देश में केबल टीवी क्रांति पूरा केबल डिजिटाइजेशन का आखिरी मौका

देश में केबल टीवी क्रांति पूरा केबल डिजिटाइजेशन का आखिरी मौका

देश में केबल टीवी डिजिटाइजेशन का चौथा और आखिरी 31 दिसंबर को पूरा हो रहा है। इसके बाद देश में कहीं भी एनालॉग से केबल टीवी देखने की सुविधा नहीं मिलेगी। इस चरण के पूरा होते ही देश में केबल में केबल डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो जाएगा।

केबल डिजीटाइजेशन के चौथे चरण यानी आखिरी चरण में देश में सभी जगह से 31 दिसंबर को एनलॉग प्रसारण पूरी तरह से बंद हो जाएगा। ऐसे में इन उपभोक्ताओं को केबल टीवी देखने के लिए 31 दिसंबर से पहले सेट टॉप बॉक्स लगवाना होगा। सेट टॉप बॉक्स यानि टेंशन रहित स्पष्ट प्रसारण, शहरी क्षेत्रों में नब्बे फीसदी केबल डिजीटाइजेशन के साथ ही तीसरा चरण पूरा हुआ था। हालांकि इसकी आखिरी तारीख 31 दिसम्बर 2015 तक ही थी, लेकिन कुछ तकनीकी पेचिदगियों के कारण ये मियाद फरवरी माह तक कर दी गई थी। अब चौथा चरण भी पूरा होने को है। तीन चरणों के तहत देश के ज्यादातर हिस्सों में केबल टीवी उपभोक्ता घर पर सेट टॉप बॉक्स लगवा चुके हैं।

हालांकि ग्रामीण इलाकों में सेट टॉप बॉक्स लगाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केबल ऑपरेटर्स को लोगों को सेट टॉप बॉक्स लगाने के लिए कन्विंस करने में परेशानी हो रही है। सेट टॉप बॉक्स के लिए लोग एकमुश्त पैसे देने को तैयार नहीं हैं। यहां तक कि केबल ऑपरेटर लोगों को ईएमआई का ऑफर दे रहे हैं, लेकिन लोग सेट टॉप बॉक्स लगवाने को राजी नहीं हो रहे हैं। ऐसे में जिस रफ्तार से सेट टॉप बॉक्स लगाए जा रहे हैं, उससे एक बार फिर आशंका बन रही है कि तय सीमा तक देश भर में बचे इलाकों में डिजिटाइजेशन पूरा हो पाएगा। क्योंकि देश के ग्रामीण इलाकों में अभी भी करोड़ों उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने सेट टॉप बॉक्स नहीं लगवाया है। वैसे सरकार ने साफ कर दिया है कि चरणबद्ध तरीके से चले केबल डिजीटाइजेशन के चौथे और आखिरी चरण के बाद आगे उपभोक्ताओं को कोई मौका नहीं मिलेगा। चौथे चरण में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में भी सेट टॉप बॉक्स लगाने की शुरुआत हुई थी।

एक तरफ जहां देश भर में केबल टीवी डिजिटलाइजेशन का आखिरी चरण चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस अभियान के तहत ग्राहकों को केबल ऑपरेटर्स की मनमानी वसूली और एकाधिकार वाली स्थिति के चलते भारी पड़ रहा है। अच्छी क्वालिटी का प्रसारण और ऐक्टिवेशन के नाम पर सेट टॉप बॉक्स के बहाने केबल ऑपरेटर आमजनों की जेब काट रहे हैं। डिजिटाइजेशन की वजह से खासकर उनलोगों को काफी परेशानी हो रही है जिनके घर में एक से ज्यादा टीवी सेट हैं। जैसे पहले जिस घर में एक से ज्यादा टीवी सेट होने के बावजूद उनका सिर्फ एक केबल टीवी कनेक्शन से काम चल जाया करता था। कई बार तो लोग पूरी बिल्डिंग में एक कनेक्शन से काम चला लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। डिजिटाइजेशन के बाद प्रत्येक टीवी सेट के लिए अलग-अलग सेट टॉप बॉक्स लगवाने पड़ रहे हैं। लोगों की शिकायत है कि दावा किया गया था कि डिजिटाइजेशन के बाद पिक्चर और आवाज की क्वालिटी उन्नत हो जाएगी, लेकिन कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि असल में ऐसा हुआ नहीं हैं। सिर्फ चैनलों की संख्या बढ़ गई है। इतना ही नहीं बढ़े हुए चैनलों में आधे से ज्यादा किसी काम के नहीं हैं। ये शिकायत एक उपभोक्ता की नहीं बल्कि हर टीवी उपभोक्ता की है, जिसकी जेब पर सरकार द्वारा अनावश्यक रूप से अतिरिक्त भार डाल दिया गया है। हालत यह है कि एक औसत निम्न वर्ग के पास खाने को रोटी भले न हो, टेलीविजन जरूर मिल जाएगा।

