DAS AND TARIFF ORDER SCENARIO CATV 2018

DAS AND TARIFF ORDER SCENARIO CATV 2018

DAS AND TARIFF ORDER SCENARIO CATV 2018

Lt Col VC Khare (Retd) – Cable TV Industry Observer

डीएएस और टैरिफ ऑर्डर सीनारिओ सीएटीवी 2018

Lt Col VC Khare (Retd) – केबल टीवी उद्योग पर्यवेक्षक

2003 के CAS अधिनियम में PAY TV की परिभाषा थी वोह कंटेंट जिसको देखने के लिए सब्सक्राइबर द्वारा ब्रॉडकास्टर को भुगतान करना होगा (भुगतान की पद्धति थी केबल ऑपरेटर द्वारा वसूली…उसको MSO, जिसको CAS service provider भी बताया गया था, के पास जमा करवा देना ता की MSO ब्रॉडकास्टर को भुगतान कर सके और subscription के विभाजन की दरें TRAI ने निर्धारित कर दी थीं)…..ब्रॉडकास्टर ऐसे कंटेंट के दरों की अधिघोष्णा करेंगे… लेकिन ब्रॉडकास्टर्स ने निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं किया….तब उस समय के advisor B&CS ने  2004 में TRAI की ओर से ऐसे कंटेंट की दर Rs 5/- per program per month per subscriber निर्धारित कर दी थी.

इस विषय में यह भी स्मरणीय होगा की आज तक ना MIB और ना ही TRAI ब्रॉडकास्टर्स से PAY TV कंटेंट की दरें निश्चित करने के मूल्य निर्धारण तंत्र (pricing mechanism)/ सिध्धांत या प्रणाली ब्रॉडकास्टरों से प्राप्त कर सके हैं…. यह भी विचारणीय बात है की आज के अत्याधुनिक प्रबंधन(modern management) वातावरण में यह उचित माना ही नहीं जा सकता की सर्विस सेक्टर में  मूल्यांकन पद्धति (costing basis) की समीक्षा बगैर घोषित मूल्यों को उचित मान लिया जाये…. लेकिन ब्रॉडकास्टर्स ऐसा ही करते रहे हैं ब्रॉडकास्टर शुरू से ही a-la-carte के पक्ष में नहीं थे इस लिए उन्होंने इसके रेट  इतने अत्याधिक रख्खे ताकि यदि HSP इनको रेट कार्ड में लिख कर सब्सक्राइबर  को दिखा भी दे तो वोह इस का चयन कर  ही न सके और  ब्रॉडकास्टरों ने स्वयं ही boquet में कंटेंट डाल कर उसके रेट a-la-carte से बहुत कम कर दिए.

टैरिफ आर्डर के अनुसार broadcaster को PAY Content का MRP सार्वजनिक करना है जो  टैरिफ आर्डर की स्थापना के कारण अब कम हो जायेगा और boquet में उस PAY content का रेट प्रकाशित MRP के रेट के 85% से कम नहीं हो सकता…..इस लिये boquet के रेट में वृध्धि होनी निश्चित होगी और सब प्रतिबन्ध Broadcaster/HSP के ICO में दर्ज और लागू होंगे.. अगर SMS से बिलिंग केबल ओपेराटरों  द्वारा नहीं होने देनी है तो टैरिफ आर्डर का कोई अस्तित्व ही नहीं रह जाएगा.

TRAI के  DAS सम्बंधित नियमनों में पहले PAY TV की परिभाषा थी वोह कंटेंट जिसके लिए हेडएंड सर्विस प्रोवाइडर(HSP i.e. Headend Service Provider) को ब्रॉडकास्टर को भुगतान करना  होता है , ICO में लिखे हुए दरों पर, और ब्रॉडकास्टर को तमाम सशुल्क प्रोग्रामों का a-la-carte रेट HSP के साथ किये ICO में सम्मिलित करना है और वेबसाइट पर भी प्रकाशित करना अनिवार्य है.

