पूर्ण केबल टीवी क्रांति में फिर ब्रेक आखिरी चरण की समय सीमा बढ़ी

पूर्ण केबल टीवी क्रांति में फिर ब्रेक आखिरी चरण की समय सीमा बढ़ी

देश में केबल टीवी क्रांति यानी केबल टीवी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू हुए छह साल का वक्त गुजर चुका है, लेकिन प्रक्रिया है कि पूरी ही नहीं हो पा रही है। हर चरण की तरह इस चरण की भी समय सीमा बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने अभी तक पुरानी केबल तकनीक यानी एनालॉग तकनीक के सहारे केबल टीवी देखने वाले ग्राहकों को जल्द डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने का एक और मौका दे दिया है। इसके तहत सूचना प्रसारण मंत्रलय ने केबल टीवी डिजिटलीकरण के चौथे चरण की 31 दिसंबर, 2016 को खत्म हुई समयसीमा को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है। चौथे चरण में डिजिटल केबल प्लेटफॉर्म पर आने के लिए अब नई समयसीमा 31 मार्च, 2017 तय की गई है। सरकार ने ये फैसला डिजिटल केबल टीवी के तीसरे चरण के दौरान तमाम ऑपरेटरों की तरफ से अदालतों में दाखिल मुकदमों के मद्देनजर किया है। डिजिटल केबल टीवी को तीसरे चरण के तहत देश के सभी गांवों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए सरकार ने 31 दिसंबर, 2016 की समयसीमा रखी थी, मगर, केबल ऑपरेटरों ने इसको अदालतों में चुनौती दी। इसकी वजह से तीसरे चरण की प्रक्रिया लक्ष्य से पीछे रह गई है। इसीलिए सरकार ने तीसरे चरण में केबल डिजिटलीकरण की समयसीमा भी एक महीने बढ़ाकर 31 जनवरी, 2017 तक कर दी। सूचना प्रसारण मंत्रलय ने ये साफ कर दिया है कि तीसरे चरण में डिजिटल तकनीक के प्लेटफॉर्म पर आना अपरिहार्य होगा क्योंकि इस समयसीमा के बाद एनालॉग तकनीक आधारित केबल टीवी का प्रसारण उन इलाकों में नहीं होगा जो तीसरे चरण के तहत चिन्हित किए गए हैं। सरकार ने ये भी कह दिया है कि अब तीसरे चरण की समयसीमा किसी सूरत में नहीं बढ़ाई जाएगी।

सैटेलाइट एट इंटरनेट इंडिया के पाठकों को एक बार फिर याद दिला दें कि केबल टीवी संशोधन कानून 2011 के तहत चार चरणों में देश में टेलिविजन प्रसारण को एनालॉग से डिजिटल किया जाना है। इस लिहाज से पहले और दूसरे चरण के डिजिटलीकरण का लक्ष्य सरकार पूरा कर चुकी है, जबकि तीसरे चरण के बाद चौथे चरण का काम किया जाना बाकी है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से चौथे चरण के लिए केबल टीवी डिजिटलीकरण की समयसीमा बढ़ाने के फैसले को केबल ऑपरेटर फेडरेशन ऑफ इंडिया ने नोटबंदी की वजह से मजबूरी में लिया गया फैसला बताया है। संघ ने कहा कि नोटबंदी की वजह से लोगों के पास जरूरी चीजें खरीदने के लिए तो पैसे नहीं थे। ऐसे में सेट टॉप बॉक्स के लिए कहां से नकद लाते। गांव में डिजिटल भुगतान की पर्याप्त व्यवस्था के चलते भी चौथे चरण में देरी हो गई। चौथे चरण के तहत सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा था कि येफैसला न्यायालय में लंबित मामलों और चौथे चरण के लिए निर्धारित क्षेत्रों में सेट टॉप बॉक्स लगाने की असंतोषजनक प्रगति के चलते बाजार में व्याप्त अनिश्चितता के कारण लिया गया है।ऐसे में केबल टीवी का एनालॉग का प्रसारण 31 दिसम्बर, 2016 के पश्चात जहां पूरी तरह से बन्द होने वाला था, वहां अब ऐसा नहीं होगा।हालांकि लोगों को केबल टीवी देखने के लिए 31 मार्च तक आवश्यक रूप से सेट टॉप बॉक्स लगाना जरूरी होगा। सेट टॉप बॉक्स लगाने के लिए उपभोक्ता को एमओएस द्वारा निर्धारित राशि ऑपरेटर को जमा करानी होगी, जिसकी रसीद ऑपरेटर द्वारा प्रदान की जाएगी।

भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने चौथे चरण वाले क्षेत्रों में सेटटॉप बॉक्स लगाने में संतोषजनक प्रगति और कोर्ट में लंबित पड़े मामलों के कारण बाजार में अनिश्चितता के दृष्टिगत केबल टीवी डिजिटाइजेशन के चौथे चरण की अंतिम समयसीमा को बढ़ाकर 31 मार्च निर्धारित की है। चौथे चरण के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन का लक्ष्य 31 दिसंबर 2016 निश्चित किया गया था। इस संबंध में अधिसूचना शीघ्र जारी कर दी गई है। मंत्रालय ने कोर्ट में लंबित मामलों के दृष्टिगत तीसरे चरण क्षेत्रों के शेष उपभोक्ताओं को भी डिजिटल मोड में आने के लिए समय सीमा 31 जनवरी, 2017 तक बढ़ा दी है। मंत्रालय प्रसारकों, मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स, स्थानीय केबल संचालकों और प्राधिकृत अधिकारियों को तीसरे चरण वाले क्षेत्रों में 31 जनवरी, 2017 के बाद केबल नेटवर्क पर एनालॉग सिग्नल का संचारण न करने के लिए निर्देश जारी करेगा।इसके बाद एनालॉग तकनीक आधारित टीवी का प्रसारण उन इलाकों में नहीं होगा, जो तीसरे चरण के तहत चिह्नित किए गए हैं। सरकार ने ये भी कह दिया है कि अब तीसरे चरण की समयसीमा किसी सूरत में नहीं बढ़ाई जाएगी। डिजिटाइजेशन की नई तारीख का ऐलान हो गया है बावजूद इसके नैनीताल इलाके में सेटटॉप बॉक्स नहीं लगने से कई इलाकों में करीब बीस हजार केबल कनेक्शन उपभोक्ताओं के टीवी बंद हो गए। जिले में 60 हजार 386 केबल टीवी उपभोक्ता हैं। जिलेभर में एनालॉग सिग्नल का प्रसारण बंद कर डिजिटल सिग्नल ही प्रसारित किए जा रहे हैं। इससे एसटीबी नहीं लगाने वाले उपभोक्ताओं को चैनल दिखने बंद हो गए हैं। हल्द्वानी में ऐसे 15 हजार, रामनगर में करीब दो हजार और नैनीताल, भवाली, भीमताल में बिना एसटीबी वाले करीब पांच हजार से अधिक उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं। ऐसे लोगों के घरों में अब सिर्फ दस ही चैनल आ रहे हैं, वे भी साफ नहीं हैं। आरोप है कि इन जिलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने टीयर थ्री श्रेणी में आने वाले शहरों के लिए केबल टीवीडिजिटाइजेशन की तारीख 31 जनवरी 2017 तक बढ़ा दी थी। इसके बावजूद जिले में एक महीने पहले ही एनालॉग सिग्नल बंद कर दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन की सीमा 31 मार्च है। ऐसे में अभी ग्रामीण इलाकों में केबल उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है। हालांकि, 31 मार्च से पहले उन्हें भी एसटीबी लगाने होंगे।

सैटेलाइट @ इंटरनेट इंडिया अपने पाठकों को एक बार फिर से याद दिलाना चाहती है कि ट्राई ने सरकार से देश भर में केबल टीवी को एनालॉग से डिजिटल करने की सिफारिश की थी। शुरुआत में इसके लिए सरकार ने साल 2013 खत्म होते-होते पूरे देश में केबल टीवी ऑपरेटर्स की सेवाएं डिजीटल करने का तय किया था, हालांकि इसकी समय सीमा बढ़ते बढ़ते 2016 के आखिर तक पहुंच गया था। पर अब इसे भी 31 मार्च, 2017 तक बढ़ाना पड़ा है। जाहिर है, इसके लिए देश में केबल टीवी डिजिटाइजेशन से जुड़े तमाम पक्षों  से कुछ तो जिम्मेदार