डिजिटल इंडिया की रफ्तार में इंटरनेट की स्पीड बनी बाधक, जानें- विश्व में भारत की स्थिति

डिजिटल इंडिया की रफ्तार में इंटरनेट की स्पीड बनी बाधक, जानें- विश्व में भारत की स्थिति

सरकार देश को डिजिटल बनाने को कृतसंकल्प है। समय की मांग भी यही है। गरीबों को उनका हक इस विधा से बेहतर तरीके से दिया जा सकता है। लेकिन इंटरनेट रफ्तार सरकार की इस मंशा के आड़े आ रही है। मोबाइल फोन में हाई-स्पीड इंटरनेट आज भी दूर की कौड़ी है। इंटरनेट स्पीड टेस्ट करने वाली दिग्गज कंपनी ऊकला के स्पीडटेस्ट इंडेक्स के मुताबिक ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में दुनिया के 130 देशों में भारत 67वें स्थान पर है। मोबाइल डाउनलोड की स्पीड के मामले में भारत 130 देशों में 109वें स्थान पर है।

भारत में बढ़ रही स्पीड

– नवंबर, 2017 में देश की औसत ब्रॉडबैंड स्पीड 18.82 एमबीपीएस थी। फरवरी में यह 20.72 एमबीपीएस हो गई।

– पिछले साल इस सूची में भारत को 76वां स्थान मिला था। इस साल देश ने नौ पायदानों की छलांग लगाई है।

– मोबाइल इंटरनेट स्पीड में कोई इजाफा नहीं हुआ है। पिछले साल भी देश 109वें पायदान पर ही था।

– हालांकि औसत डाउनलोड स्पीड नवंबर के 8.80 एमबीपीएस से बढ़कर फरवरी में 9.01 एमबीपीएस हुई है।

– पिछले वर्ष की रिपोर्ट में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की स्पीड बढ़ने वाले दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देशों में भारत शामिल था।

सर्वाधिक डाटा उपभोक्ता हम

दिसंबर में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने बताया था कि देश में 150 करोड़ गीगाबाइट डाटा का उपभोग किया जाता है। यह डाटा अमेरिका और चीन के संयुक्त डाटा उपभोग से भी ज्यादा है और दुनिया में सर्वाधिक है।

ऐसे होता है स्पीडटेस्ट

स्पीडटेस्ट इंडेक्स में दुनिया के हर कोने से डाटा डाउनलोड करने की स्पीड का अध्ययन किया जाता है। दुनियाभर में ऊकला के 7021 स्पीडटेस्ट सर्वर मौजूद हैं, जिसमें से 439 भारत में हैं।

कम स्पीड की वजह

देश में 4जी इंटरनेट बड़ी तेजी से बढ़ा है, हालांकि कंपनियां अपने वादों के मुताबिक स्पीड देने में नाकाम रही हैं। इसकी वजह है कम क्षमता के नेटवर्क। देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री आर्थिक विषमताओं से जूझ रही है। रिलायंस के जियो नेटवर्क के लांच होने के बाद कई प्रमुख डाटा प्रदाता कंपनियां भारी नुकसान में हैं। इसलिए वे नेटवर्क क्षमता बढ़ाने में निवेश नहीं कर पा रही हैं।

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