अब सह्शुल्क कंटेंट, यानि PAY टीवी, वोह कंटेंट है जिसकी निर्धारित राशी ब्रॉडकास्टर द्वारा a-la-carte दरों में उपलब्ध करवाए जाने की घोषणा हो जाने पर सब्सक्राइबर द्वारा देय है (किसको ?… इस पर परिभाषा मौन है)

CAS और DAS दोनों के नियमनों में पुंज ( bouquet) निर्माण का प्रावधान है ही नहीं. लेकिन TRAI ने अपने रेगुलेशन में इसका प्रावधान कर दिया है ( यह लिख कर की पे ब्रोडकास्टर के लिए PAY TV कंटेंट को boquet बना कर उपलब्ध करवाना बिलकुल प्राकृतिक/स्वाभाविक ही माना जायेगा बशर्ते boquet में उस कंटेंट का रेट उसके a-la-carte रेट के 85% अनुपात से कम न हो और शून्य भी ना हो )

और न इसी तरह ही HSP द्वारा केबल ऑपरेटर को bill करने का भी  कोई प्रावधान है.

बिलिंग होनी चहिये HSP के SMS से सीधे subscriber के नाम पर headend में स्थापित SMS द्वारा. और अनिवार्य है बिल विस्तृत और ब्योरेवार(itemized) हो…. विवरण हो (i) HSP की पहचान (ii) सब्सक्राइबर की ID (iii) केबल ऑपरेटर की ID (iv) STB का ब्रांड नाम और मॉडल और Viewing कार्ड के serial No (v) बुनियादी (basic) नेटवर्क कैपेसिटी चार्जेज (Rs 130/- 100 प्रोग्रामों के लिये) (vi) अतरिक्त नेटवर्क कैपेसिटी चार्जेज (Rs 20/- प्रति 25 अतिरिक्त प्रोग्रामों के लिये) (vii) सःशुल्क टीवी (PAY TV) a-la-carte (viii) सःशुल्क टीवी बुके (boquet) (viii) STB आपूर्ति भुगतानतो, यदि लागू हो तो (ix) कोई और चार्ज यदि लागू हो तो (x) कुल चार्ज (xi) CGST (xii) SGST (xiii) कुल देय (total payable)

यहाँ पर एक और बात ध्यान देने की है… जब यह सारी नीतियाँ MIB और TRAI के दफ्तरों में बनायी जाती हैं तो यह मान कर काम किया जाता है की जो प्रकाशित कर दिया जाएगा उसको MSO/HSP यथार्थ में कार्यान्वित करवा देंगे… इस बात की अनदेखी कर दी गयी की असली सर्विस तो केबल ऑपरेटर्स प्रदान करवाते हैं जिनका न तो MIB और न ही TRAI के साथ कोई पेशेवर वार्तालाप/संपर्क होता है…. DAS के कार्यवान्यामन (implementation) में भी मान लिया गया की DAS की सारी जानकारी केबल ऑपरेटर सब्सक्राइबर को प्रदान करवाएगा और DAS की  बारीकियों का अनुपालन भी केबल ऑपरेटर करवा देगा…. इन गोष्ठीयों में सम्बंधित लोगों ने DAS कार्यवान्यामन का आंकलन केवल STBs के HSP के भंडार से निकले हुई गिनतियों/संख्याओं के आधार पर कर लिया….. यथार्थ में क्या हुआ ? सब्सक्राइबर ने न तो कोई रेट कार्ड देखा, न कोई SAF भरा, न उसका ID प्रजनन हुआ, न उसका ब्यौरा अनिवार्य किये गये SMS में हुआ, न कोई itemized बिल बन सका…. लेकिन  MIB ने सारे देश में DAS  की सफल कार्यवान्यामन की उद्घोषणा कर डाली MRP की अनिवार्य उद्घोषणा के प्रावधान का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि  सब्सक्राइबर को ब्रॉडकास्टर द्वारा घोषित रेट की जानकारी दी ही नहीं गयी है……न ही HSP ने सब्सक्राइबर के लिए रेट कार्ड बनाया …. और केबल ऑपरेटर को सब्सक्राइबर के साथ इस विषय में किसी वार्तालाप  में कोई रूचि थी ही नहीं… उन्होंने सिर्फ डिब्बा लगाने को ही DAS का कार्यवान्यामन मान लिया केबल ऑपरेटर्स ने DAS की स्थापना होने  ही नहीं  दी…. उनके कार्यवान्वन क्षेत्र (area of implementation) में DAS का मतलब था STB को सब्सक्राइबर से पैसे ले कर लगा देना… पूरे मूल्य भुगतान लेने के बाद भी बिना धारणअधिकार (lien) सब्सक्राइबर को स्थानांतरित किये….मतलब STB का स्वामित्व सब्सक्राइबर को दिए बगैर…. जिसमें HSP द्वारा प्रसारित सारे प्रोग्राम दिखाई दें… और पहले की तरह ही fixed monthly subscription पर बिना बिल और रसीद के  सेवाएं चलती रहें. इस प्रणाली में औसत 260 से 290 रुपये प्रति माह का चलन है ऐसी दयनीय परिस्तिथि में ही  task force ने शायद यह निश्चय लिया की HSP केबल ऑपरेटर को प्रति STB के आधार पर बिल करे. यह रेट आज के सन्दर्भ में 75/- से 90/- है और केबल ऑपरेटर कहते हैं हम तो ऐसे ही ( fixed monthly subscription per subscriber without bill and receipt) चलाएंगे.