हैं ही। चाहे वो सरकार की इच्छा शक्ति हो, या फिर केबल टीवी ऑपरेटर्स और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स की कमी, कोई न कोई तो है जिसकी वजह से ये प्रक्रिया बार बार आगे बढ़ रही है। इसके लिए वो सुविधाएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं जिन पर डिजिटाइजेशन पूरी तरह निर्भर है, मसलन, डिमांड के मुताबिक सेट टॉप बॉक्स की सप्लाई, केबल की उपलब्धता और सबसे जरूरी सेट टॉप बॉक्स लगाने के लिए ग्राहकों की पहल। जब तक ये सभी पक्ष एक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए काम नहीं करेंगे, तब तक ये समय सीमा बढ़ाने का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।जैसे कि बार सरकार कह रही है, हम भी हमारे तमाम लेखों के माध्यम से लोगों तक ये बात पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं कि एक बार केबल टीवी डिजिटाइजेशन लागू होने के बाद न केवल केबल टीवी प्रसारण की पिक्चर क्वॉलिटी सुधरेगी बल्कि आवाज भी पहले के मुकाबले काफी साफ – सुथरी सुनाई देगी। यही नहीं लोग अपनी पसंद के चैनल भी चुन सकेंगे और उन्हीं चैनलों के लिए पैसे देने होंगे जो वो देखना चाहते हैं या देखते हैं। डिजिटल सिस्टम को लागू करने का काम 4 चरणों में किया जा रहा है और इसकी शुरुआत 4 मेट्रो शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से की गई थी। इन शहरों में केबल टीवी डिजिटाइजेशन लागू होने के बाद अगले चरण में 10 लाख या उससे ज्यादा आबादी वाले 38 शहरों में डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। उसे भी कई एक्सटेंशन के बाद अब पूरा कर लिया गया है। अब तीसरे और चौथे चरण के तहत देश के बाकी हिस्सों में केबल टीवी क्रांति यानी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके लिए पहले दिसंबर, 2016 तक का समय तय किया गया था। सरकार इस अवधि तक पूरी प्रक्रिया को पूरी करने के लिए बेहद गंभीर दिख रही है। केबल टीवी डिजिटाइजेशन से ग्राहकों के अलावा इससे सबसे ज्यादा फायदा प्रसारकों को हो रहा है, जिनका सब्सक्रिप्शन से आमदनी बढ़ने लगी है। मगर ऐसा नहीं कि सिर्फ दर्शकों और प्रसारकों को ही फायदा होगा। केबल टीवी वितरकों को भी टैक्स में भारी छूट मिलेगी। कंपनियों को अप्रैल 2011 से मार्च 2019 तक आयकर नहीं देना होगा। यही नहीं सेट टॉप बॉक्स के आयात पर भी सरकार कई तरह की छूट दे रही है। हालांकि सरकार की पहल के बाद देश के अंदर ही सेट टॉप बॉक्स के निर्माण को बढ़ावा मिला। इस फैसले के बाद केबल टीवी इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर कंसोलिडेशन की उम्मीद जताई गई। छोटे ऑपरेटर्स को टिके रहने के लिए बड़े खिलाड़ियों से हाथ मिलाना पड़ा क्योंकि पूरे सिस्टम को डिजिटल करने के लिए काफी निवेश की जरूरत थी।केबल टीवी डिजिटाइजेशन के साथ ही सरकार की योजना इसे ब्रॉडबैंड से भी जोड़ने की है। दूरसंचार विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डॉट) ब्रॉडबैंड की पहुंच बढ़ाने के लिए केबल टीवी की व्यापक और अंतिम उपभोक्ता तक कनेक्टिविटी का फायदा उठाने की योजना बना रहा है। सरकार केबल टीवी के लिए इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) लाइसेंस की नई श्रेणी बनाने पर विचार कर रही है। केन्द्र सरकार ऐसी ब्रॉडबैंड नीति लाने की योजना