TRP रेटिंग कैसे तय की जाती है?

TRP रेटिंग कैसे तय की जाती है?

आपने अकसर लोगों को TV देखते हुए देखा होगा या आप खुद भी TV देखते होंगे, बात अड़ें की TV के माध्यम से हम आस-पास हुई घटनाओं के बारे में जान पाते हैं। हर कोई अपने हिसाब से ही TV चैनल देखना पसंद करता है, जैसे किसी को न्यूज़, किसी को मूवी तो किसी को सॉन्ग आदि देखना पसंद होता है तो किसी को कुछ और अगर इन सब से थोड़ा अलग आए तो आपने कभी ना कहबी टीआरपी के बारें में सुना जरूर होगा क्योंकि यह भ टीवी से ही जुड़ा हुआ एक शब्द है।

जैसे आपने कई बार सुना होगा की इस प्रोग्राम की TRP काफी बढ़ गई है, आजकल ये प्रोग्राम चल नही रहा है, इससे चैनल को फर्क पढ़ा है आदि। आखिर TRP क्या होती है, इसको कैसे calculate या चेक करते है।  TV चैनल पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है आदि बातों के बारें मे आज हम आपको बताएँगे।

टारगेट रेटिंग प्वाइंट कुल दर्शकों में से लक्ष्यित दर्शकों के घटक का अनुमान का प्रतिनिधित्व करने वाला खरीदारी का नाप है। जीआरपी की तरह (सकल रेटिंग प्वाइंट का संक्षिप्त रूप) यह लक्ष्यित दर्शकों तक पहुँचने के लिए एक विशिष्ट माध्यम है जो विज्ञापन द्वारा रेटिंग की योग के रूप में मापा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि एक विज्ञापन एक से अधिक बार छपता है, जो कुल दर्शकों तक पहुंचता है, टीआरपी आंकड़ा प्रत्येक जीआरपी की राशि अनुमानित लक्ष्यित दर्शकों का गणना है जो कुल दर्शकों में शामिल हैं।

एक टीवी विज्ञापन अगर 5 बार प्रसारित होता है वह कुल दर्शकों के 50% और लक्ष्यित दर्शाकों में से केवल 60% तक पहुँचता है, तो इसका 250 GRPs (= 5 x 50) होगा – अर्थात् GRP = आवृत्ति x पहुँच – इस मामले में टीआरपी 250 GRPs में से 60% होगा = 150 टीआरपी – यह लक्ष्य रेटिंग पॉइंट है, जो कुल दर्ज़ा के 60% है।

ये दो मेट्रिक्स महत्वपूर्ण घटक हैं जो एक विशेष विज्ञापन का विपणन प्रभावशीलता को निर्धारित करते हैं।

टेलीविशन रेटिंग प्वाइंट्स – टीआरपी एक कसौटी है जो एक चैनल या कार्यक्रम की लोकप्रियता इंगित करती है और यह डाटा विज्ञापनदाताओं के लिए बहुत उपयोगी है। आजकल, INTAM (इंडियन टेलिविशन आडिएंस मेशरमेंट) ही एकमात्र इलेक्ट्रॉनिक रेटिंग एजेन्सी भारत में काम करती है।INTAM टीआरपी की गणना के लिए दो तरीकों का इस्तेमाल करती है। पहली आवृत्ति की निगरानी है, जहाँ ‘पीपल मीटर्स’ को नमूने घरों में स्थापित किये जाते हैं और ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परिवार के सदस्यों द्वारा देखा जाने वाला चैनल के बारे में डाटा लगातार रिकॉर्ड करते हैं। ‘पीपल मीटर’ एक कीमती उपकरण है, जो विदेशों से आयात किया जाता है। यह चैनल की आवृत्तियों को पढ़ता है, जो बाद में, चैनल के नामों में डीकोड किया जाता है और यह एजेंसी राष्ट्रीय डाटा तैयार करता है जो इन नमूने घरों के रीडिंग पर आधारित है। लेकिन इस तकनीक में एक दोष है, क्योंकि केबल आपरेटरों अक्सर घरों में संकेत भेजने से पहले विभिन्न चैनलों की आवृत्तियों को बदलते रहते हैं। एक चैनल को अगर एक निश्चित आवृति के अनुसार पढ़ा गया तो यह गुमराह कर सकती है यदि पूरी भारत में एक ही डाउन लिंकिंग आवृति क्यों न हो.

दूसरी तकनीक अधिक विश्वसनीय है और भारत में अपेक्षाकृत नई है। तस्वीर मिलान तकनीक में पीपल मीटर लगातार उस तस्वीर के छोटे हिस्सों को रिकार्ड करता जाता है जिसे एक निश्चित टेलीविशन में देखा जा रहा है। इसके साथ-साथ यह एजेन्सी सभी चैनलों के डाटा को भी छोटे तस्वीर के अंश के आकार में रिकार्ड करती है। नमूने घरों से जो डाटा एकत्र किया गया है उसे बाद में मुख्य डाटा बैंक से मिलान करते हैं ताकि चैनल के नाम की व्याख्या कर सकें. और इस तरह राष्ट्रीय दर्ज़ा का उत्पादन होता है।