तो फिर बिज़नस मॉडल यथार्थ में  यह है  कि केबल ऑपरेटर subscriber से एक  monthly fixed amount लेता है और उसका 30% HSP को अदा करता है… मतलब महीने के लिए वसूले किये गयी राशी का 70 % केबल ऑपरेटर अपने पास रखता है और 30% HSP को  दे देता है….सब्सक्राइबर से वसूली गयी मासिक राशी का वितरण  अनुपात केबल ऑपरेटर 70% ; HSP 30%….. यह ही वास्तविक केबल टीवी का बिज़नस मॉडल चलन में है प्रारंभिक  DAS नियमन के अनुसार itemized billing तो कभी भी हुई ही नहीं फिर MIB को बतलाया गया की broadcaster अलग अलग HSPs से अलग अलग रेट लेते हैं और कैरिज फी में adjustment होता है ….तो फिर TRAI ने टैरिफ आर्डर निकाला की PAY TV का MRP रेट वोह है जो सब्सक्राइबर द्वारा देय है और bouquet में प्रोग्राम का रेट  a-la-carte MRP से 85% कम नहीं हो सकता. इस से broadcaster को कष्ट हो गया क्यों की उनके द्वारा निर्धारित  a-la-carte ही अनुचित थे इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटआया.

कैरिज फ़ी के विषय में अचम्भे की बात  है Digital CATV प्रणाली के विषय में आधारभूत अज्ञान(ignorance) की…. इस प्रणाली में या तो सारे प्रोग्राम एक सामान clarity के साथ दिखेंगे या कुछ भी नहीं दिखेगा….. इस कैरिज फी का प्रचालन हुआ था एनालॉग पध्धति के उपयोग में….. केबल नेटवर्क्स में सही अभिकल्प (design) के अज्ञान के कारण…..एम्पलीफायर की ग़लत दूरियों पर लगाने के कारण ऊपर की चैनल्स में प्रसारित प्रोग्राम स्पष्ट नहीं दिखते थे…..इस लिए सारे 106 चैनल बराबरी से स्पष्ट नहीं दिखते थे….ब्रॉडकास्टर्स की काफ़ी कमाई विज्ञापनों से होती है ….इसलिये ब्रॉडकास्टर मांग करते थे कि उनके प्रोग्राम  Headend से (PMT- program mapping table) में साफ़ दिखलाई देने वाले चैनलों की श्रेणी में प्रसारित किये जायें…..और HSP इस उपकार के लिये आरक्षण शुल्क लेते थे जिसका नाम था कैरिज फी…. DAS में इस कुप्रथा के लिए कोई भी स्थान है ही नहीं…. यह सिर्फ़ ब्रॉडकास्टर और HSP के बीच वस्तु विनिमय (barter) प्रणाली है जिसका लाभ विशेषतः HSP को होता है….. इस कुप्रथा को भी TRAI ने टैरिफ आर्डर के माध्यम से मान्यता प्रदान कर दी है प्रश्न उठता है की केबल ऑपरेटर क्या कहते हैं ? क्या टैरिफ आर्डर को रद कर दिया जाये ? या TRAI रेट  उनके अनुसार निर्धारित करे?  itemized बिलिंग के स्थान पर monthly fixed subscription को मान्यता दे ? addressability को निरस्त कर दे?… STB को मात्र  D2A कनवर्टर बना कर छोड दे?

