प्रसार भारती ने किया आईएंडबी मंत्रालय के निर्देशों को खारिज, होगी डीडी फ्रीडिश की नीलामी

प्रसार भारती ने किया आईएंडबी मंत्रालय के निर्देशों को खारिज, होगी डीडी फ्रीडिश की नीलामी

अपनी तरह की पहली घटना में, सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती ने आक्रामक तरीके से अपनी स्वायत्तता का बचाव किया और सूचना और प्रसारण मंत्रालय से कुछ निर्देशों को खारिज करते हुए कहा कि मंत्रालय ने प्रसार भारती अधिनियम की अवमानना करने की कोशिश की है।

प्रसार भारती बोर्ड के अध्यक्ष, श्री ए. सूर्य प्रकाश और सदस्यों ने एक बैठक में प्रसार भारती में कार्यरत सभी अनुबंधित कर्मचारियों की सेवाएँ समाप्त करने के लिए मंत्रालय के निर्देश को गलत ठहराया।

प्रसार भारती के अधिकारियों के अनुसार, दूरदर्शन और आकाशवाणी, दोनों जगहों में एक बड़ी संख्या में कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं और वैकल्पिक रूप से कोई व्यवस्था किए बिना, उन्हें निकाल देने से दोनों संगठनों को काफी नुकसान होगा।

बोर्ड ने डीडी फ्री डिश पर सभी चैनलों की ई-नीलामी को रोकने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर भी आपत्ति जताई। यह निर्देश प्रसार भारती की वित्तीय स्थिति को क्षति पहुँचाएगा और साथ ही निगम को 300 करोड़ रुपए का नुकसान भी होगा।

दूरदर्शन की फ्री डिश सेवा का उद्घाटन साल 2004 में 33 चैनलों के साथ हुआ था। अब इसमें 104 टेलीविजन चैनल और 40 रेडियो चैनल हैं और यह 20 मिलियन घरों तक पहुँचता है।

यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को छोड़कर एक सेट टॉप बॉक्स के माध्यम से पूरे भारत में कवरेज प्रदान करता है, जिसके लिए कोई मासिक सदस्यता शुल्क की आवश्यकता नहीं होती है।

जब डीडी फ्री डिश की शुरुआत की गई थी, तब जनरल एंटरटेनमेंट चैनल स्लॉटों की नीलामी एक साल के लिए 25 लाख रुपए पर की हुई थी। अब वह एक साल में 8.5 करोड़ रुपए कमाते हैं।

मंत्रालय यह भी चाहता है कि सामान्य मनोरंजन चैनलों को यूनियन मंत्रालयों द्वारा चलाए जाने वाले चैनलों से बदल दिया जाए। हालांकि, प्रसार भारती बोर्ड ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह पूरे पैकेज को गैरदिलचस्प बना देगा। दूरदर्शन के दर्शकों की संख्या घट जाएगी जबकि टाटा स्काई और डिश टीवी इसका फायदा उठाएँगे

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