बना रही है जिसमें ब्रॉडबैंड को स्वास्थ्य और शिक्षा की ही तरह एक मौलिक अधिकार बना दिया जाए। इसके लिए सरकार उस प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर सकती है जिसमें ब्रॉडबैंड सेवाएं देने के लिए केबल टीवी इंफ्रास्ट्रक्चर को आईएसपी के ‘फ्रैंचाइज़ी नेटवर्क’ के तौर पर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया था। इस समय केबल टीवी की पहुंच वायरलाइन टेलिफोन कनेक्शन से ज्यादा है और ये10 करोड़ घरों तक पहुंच चुका है। दरअसल, केबल टीवी नेटवर्क का डिजिटाइजेशन ही इसलिए किया गया कि केबल टीवी सेवा के साथ में ब्रॉडबैंड सेवाएं भी ग्राहकों तक पहुंचें। डॉट द्वारा तैयार किए गए नोट में कहा गया है कि आईएसपी लाइसेंस की मौजूदा शर्तों पर पुनर्विचार की जरूरत है और केबल टीवी ब्रॉडबैंड के लिए अलग से आईएसपी परमिट बनाई जा सकती है ताकि मौजूदा केबल टीवी इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में किया जा सके। ब्रॉडबैंड नीति के तहत साल 2020 तक 60 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहकों तक पहुंचने के लक्ष्य की तारीख भी एक साल कम कर साल 2019 तक कर दी गई है। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के लिए प्राइसवाटर हाउस कूपर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में डायरेक्ट टू होम और केबल टीवी डिजिटाइजेशन से अगले पांच साल टीवी सेक्टर में जबरदस्त विकास देखा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल भारत में टीवी का घनत्व 60 फीसदी है, जबकि कई विकासशील देशों में टीवी का घनत्व इससे कहीं ज्यादा है। ज्यादातर विकासशील देशों में टीवी घनत्व 90 फीसदी या उससे भी ज्यादा है। रिपोर्ट में इसलिए कहा गया है कि भारत में टीवी घनत्व बढ़ने की बहुत संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक अगले पांच साल में भारत में पे-टीवी यानी डीटीएच और डिजिटल केबल टीवी के क्षेत्र में काफी विकास की संभावना है। इससे टीवी के सेक्टर का भी विकास होगा। सीआईआई प्राइसवाटर हाउस कूपर रिपोर्ट के मुताबिक 2018 तक डीटीएच ग्राहकों की संख्या 64 मीलियन तक हो सकती है, जबकि डिजिटल केबल टीवी ग्राहकों की संख्या 90 मीलियन तक हो सकती है। देश में केबल टीवी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद साल 2018 तक एनालॉग फॉर्मैट में केबल देखने वाले घरों की संख्या महज 5 मीलियन रह जाएगी। केबल टीवी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया में तेजी आने और आखिरकार 31 मार्च, 2017 तक पूरी होने की वजह से देश में एनालॉग केबल टीवी वाले घरों की संख्या में भारी कमी आएगी। रिपोर्ट के मुताबिक अगले पांच साल में देश में डिजिटल केबल टीवी ग्राहकों की संख्या में पच्चीस फीसदी की वृद्धि दर्ज की जाएगी। वहीं डीटीएच ग्राहकों की संख्या में भी इस दौरान 13 फीसदी का इजाफा दर्ज किया जा सकता है। यानी अब केबल टीवी के क्षेत्र में कारोबारियों के साथ साथ ग्राहकों के लिए भी अच्छे दिन वाले हैं, हालांकि ये सब इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी जल्दी या कम से कम बढ़ाई गई समय सीमा के अंदर केबल टीवी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, क्योंकि इस मामले में अब तक के अनुभव बहुत उत्साहजनक नहीं रहे हैं।

संबंधित पोस्ट