इस में कहीं भी विस्मय है ही नहीं

टैरिफ आर्डर के विवाद के विषय में कुछ और अहम् प्रश्न भी उठते हैं ? यह विशेषतः केबल ऑपरेटर्स के समझने और सोचने के लिये हैं :-

(i) क्या हर केबल ऑपरेटर ने टैरिफ आर्डर को विस्तार से पढ़ा और समझा है ?

(ii). क्या हर केबल ऑपरेटर को ‘प्रोग्राम’ और ‘चैनल’ शब्दों में अंतर ज्ञात है ? (चैनल एक 7-8 MHz चौड़ी रेडियो फ्रीक्वेंसी की अदृश्य पट्टी होती है जिसकी तुलना रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में एक लिफाफे से की जा सकती है. इसमें एनालॉग पद्धति में केवल एक ही प्रोग्राम, जैसे STAR PLUS या ZEE NEWS या AAJ TAK, को  चिठ्ठी की तरह लिफ़ाफे में बंद कर के इलेक्ट्रोनिक विधि का प्रयोग करते हुए तार या बेतार माध्यम से एक स्थान, जैसे HEADEND से संयुक्त फाइबर कोअक्सियल केबल के मिश्रित योग द्वारा सब्सक्राइबर तक पहुंचा दिया जाता है और उस छोर पर लिफ़ाफे रुपी कैरियर को खोल कर उसमें से प्रोग्राम को निकल कर टीवी स्क्रीन पर दर्शाया जाता है….. कैरिएर (लिफाफे) का प्रारूप अपरिवर्तनीय रहता है… कैरिएर की पहचान चैनल के नामांकन ….चैनल 2, 3, 4……96 ….102…106 इत्यादि से होती है, जिसमें 47 से 300 MHz तक की फ्रीक्वेंसी में प्रति चैनल की चौड़ाई 7 MHz होती है और 301 से 862 MHz तक की फ्रीक्वेंसी में प्रति चैनल की चौड़ाई 8 MHz होती है… इस तरह 47 से 862 MHz तक के रेंज में 106 RF चैनल संभव होते हैं….. एनालॉग में एक चैनल यानी कैरियर रुपी लिफ़ाफे में एक ही प्रोग्राम डाला किया जाता है जब की डिजिटल पध्धति में एक चैनल, यानि एक लिफाफे में 10 से 24 प्रोग्राम पैक कर के संचारित किये जा हैं…. इस लिए चैनल और प्रोग्राम एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हैं …. इस प्रकार  47-862 MHz के रेंज में एनालॉग में 106 चैनलों में केवल 106 प्रोग्राम ही प्रसारित होते थे… लेकिन डिजिटल प्रणाली में यदि हर चैनल में 10-24 प्रोग्राम संचारित हों तो केबल नेटवर्क की प्रोग्राम प्रसारण क्षमता बढ़ कर 1060 से 2544 प्रोग्राम की हो जाती है…. इसलिए यह समझना आवश्यक है की चैनल और प्रोग्राम का आशय अलग अलग होता है)

(iii). क्या केबल ऑपरेटर NETWORK CAPACITY CHARGES(NCC) समझते हैं ? ( 47-862 MHz में केवल 106 RF चैनल होते हैं. इसके अंतर्गत Rs 130/- में 100 प्रोग्राम की दर्शिता अनिवार्य है और इस से अधिक दर्शिता के लिये प्रति 25 प्रोग्राम के पुंज पर Rs 20/- प्रति 25 प्रोग्राम समूह पर चार्ज करना है. इस हिसाब से, उदाहरणतः यदि STB पर 400 प्रोग्राम उपलब्ध करवाए गये हैं तो चार्ज बनता है 130 पहले 100 प्रोग्राम के लिये फिर शेष 300 प्रोग्राम के 12 समूहों के लिये 240 रुपये… यानी NCC के लिये 130+240=370. इनका सह्शुल्क प्रोग्रामों से कोई सम्बन्ध नहीं है. वोह चार्ज अलग होना है यदि itemized billing की जाये)

(iv) क्या हर subscriber की बिलिंग ID निर्मित की गयी है ?

(v) क्या हर केबल ऑपरेटर ने ICO साइन किया है ? यदि हाँ,  तो उसमें NCC  और PAY TV चार्ज की भागीदारी का अनुपात क्या है? यदि इस पर कोई सहमती नहीं बनी है तो क्या TRAI के सुझाये अनुपात मान्य हैं? यदि हाँ तो ICO क्यों नहीं साइन हो रहा है?