कई जगहों से सेट टॉप बॉक्स के लिए ज्यादा रकम वसूलने की भी शिकायत मिली है। आमतौर पर सेट टॉप बॉक्स के लिए 700 रुपए लिए जा रहे हैं, लेकिन कई लोगों की शिकायत है कि केबल ऑपरेटर उनसे इंपोर्टेड सेट टॉप बॉक्स के नाम पर ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि केबल ऑपरेटर सेट टॉप बॉक्स के लिए न तो रसीद दे रहे हैं और न ही गारंटी कार्ड। मांगने पर साफ मना कर रहे हैं। कहीं पर भी शिकायत कर लीजिए, स्थानीय स्तर पर या केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय में, कोई नतीजा नहीं निकल रहा। यानी मजबूरी और मोनोपोली का जबरदस्त फायदा उठाते हुए खुलेआम लूट हो रही है जिससे जो मन में आया उससे उतने पैसे ले लिए।

जानकारों की मानें तो देश में टेलीविजन प्रसारण कारोबार की अर्थव्यवस्था के दो पहिए हैं, पहला प्रसारणकर्ता और दूसरा स्थानीय केबल ऑपरेटर। केबल ऑपरेटर ग्राहकों की संख्या की सही जानकारी न दे कर प्रसारणकर्ताओं और सरकारी राजस्व में डंडी मार रहे थे। ऐसे में सरकार पर दबाव बनाया गया और सरकार ने दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई को इस समस्या का हल खोजने के लिए लगा दिया। ट्राई ने अगस्त, 2010 में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपीं और सरकार ने बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाते हुए तमाम लंबित महत्त्वपूर्ण विधेयकों को दरकिनार कर आननफानन दिसंबर 2011 में भारत में केबल टीवी के डिजिटलाइजेशन यानी केबल क्रांति को अनिवार्य बनाने संबंधी एक विधेयक को संसद से पारित करा लिया। संसद में बगैर किसी बहस के एकमत से पारित ‘केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) संशोधन विधेयक 2011’ में मुख्य बात केवल इतनी सी है कि देश के हर टेलीविजन उपभोक्ता को अपने हर टेलीविजन सेट पर सेट टॉप बॉक्स लगाना अनिवार्य हो गया। पूरे देश में इसकी आखिरी मियाद मार्च, 2015 मुकर्रर की गई। हालांकि देर होने पर इसे एक साल के आगे बढ़ाया गया, लेकिन अब भी उम्मीद है कि तय वक्त में काम पूरा नहीं हो पाएगा।

