सूचना-मनोरंजन के मल्टीन प्लै टफॉर्म वि‍कल्प‍: पर गांव अभी भी अछूते

सूचना-मनोरंजन के मल्टीन प्लै टफॉर्म वि‍कल्प‍: पर गांव अभी भी अछूते

डि‍जि‍टल क्रांति‍ ने लोगों की सोच को व्‍यापक रूप से बदला है। खासतौर पर शहरी उपयोगकर्ताओं के पास अब सूचना और मनोरंजन के वि‍भि‍न्‍न वि‍कल्‍प उपलब्‍ध हैं। रेडि‍यो, इंटरनेट, मोबाइल और अब डि‍जि‍टल टीवी के आने से थोड़े से में बहुत कुछ जान लेने की इच्‍छा, अपनी सुवि‍धानुसार देखने की आजादी और मनपंसद प्‍लैटफॉर्म यानी रेडि‍यो, मोबाइल, इंटरनेट या टेलीवि‍जन में से सुवि‍धा के अनुसार कि‍सी भी साधन के जरि‍ए सूचनाओं और मनोरंजन की सेवा प्राप्‍त करना सूचना-संचार के जमाने में कहीं ज्‍यादा आसान हो गया है। यह बात सीआईआई और पीडब्‍लूसी की एक रि‍पोर्ट ‘इंडि‍या-ई एंड एम आउटलुक’ में सामने आई है।

रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ लोगों की आमदनी में बढ़ोतरी से लोग मल्‍टीप्‍लैटफॉर्म पर सूचनाएं प्राप्‍त करने और साझा करने के लि‍ए ज्‍यादा खर्च करने को भी तैयार हैं। इससे उन्‍हें कंटेंट के साथ अवांछि‍त वि‍ज्ञापनों से भी छुटकारा मि‍ल जाता है। मि‍साल के लि‍ए, अगर कोई क्रि‍केट मैच ऑनलाइन इंटरनेट पर देखना चाहि‍ए तो उसे वि‍ज्ञापन नहीं मि‍लेंगे। मोबाइल पर स्‍कोर अपडेट में भी विज्ञापनों से छुटकारा मि‍ल जाता है।

इसी के साथ डि‍जि‍टल क्रांति‍ ने ऑनलाइन प्‍लैटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट पेश करने शुरू कि‍ए हैं, जो लोगों की प्रति‍क्रि‍या को भी सोशल मीडि‍या पर साझा करते हैं। जैसे कंटेंट्स के साथ ट्वि‍टर और फेसबुक का लिंक लोगों को अपनी बात कहने के लि‍ए प्रेरि‍त करता है।

‘इंडि‍या-ई एंड एम आउटलुक’ में मुख्‍य रूप से इन बिंदुओं पर गौर कि‍या गया है –

  1. कौन से तबके में कि‍स तरह की सामग्री यानी कंटेंट की मांग है?
  2. उपभोक्‍ता सामग्री को प्राप्‍त करने और अपने वि‍चारों को साझा करने के लि‍ए कि‍स तरह के प्‍लैटफॉर्म को पसंद करते हैं।
  3. मल्‍टीप्‍लैटफॉर्म कंटेंट प्राप्‍त करने और इसे साझा करने की उपभोक्‍ताओं की क्षमता कि‍तनी है?
  4. मल्‍टीप्‍लैटफॉर्म वि‍कल्‍पों तक उपभोक्‍ताओं की पहुंच और प्रभाव का कि‍स तरह आंकलन कि‍या जा सकता है?

‘इंडि‍या-ई एंड एम आउटलुक’ रि‍पोर्ट के अनुसार भारत में सूचनाओं और मनोरंजन का बाजार 965 अरब रुपए (2012 में) का है। इसमें प्रिंट का 212 अरब, टेलीवि‍जन का 383 अरब और इंटरनेट का 171 अरब रुपए का हि‍स्‍सा है। साफ है कि‍ इंटरनेट यानी वेब का बाजार बड़ी तेजी से प्रिंट को छूने जा रहा है। अनुमान है कि‍ 18-20 प्रति‍शत साला वृद्धि‍ दर के साथ 2017 तक सूचनाओं और मनोरंजन का यह पूरा बाजार 2245 अरब रुपए का हो जाएगा। हालांकि‍, टेलीवि‍जन के बाजार पर इंटरनेट की बढ़ती लोकप्रि‍यता का खास असर नहीं पड़ेगा, लेकि‍न प्रिंट मीडि‍या इस बदलाव में सबसे ज्‍यादा प्रभावि‍त होगा, क्‍योंकि‍ पूरे बाजार में उसकी हि‍स्‍सेदारी मौजूदा 22 फीसदी से घटकर 15 प्रति‍शत रह जाएगी। टेलीवि‍जन के इस कदर वि‍कास का एक और कारण डीटीएच भी है। ‘इंडि‍या-ई एंड एम आउटलुक’ का अनुमान है कि‍ 2017 तक डीटीएच प्‍लैटफॉर्म नौ करोड़ घरों तक पहुंच जाएगा। खासकर उन इलाकों में, जहां डि‍जि‍टल केबल टीवी की पहुंच नहीं है, वहां इसका प्रसार ज्‍यादा होगा।

डीटीएच सेवाएं देने वाली कंपनि‍यों द्वारा कार्यक्रम रि‍कार्ड करने की सुवि‍धा और कई वेबसाइटों की लाइव टीवी स्‍ट्रीमिंग ने सामग्री को मल्‍टीप्‍लैटफॉर्म पर सुवि‍धाजनक तरीके से प्राप्‍त करने के वि‍कल्‍पों को असान कर दि‍या है।

रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ 2012 तक इंटरनेट का उपयोग करने वाले 10 करोड़ से ज्‍यादा लोगों में ज्‍यादातर शहरों के हैं, जबकि‍ केवल 45 प्रति‍शत लोग ही गांवों में इंटरनेट सेवाओं का उपयोग कर पा रहे हैं। इससे साफ है शहरों और गांवों में इंटरनेट के उपयोग को लेकर एक बड़ा फासला है। ढांचागत व्‍यवस्‍थाओं की कमी और ब्रॉडबैंड इंटरनेट की अधि‍क लागत के चलते मध्‍यम अवधि‍ में वायरलाइन इंटरनेट की वृद्धि‍ दर उम्‍मीद से कम ही रहेगी। लेकि‍न अगर केंद्र सरकार की नई टेलीकॉम नीति‍ 2012 के तहत अगर गांवों को इंटरनेट से जोड़ने की योजना पर ठीक से काम हो गया तो 2017 तक 17 करोड़ उपभोक्‍ताओं तक इंटरनेट की पहुंच हो सकेगी, जो एक अच्‍छा संकेत है।

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