(vi). सब्सक्राइबर के लिए itemized बिलिंग लागू करने में केबल ऑपरेटर’स को क्या आपत्ति है और वोह क्यों इसका पालन नहीं करना चाहते हैं ? क्या इस विषय पर HSP से केबल ऑपरेटर के letter head पर बिल छापने पर कोई विरोधाभास है? यदि हाँ तो वोह क्या है ?

(vii) टैरिफ आर्डर के पालन न करने में केबल ऑपरेटर्स की प्रमुख आपत्तियां क्या हैं?

(viii) टैरिफ आर्डर नियमन क्या है ? बिज़नेस की वास्तविक स्तिथि क्या है? दोनों में क्या अंतर है? याचिका के माध्यम से प्रार्थी न्यायपालिका से क्या आशा करते हैं ?

(ix)क्या DAS कानून अस्थाप्नीय है ? यदि हाँ तो इसके लिये ज़िम्मेदार कौन है?

TRAI ने नियमन के लिये Broadcaster/MSO के  B2B ICO का प्रारूप तो औपचारिक कर दिया और लगभग उसका अनुपालन भी हो गया… नहीं तो IRD issue ही नहीं होता.

MSO को Rate Card, SAF, Itemized Bill, MoP (Manual of Practice) और केबल ऑपरेटर के साथ sign करने के ICO का प्रारूप तैयार करने थे जो उन्होंने नहीं किये…. मुंबई उच्च न्यायलय के आदेश के बाद ही TRAI ने आदर्श ICO का प्रारूप बनाया. जोर था ICO स्थापित करने पर न कि आदर्श प्रारूप पर….. ICO के लिए आवश्यक विवरण थे नेटवर्क क्षेत्र वर्णन, हस्ताक्षर के समय उपभोक्ताओं की संख्या, नेटवर्क गुणवक्ता के परिपालन का विवरण, बिलिंग की प्रक्रिया और उपभोक्ता सहायता व्यवस्था की स्थापना और उसकी जानकारी दर्शक को  MoP और STB के साथ उपलब्ध करवानी और बिलिंग में वर्णित राशी की साझेदारी के अनुपात के विवरण का बखान. प्रावधान यह भी किया गया कि (1) यदि MSO ऐसे ICO की रचना ना कर सके तो एक सुझावित प्रारूप की रचना भी कर दी गयी (2) इसी प्रकार यदि billed राशी की साझेदारी पर सहमती न बने तो TRAI ने एक अनुपात का सुझाव भी दे दिया. इस अनुपात के पालन की कोई बंदिश नहीं है, आवश्यक यह है कि जिस भी अनुपात  पर सहमती बने वोह ICO में अंकित होना चाहिए.

Broadcaster शुरू से ही a-la-carte रेट का विरोध करते रहे और bouquet पर जोर देते रहे जब कि Cable Act में ब्रॉडकास्टर द्वारा Bouquet बनाने का विकल्प था ही नहीं, DAS की विचार धारा में  MSO को रेट कार्ड में PAY और FTA दोनों के a-la-carte रेट लिख कर subscriber को प्रस्तुत करने थे और bouquet का निर्माण इच्छानुसार सब्सक्राइबर को करना था.

PAY Broadcasters ने इसी लिए a-la-carte में बहुत ही अनुचित मात्रा में बढ़ा दिया इसलिये कि यदि MSO रेट कार्ड बना भी दे  तो subscriber उसका चयन ही न कर सके…. और फिर उन्होंने MSO के लिये उन्ही प्रोग्रामों को MSO के लिये कम रेट लगा कर bouquet बना कर IRDs को activate कर दिया…. यही नहीं, हर MSO के लिए रेट अलग अलग करने की अनियमिता को भी जन्म दे दिया.