इसके द्वारा अनुमान लगाया जाता है की एक न्यूज़ चैनल या किसी प्रोग्राम की कितनी प्रसिद्धि है और इसे कितने लोग देखते हैं। इससे लोगों की पसंद का पता चलता है। भारत में इंडियन टेलीविज़न ऑडियंस मेज़रमेंट नामक एक एजेंसी है जो की टीआरपी का अनुमान लगाने का काम करती है| यह एजेंसी विभिन्न फ्रीक्वेंसी की जांच करके यह पता करते हैं की कौनसा चैनल किस समय पर ज्यादा देखा गया है | फिर ये एजेंसी इन कुछ हज़ार फ्रेक्वेंसीस का विवरण करके पूरे देश के प्रसिद्द धारावाहिकों का अनुमान लगाती है। जिस धारावाहिक की जितनी ज्यादा टी आर पी होती है उस चैनल को उतने ही ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट मिलते है | किसी चैनल की इनकम भी उसकी टी आर पी पर निर्भर करती है |टीआरपी को मापने के लिए कुछ निर्धारित जगहों पर ‘पीपल मीटर’ लगाया जाता है जो एक फ्रीक्वेंसी के ज़रिये ये पता लगाता है कि कहाँ, कौनसा सीरियल देखा जा रहा है और कितनी बार देखा जा रहा है। इस मीटर से टीवी से जुड़ी हर मिनट की जानकारी मॉनिटरिंग टीम के ज़रिये इंडियन टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट को भेजी जाती है। इस जानकारी के बाद ही मॉनिटरिंग टीम ये तय करती है कि किस चैनल और शो की टेलीविजन रेटिंग पॉइंट (TRP) सबसे ज़्यादा है।टेलीविशन रेटिंग प्वाइंट्स – टीआरपी एक कसौटी है जो एक चैनल या कार्यक्रम की लोकप्रियता इंगित करती है और यह डाटा विज्ञापनदाताओं के लिए बहुत उपयोगी है।

आजकल, INTAM (इंडियन टेलिविशन आडिएंस मेशरमेंट) ही एकमात्र इलेक्ट्रॉनिक रेटिंग एजेन्सी भारत में काम करती है।INTAM टीआरपी की गणना के लिए दो तरीकों का इस्तेमाल करती है। पहली आवृत्ति की निगरानी है, जहाँ ‘पीपल मीटर्स’ को नमूने घरों में स्थापित किये जाते हैं और ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परिवार के सदस्यों द्वारा देखा जाने वाला चैनल के बारे में डाटा लगातार रिकॉर्ड करते हैं। ‘पीपल मीटर’ एक कीमती उपकरण है, जो विदेशों से आयात किया जाता है। यह चैनल की आवृत्तियों को पढ़ता है, जो बाद में, चैनल के नामों में डीकोड किया जाता है और यह एजेंसी राष्ट्रीय डाटा तैयार करता है जो इन नमूने घरों के रीडिंग पर आधारित है।

लेकिन इस तकनीक में एक दोष है, क्योंकि केबल आपरेटरों अक्सर घरों में संकेत भेजने से पहले विभिन्न चैनलों की आवृत्तियों को बदलते रहते हैं। एक चैनल को अगर एक निश्चित आवृति के अनुसार पढ़ा गया तो यह गुमराह कर सकती है यदि पूरी भारत में एक ही डाउन लिंकिंग आवृति क्यों न हो.दूसरी तकनीक अधिक विश्वसनीय है और भारत में अपेक्षाकृत नई है। तस्वीर मिलान तकनीक में पीपल मीटर लगातार उस तस्वीर के छोटे हिस्सों को रिकार्ड करता जाता है जिसे एक निश्चित टेलीविशन में देखा जा रहा है। इसके साथ-साथ यह एजेन्सी सभी चैनलों के डाटा को भी छोटे तस्वीर के अंश के आकार में रिकार्ड करती है। नमूने घरों से जो डाटा एकत्र किया गया है उसे बाद में मुख्य डाटा बैंक से मिलान करते हैं ताकि चैनल के नाम की व्याख्या कर सकें. और इस तरह राष्ट्रीय दर्ज़ा का उत्पादन होता है।

TRP को इतना ज़्यादा महत्व इसलिए दिया जाता है क्योंकि इसका सम्बन्ध किसी चैनल की कमाई से होता है। जिस चैनल को दर्शक कम देखा करते हैं उसकी टीआरपी गिर जाती है जिसके कारण उसे एडवरटाईसमेंट कम मिलने लगते हैं और उसकी कमाई पर बुरा असर पड़ता है और जिस चैनल के शो बहुत ज़्यादा बार देखे जाते हैं, उसकी टीआरपी बहुत बढ़ जाती है जिसकी वजह से एडवरटाईसमेंट से चैनल को कमाई भी बहुत अच्छी होती है।

TRP रेट

TRP रेट वह है जिस पर एक TV चैनल के TRP की गणना की जाती है, किसी भी चैनल या प्रोग्राम की TRP उस पर दिखाए जाने वाले प्रोग्राम पर निर्भर करती है. इसे ऐसे समझा जा सकता है कि जब कोई फिल्म स्टार अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए किसी प्रोग्राम में आता है तो उसके कारण उस प्रोग्राम की TRP बढ़ जाती है क्योंकि लोग उस स्टार को ज्यादा देखना पसंद करते हैं। तो अब आप समझ गए होंगे की TRP टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट (Television Rating Point) होता है जिससे किसी भी प्रोग्राम या चैनल की लोकप्रियता और viewers के बारे में पताया लगाया जा सकता है।

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