अब नेटफ्लिक्स और एमेजॉन वीडियो आने के साथ कैसे ‘भावनाएं आहत’ होने का दौर जाने वाला है ?

अब नेटफ्लिक्स और एमेजॉन वीडियो आने के साथ कैसे ‘भावनाएं आहत’ होने का दौर जाने वाला है ?

दो महत्वपूर्ण बदलाव आने वाले वक्त में सिनेमा, और मोटे-मोटे तौर पर कहें तो एंटरटेनमेंट को घर बैठकर भोगने (कंज्यूम) के तरीके हमेशा के लिए बदलने वाले हैं। इंटरनेट की तेज रफ्तार, और डिजिटल स्पेस में नेटफ्लिक्स तथा एमेजॉन प्राइम वीडियो जैसी दमदार विदेशी सुविधाओं का बिना सेंसरशिप की दखल वाला भारतीयकरण।

डाटा बाजार के समीकरण– जिसके बारे में सिस्को की एक रिपोर्ट कहती है कि 2021 तक हमारे यहां 83 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हो जाएंगे – इतनी तेजी से बदले हैं कि अब टेलीकॉम कंपनियां वर्षों तक ठगने के बाद ‘सचमुच’ की तेज स्पीड देना शुरू कर चुकी हैं। महानगरों में दी जाने वाली सुविधाएं और स्पीड छोटे-मझोले शहर-कस्बों तक पहुंच रही हैं और कुछ वक्त पहले तक उपभोक्ताओं के मोबाइल पर एक जीबी का जो डाटा पैक एक महीने तक चलता था, अब उतना डाटा सिर्फ एक दिन की जरूरत बन गया है।

घरों में तेज रफ्तार ब्रॉडबैंड और स्मार्ट टीवी के विलय ने नेटफ्लिक्स तथा एमेजॉन प्राइम वीडियो जैसी विदेशी सर्विसों को रोजमर्रा की आदत बनाना शुरू कर दिया है। शायद कुछ वक्त बाद सभी को अचंभित करते हुए ‘इंटरनेट टीवी’ का यह डिजिटल बाजार वैसे ही टायर टू और थ्री शहरों में तेज रफ्तार से फैलेगा, जैसे एक वक्त में टाटा स्काय और एयरटेल जैसी प्राइवेट डीटीएच कंपनियों का फैला था।

अभी तक हमारी छतों पर लगीं बड़ी कटोरियों बराबर ये उलटी छतरियां मनोरंजन के नाम पर रिग्रेसिव धारावाहिक और दक्षिण की फिल्मों के हिंदी डब वर्जन ही उच्च क्वालिटी में परोसने को मजबूर रही हैं। वहीं टेलीविजन प्रोग्रामिंग के हाल इतने बेहाल हैं कि किसी भी चैनल पर क्वालिटी कंटेंट लगातार मिलता नहीं और हर चैनल के निम्न स्तरीय कंटेंट में भी अति का दोहराव है। यहां तक कि हिंदी की पुरानी क्लासिक फिल्में दसियों फिल्म चैनल होने के बावजूद न के बराबर दिखाई जाती हैं और विडम्बना देखिए, टाटा स्काय जैसी कंपनियों ने इस बाजार को भी भुनाने के लिए एक नया चैनल खोल लिया है! क्लासिक सिनेमा नाम का यह खास चैनल सिर्फ पुरानी क्लासिक हिंदी फिल्में ही दिखाता है, लेकिन 600-800 रु हर महीने केबल रिचार्ज पर खर्च करने के बाद आपको इसके लिए भी अलग से पैसे देने होते हैं!

नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम वीडियो जैसी विदेशी कंपनियां बेहतर कंटेंट देखने के लिए छटपटाते उपभोक्ताओं के इसी बाजार में गहरी पैठ बनाने की शुरुआत कर चुकी हैं। वह उपभोक्ता जो मोबाइल, लैपटॉप और पचास हजार की स्मार्ट टीवी पर निम्न स्तर का कंटेंट देखकर तंग आ चुका है लेकिन इन विदेशी सुविधाओं पर सिर्फ अमेरिकी फिल्में व टेलीविजन सीरीज नहीं देखना चाहता, बल्कि स्तरीय व एकदम नयी हिंदी फिल्में तथा सीमित अवधि की उम्दा देसी टीवी सीरीज भी उसकी पसंद में शामिल हैं।

