दोनों अचानक ऑप्टिक फाइबर केबलों का बढ़ चढ़कर इस्तेमाल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं क्योंकि भविष्य इसी में है। भारत नेट परियोजना और डिजिटल इंडिया अभियान को प्रेरित करते हुए भारत सरकार भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में ऑप्टिक फाइबर युग के लाभों और जरूरतों का प्रचार कर रही है।

विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों ने ऑप्टिक फाइबर का बहुत पहले से ही प्रयोग शुरू कर दिया था। आश्चर्य की बात नहीं कि यह अंतर संपूर्णतः विकसित देशों और भारत के डेटा स्पीड में स्पष्ट दिखता है। जब बात ब्रॉडबैंड बैंडविड्थ और गति की आती है, भारत इन देशों से काफी पीछे है। दरअसल, ऑप्टिक फाइबर उस परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक है, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था में शामिल करने की जरूरत है, अगर हम चाहते हैं कि हम दुनिया के पूरी तरह से विकसित देशों के साथ-साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।

सेंवदक 

फाइबरों को सुदूर संवेदन में एकाधिक उपयोग किया जाता है। कुछ अनुप्रयोगों में, संवेदक ही ऑप्टिक फाइबर होता है। अन्य मामलों में, एक गैर-ऑप्टिक फाइबर संवेदक को एक मापन प्रणाली से कनेक्ट करने के लिए फाइबर का प्रयोग किया जाता है। अनुप्रयोग के अनुसार, फाइबर का इस्तेमाल इसके छोटे आकार के कारण किया जा सकता है या इस बात के लिए कि दूरदराज के स्थान पर किसी विद्युत शक्ति की आवश्यकता नहीं होती है या क्योंकि प्रत्येक संवेदक के लिए प्रकाश के विभिन्न तरंग दैर्घ्यों का उपयोग करते हुए फाइबर की लंबाई तक कई संवेदकों को मल्टीप्लेक्स किया जा सकता है या फिर प्रकाश के प्रत्येक संवेदकों के माध्यम से फाइबर के निकट से गुजरने के लिए समय की देरी को समझ कर फाइबर का प्रयोग किया जाता है। समय की देरी को ऑप्टिकल टाइम-डोमेन रिफ्लेक्टोमीटर जैसे एक साधन का उपयोग करते हुए निर्धारित किया जा सकता है। 

चूंकि ऑप्टिक फाइबर ही वर्तमान और भविष्य है, इसलिए इस परिवर्तन को जितनी जल्दी हो सके अपनाने की आवश्यकता है। भले ही भारत लोगों के लिए तेज़ इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराने में संघर्ष कर रहा है, आईएसपी ने निश्चित रूप से उच्च गति इंटरनेट हाईवे नेटवर्क तक पहुँच प्राप्त करने में भारतीयों की मदद की है। टेलीकॉम कंपनियाँ भी डाटा कनेक्टिविटी के लिए ऑप्टिक फाइबर केबलों की शुरुआत करने के लिए जोर दे रही हैं। हालांकि, जब डाटा की गति का वैश्विक औसत 7 एमबीपीएस है, भारत में वर्तमान गति अभी भी काफी धीमी ही है। इसके अलावा, जब भारत सरकार देश को विकसित राष्ट्रों के समान बनाना चाहती है, तो इसे भारत में इंटरनेट को अपनाने में सुधार लाने में मदद करने के लिए सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्था की सफलता की कहानी कुछ हद तक इस पर निर्भर करेगी।

भारत में ऑप्टिकल फाइबर केबल बाजार के लिए है बहुत बड़ा मौका 

आज, चिकित्सा, सैन्य, दूरसंचार, उद्योग, डाटा संग्रहण, नेटवर्किंग और प्रसारण उद्योग सहित विविध प्रकार के उद्योग विभिन्न तरह के अनुप्रयोगों में फाइबर ऑप्टिक तकनीक को लागू करने और उसका उपयोग करने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त, यह कहना वास्तव में प्रासंगिक है कि दूरसंचार उद्योग ऑप्टिकल फाइबर तकनीक का प्रमुख उपयोगकर्ता है क्योंकि यहाँ इसकी मांग सर्वाधिक है। भारत में, यह माँग बढ़ रही है और यह माँग फिक्स्ड ब्रॉडबैंड में वृद्धि, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के पुराने तांबा नेटवर्कों का फाइबर ऑप्टिक केबलों (एफओसी) द्वारा प्रतिस्थापन, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक वैकल्पिक नेटवर्क बनाने, वायरलेस बैकहाल नेटवर्क उन्नयन और 3जी तथा ब्रॉडबैंड वायरलेस ऐक्सेस नेटवर्कों के लिए उच्च गति की आवश्यकता जैसे कारकों से प्रेरित है।

भारत में एक बड़ी संख्या के लोगों के पास वाई-फाई, 3जी जैसी कई प्रौद्योगिकियों को सपोर्ट करने वाले कीमती स्मार्टफोन हैं। विशेषकर उपभोक्ताओं का यह वर्ग ऑन-द-गो उच्च गति वाली डेटा सेवाओं के लिए मांग को बढ़ावा दे रहा है। नतीजतन, भारत सरकार ने देश की बढ़ती डेटा संचरण आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से ओएफसी नेटवर्क को बनाने और मजबूत करने के लिए विभिन्न परियोजनाओं की घोषणा की है। इसके अलावा, केबल टीवी नेटवर्क का डिजिटलीकरण देश में अनिवार्य कर दिया गया है, जो ओएफसी नेटवर्क की मांग को आगे बढ़ा रहा है। वर्तमान में, ओएफसी के प्रमुख उपयोगकर्ताओं में दूरसंचार सेवा प्रदाता, इंटरनेट सेवा प्रदाता, मल्टी सिस्टम ऑपरेटर, केबल टीवी ऑपरेटर, रक्षा एजेंसियाँ और पीएसयू शामिल हैं।

टेक्सी रिसर्च, एक वैश्विक बाजार अनुसंधान और परामर्श कंपनी के अनुसंधान निदेशक, श्री करन चेची ने कहा कि भारत सरकार दूरसंचार अवसंरचना के विस्तार के लिए अपना पूरा योगदान दे रही है। यह उच्च गति वाले डेटा संचरण और इंटरनेट सेवाओं के लिए भारत के ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायतों को एक प्रमुख दूरसंचार नेटवर्क के साथ कनेक्ट करने के लिए राष्ट्रीय ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) जैसी विभिन्न दूरसंचार परियोजनाओं में सरकार की भागीदारी से स्पष्ट है। एनओएफएन परियोजना भारत में अगले पांच वर्षों में ओएफसी अधिष्ठापनों के लिए प्रमुख प्रेरकों में से एकहो सकती है।

भारत में दूरसंचार उद्योग में भारी वृद्धि के कारण ऑप्टिकल फाइबर केबल बाजार में निकट भविष्य में एक बड़ी वृद्धि देखने मिलेगी। यहाँ मोबाइल नेटवर्क क्षेत्र, खासकर किसी सिंगल ऐकाउंट धारक के लिए दूसरे देश से अपने मोबाइल फोन को संचालित करने और इंटरनेट पर सर्फ करने के लिए नए अवसर हैं। टायर 3, 4, 5 और 6 भारतीय शहरों में फाइबर ऑप्टिक लाइनों की मांग है, क्योंकि टीयर 1 शहर वायर्ड और टायर 2 शहर लगभग पूरे हो चुके हैं। इसी तरह, भारत सरकार के 100 स्मार्ट शहरों का निर्माण करने की योजना के तहत फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क स्थापित करने में पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।

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