MRP टैरिफ नियमन इस कुप्रथा पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ही किया गया है कि ब्राडकास्टर MRP रेट प्रकाशित करेंगे ताकि सारे MSOs के लिए रेट एक सामान हों किसी भी PAY program का bouquet में रेट उसी प्रोग्राम के a-la-carte रेट के 85% से कम नहीं हो सकता. इस लिए अब ऐसे Broadcasters को  प्रकाशित a-la-carte रेट को कम करना ही पड़ेगा. Supreme Court में उनकी याचिका इस  बंदिश को हटवाने हेतु है आज की वास्तविक स्तिथी में, जैसे केबल ऑपरेटर business चला रहे हैं MRP और टैरिफ आर्डर में इनकी रचना और विवरण में कोई भी विदित सामंजस्य तो है ही नहीं DAS एक्ट के अनुसार सब्सक्राइबर को headend service provider/MSO  द्वारा SAF(B2C एग्रीमेंट)के माध्यम से Headend के SMS में ID द्वारा रजिस्टर होना चाहिये और इसी तरह से headend service provider/MSO  और केबल ऑपरेटर के बीच ICO(B2B एग्रीमेंट) निर्मित हो कर केबल ऑपरेटर की ID द्वारा SMS की बिलिंग पध्धति में सम्मिलित होना था…. मतलब सब्सक्राइबर के लिए रेट का निर्णय रेट कार्ड द्वारा MSO ने करना था…. सब्सक्राइबर को रेट कार्ड के अनुसार प्रोग्राम का चयन कर के SMS में अंकित करवाना था ताकि itemized bill बनाया जा सके और उसमे दिखाए सब्सक्राइबर द्वारा देय राशी का Headend में जमा करवा देने के बाद केबल ऑपरेटर के साझेदारी(ICO में इंगित) अनुपात के अनुसार राशी का आवंटन/भुगतान केबल ऑपरेटर के खाते में कंप्यूटर द्वारा किया जाए.

लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है !

वर्तमान subscription प्रवाह क्या है ? केबल टीवी दर्शक से 260/- से 290/- प्रति दर्शक प्रति माह तक की   केबल ऑपरेटर द्वारा वसूली बिना ब्योरेवार (itemized) बिल की प्रस्तुति और रसीद के, जिसमें सारे प्रोग्राम दिखलाई देते हैं (subscriber को चयन करने के किसी भी अवसर के बिना) की जाती है . इस राशी में से 75/- से 95/- तक प्रति STB प्रति माह के आधार पर MSO को भुगतान कर दिया जाता है. SAF भरवाया नहीं गया और केबल ऑपरेटर ने भी ICO नहीं sign किया हुआ है. इस लिए DAS तो स्थापित ही नहीं हुआ

समझ में नहीं आता कि तरह तरह के percentages किसके मस्तिष्क की रचना या भ्रम हैं ?

आवश्यकता है पहले केबल ऑपरेटर्स द्वारा प्रचलित business मॉडल में बदलाव कर के उसको DAS के उद्द्येशों के अनुरूप परिवर्तित करने की

…..अथवा….

सरकार द्वारा addressability, मतलब संबोधनशीलता, यानी DAS, को निरस्त करवा कर के केवल डिजिटल कम्प्रेशन (नेटवर्क में प्रोग्राम प्रसारण क्षमता में वृध्धि करवाना) के लिए बदलाव करवाने की है ताकी ना Headend में CAS और ना ही SMS में निवेश की आवश्यकता हो….. addressable STB के स्थान पर अति साधारण और सस्ते D2A कनवर्टर से काम चल जाये…. केबल ऑपरेटर एक fixed monthly subscription ले कर अभी की तरह सर्विस प्रदान करते रहें…. इस प्रकार MIB द्वारा आवंटित downlink अनुमतियों का लाभ ब्रॉडकास्टरों को मिलता रहेगा. और केबल ओपेराटरों के विवाद भी सुलझ जायेंगे

अचरज होता है whatsapp पर की गयी टिप्पड़ियों पर और जब वोह बहुत पुराने केबल ऑपरेटर्स के द्वाराकी जाती हैं और अभी तो एक टिपण्णी यह भी आयी है कि किसी ने भी टैरिफ आर्डर समझाने का प्रयास ही क्यों नहीं किया ?

प्रश्न यह उठता है की इस व्यवसाय के लोग अपने धंधे के प्रति प्रकाशित समाचार, आदेश, नियमन और मानकों को स्वयं क्यों नहीं  पढ़ते ? यदि उनको इसमें कोई रूचि ही नहीं है तो नासमझी की बातें और टिप्पड़ियाँ तो स्वाभाविक होंगी. लोग अपने अपने अनुमानित subscription साझे के अनुपातों  की ग़लतफहमी में जीते रहेंगे.

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