वैसे तो हॉटस्टार और ऑल्ट बालाजी जैसे देसी डिजिटल मंच कुछ वक्त से इस बाजार में पैठ बनाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं लेकिन विश्व स्तर पर एमेजॉन प्राइम और नेटफ्लिक्स ने जिस तरह की गुणवत्ता और स्केल अपने नायाब कार्यक्रमों को उपलब्ध कराए हैं, उस स्तर तक पहुंच पाना इन कंपनियों के लिए निकट भविष्य में मुमकिन नहीं लगता। वहीं 2016 में भारत आगमन के बाद नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो ने अपने अगले साल-डेढ़ साल हिंदुस्तानी मिजाज और फिल्मों से जुड़ी राजनीति को समझने में लगाए जरूर, लेकिन अब ऐसे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं जो घर बैठे फिल्में और टीवी सीरियल देखने की हमारी आदतों को हमेशा के लिए बदल देंगे। ठीक अमेरिकियों की तरह।

सबसे महत्वपूर्ण है कि उठाए जा रहे ये नए क्रांतिकारी कदम सेंसरशिप को खारिज कर रहे हैं, और मिलकर एक ऐसा इको-सिस्टम तैयार कर रहे हैं जिसके सफलतापूर्वक स्थापित हो जाने के बाद शायद ही सेंसर बोर्ड का कोई औचित्य बचे।

उदाहरण के लिए एमेजॉन प्राइम वीडियो ने हाल ही में अलंकृता श्रीवास्तव निर्देशित ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को पूर्णत: अनसेंसर्ड रूप में अपने मंच पर रिलीज किया है। सेंसर बोर्ड से तगड़ी लड़ाई के बाद थियेटरों में रिलीज हुई इस फिल्म में तकरीबन दो मिनट के कुछ दृश्य काटे गए थे और कुछ गालियों का मुंह बंद किया गया था। लेकिन प्राइम वीडियो ने सेंसर बोर्ड से प्रमाणित इस ‘थियेटर कट’ की जगह पूर्णत: मौलिक और अनसेंसर्ड फिल्म अपने प्लेटफार्म पर रिलीज की है और हिंदुस्तान में आठ महीने पुरानी इस दमदार कंपनी के लिए भी ऐसा साहसिक कदम उठाना पहली बार ही है। इससे पहले तक प्राइम वीडियो सेंसर बोर्ड प्रमाणित थियेटर वर्जन ही अपने मंच पर रिलीज करता आया है और खुद के निर्मित विदेशी कंटेंट में भी काट-छांट कर खुद को विवादों में पड़ने से बचाता आया है।

लेकिन इस विवादित मगर शानदार फिल्म के साथ खुद को बदलने के अलावा एमेजॉन ने सौरभ पंत, कनन गिल और जाकिर खान जैसे 14 हिंदुस्तानी कॉमेडियनों के साथ भी अनुबंध किया हुआ है, जिसमें खासतौर पर यह रेखांकित है कि उनके किसी भी चुटकुले या व्यंग्य को सेंसर नहीं किया जाएगा। नेटफ्लिक्स ने भी कुछ वक्त बाद वीर दास और अदिति मित्तल के दो कॉमेडी शोज को बिना काट-छांट पेशकर ठीक यही रेखांकित किया और जता दिया कि बात-बात पर आहत होने वाले इस दौर में वे अपने कंटेंट को हताहत नहीं होने देंगे।

एमेजॉन प्राइम वीडियो का खुद का बनाया पहला मौलिक हिंदुस्तानी शो ‘इनसाइडर ऐज’ भी पूरी तरह अनसेंसर्ड है। क्रिकेट और सट्टेबाजी की काली दुनिया को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करने वाली यह सीरीज भले ही उस स्तर की नहीं है जिसके लिए एमेजॉन मशहूर है (‘द मैन इन द हाई कैसल’,‘मोजार्ट इन द जंगल’)लेकिन यह क्रिकेट पर बनी कई नई हिंदी फिल्मों को जरूर शर्मिंदा कर सकती है, और बता सकती है कि क्रिकेट पर फिल्में बनाने का मतलब हरदम इस खेल का गुणगान करना नहीं होता। भविष्य में अगर कभी ऐसा हुआ कि सीबीएफसी को भी काट-छांट करने की जगह सिर्फ सर्टिफिकेशन देने वाली संस्था बनाया गया, तो जिस तरह का कंटेंट हमारे नए फिल्ममेकर बनाएंगे, उसकी एक झलक करण आयुष्मान निर्देशित इस सीरीज में नजर आती है।

दूसरी झलक – जो कि ज्यादा विस्तृत होने वाली है – उसे अनुराग कश्यप लेकर आने वाले हैं। वे सेंसरशिप पर विश्वास नहीं करने वाली नेटफ्लिक्स (इंडिया) के लिए विक्रम चंद्रा के बहुप्रशंसित उपन्यास ‘सेक्रेड गेम्स’ पर आठ एपीसोड की एक देसी सीरीज निर्देशित करने वाले हैं। इसमें विक्रमादित्य मोटवानी उनके सह-निर्देशक होंगे और उपन्यास के महाखलनायक गायतोंडे की भूमिका नवाजुद्दीन सिद्दीकी, पुलिस इंस्पेक्टर सरताज सिंह की नायक वाली भूमिका सैफ अली खान और रॉ एजेंट की भूमिका राधिका आप्टे निभाएंगीं।

क्राइम आधारित उपन्यास ‘सेक्रेड गेम्स’ की ही तरह इसका टीवी संस्करण भी पूरी तरह यथार्थवादी होगा और चूंकि मुंबई माफिया की इस कहानी में हिंसा और गाली-गलौज का परम स्थान है, इसलिए सेंसरशिप का न होना इस बार शायद अनुराग कश्यप को ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से भी आगे ले जाएगा। मार्टिन स्कॉरसेजी जैसी आजादी भी उन्हें आखिरकार मिल पाएगी, और जो लोग मौलिक कंटेंट की बादशाह बन चुकी नेटफ्लिक्स का इतिहास जानते हैं, वे समझ सकते हैं कि हिंदुस्तान के लिए आने वाले वक्त में यह सीरीज गेम-चेंजर कहलाई जाएगी।

इनके अलावा भी नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो कई दूसरे देसी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। प्राइम वीडियो ‘इनसाइडर ऐज’ के बाद फरहान और जोया अख्तर के साथ ‘मेड इन हैवन’ नामक सीरीज बनाने वाला है और अनुराग कश्यप व विक्रमादित्य मोटवानी के साथ ‘स्टारडस्ट’ और ‘विषपुरी’ जैसे प्रोजेक्ट शुरू किए जा चुके हैं। ‘नीरजा’ वाले राम माधवानी तथा ‘गो गोवा गॉन’ वाले राज एंड डीके भी अपनी-अपनी कहानियां कहने की तैयारियां कर रहे हैं और निकट भविष्य में विशाल भारद्वाज, विधु विनोद चोपड़ा और सुजॉय घोष से लेकर अनुष्का शर्मा, आसिफ कपाड़िया और अली अब्बास जफर तक प्राइम वीडियो के लिए कंटेंट डेवलप करने वाले हैं।

जनवरी 2016 से इंडिया में मौजूद नेटफ्लिक्स ने ‘सेक्रेड गेम्स’ के बाद ‘व्हाइट टाइगर’ के लेखक अरविंद अडिगा के क्रिकेट आधारित नए उपन्यास ‘सिलेक्शन डे’ पर सीरीज बनाने का ऐलान किया है और साथ ही ‘क्वांटिको’ की लेखिका मरीशा मुखर्जी के साथ ‘अगेन’ नामक नायिका प्रधान डिटेक्टिव सीरीज की भी घोषणा की है। जाहिर है, इन स्ट्रीमिंग सर्विसों की साहसी नीतियों की वजह से सेंसरशिप इन परियोजनाओं के भी आड़े नहीं आएगी।

कुछ वक्त पहले ‘सेक्रेड गेम्स’ सीरीज की घोषणा के दौरान नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा भी था, ‘हम काफी टाइम से दब-दब कर काम कर रहे हैं। अब जरा खुल के करेंगे।’

तथास्तु! बस कि कुछ नए प्रावधान लाकर या फिर भविष्य में नए सिनेमेटोग्राफर बिल को संसद में पेश करते वक्त मौजूदा सरकार डिजिटल स्पेस की स्वतंत्रता भी वैसे ही न छीन ले, जैसे फीचर फिल्मों की छीनी जा चुकी है।आने वाले वक्त में नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम वीडियो भारतीय दर्शकों को हमारे टीवी चैनलों की ऊब से भी मुक्त कर सकते हैं और सेंसरशिप के दखल से भी ।

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