सेट टॉप बॉक्स तो बेहतर क्वालिटी के इंपोर्ट किए जा रहे हैं, लेकिन इसका फायदा उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है, बल्कि ऑपरेटर उठा रहे हैं। हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी केबल टीवी ग्राहकों को बेहतर क्वालिटी और सारे चैनल देखने को नहीं मिल रहे हैं। हर बॉक्स में कोई न कोई कमी है, जिसका कोई भी समाधान ऑपरेटर नहीं करते। उलटा वहां भी केबल ऑपरेटर अपनी कमाई का जरिया बना रहे हैं। कभी ये कह कर कि अपना केबल वायर बदलवा लीजिए, वह काफी पुराना हो गया है, सिग्नल ठीक से नहीं पकड़ रहा है, इसीलिए चैनल साफ नहीं आ रहे हैं। प्रति टेलीविजन मासिक केबल किराया अलग से बढ़ा दिया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि इस संपूर्ण प्रक्रिया में केबल ऑपरेटरों की जेब से इकन्नी भी खर्च नहीं हो रही है। जानकारों की मानें तो केबल टीवी विधेयक में आम जनता के फायदे के लिए एक भी शब्द भी नहीं कहा गया है। केबल ऑपरेटरों की मनमानी और मोनोपोली वाली स्थिति पर भी विधेयक में कुछ नहीं है। केबल ऑपरेटर्स ने अपने-अपने इलाके बांट रखे हैं और एक इलाके में एक ही ऑपरेटर होता है। इलाके के नागरिक टेलीविजन पर अपने मनपसंद चैनल देखने के लिए पूरी तरह से अकेले एक ऑपरेटर पर निर्भर हैं। उनके पास कोई भी विकल्प नहीं है। गौर करने वाली बात ये है कि विधेयक में प्रसारणकर्ताओं को केबल ऑपरेटरों के ब्लैकमेल और तानाशाही रवैए से पूर्ण निजात दिला दी गई है। केबल ऑपरेटर मनमाने ढंग से चैनल लगाते और गायब कर देते थे और चैनल लगाने के नाम पर प्रसारणकर्ताओं से मोटी रकम ऐंठते थे। कहा जाता है कि केबल ऑपरेटरों की मनमानी से तंग आकर ही बड़े-बड़े प्रसारणकर्ताओं ने सरकार पर दबाव बनाया और अपने हक में यह विधेयक लागू कराया, लेकिन इससे केबल ऑपरेटर्स को नुकसान नहीं बल्कि दोहरा फायदा ही हो रहा है और इन दोनों पाटों के बीच पीस रहा है केबल टीवी उपभोक्ता।

जैसा कि हम बार बार कह रहे हैं कि सेट टॉप बॉक्स लगाने के बावजूद भी उपभोक्ताओं फायदा नहीं हो रहा है। कहा गया था कि केबल टीवी डिजिटाइजेशन के बाद सरकार को केबल टीवी ग्राहकों की सही संख्या की जानकारी मिल जाएगी, लेकिन अब भी मनोरंजन कर विभाग को कुल केबल टीवी उपभोक्ताओं की सही-सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सभी केबल ऑपरेटर और मल्टी सर्विस ऑपरेटर्स को कस्टमर एप्लिकेशन फार्म अनिवार्य रूप से भरने को कहा गया है। उपभोक्ताओं से भी कहा जा रहा है कि वह अपने केबल धारकों से इस फार्म को मांगे और भरकर जमा कर दें। फार्म भरने के कारण केबल ऑपरेटर अपने उपभोक्ताओं की कोई भी जानकारी नहीं छुपा पाएंगे। फार्म भरने का फायदा ये होगा कि उपभोक्ता का पंजीकरण हो जाएगा। साथ ही उपभोक्ताओं को सिर्फ उसी चैनल का पैसा देना होगा जिन्हें वो देखना चाहते हैं। सेट टॉप बॉक्स लगने के बाद मनोरंजन कर को केबल लाइसेंस से मिलने वाली आय में एका एक बढोत्तरी हो गई है। मनोरंजन कर के रूप में सरकारी खजाने में प्रति कनेक्शन बीस रुपये मिलते हैं। ऐसे में केबल टीवी से सरकार की आय कितनी बढ़ी है इसका अंदाजा लगाना जरा भी मुश्किल नहीं है क्योंकि देश में तीन चरणों का केबल टीवी डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो चुका है, जबकि आखिरी चरण इसी महीने पूरा हो रहा है। सरकार भी लगातार उपभोक्ताओं से अपील कर रही है कि वे केबल ऑपरेटर से कस्टमर एप्लिकेशन फार्म जरूर मांगे। इसके साथ ही लोगों से ये भी अपील की जा रही है कि जिनके घर में सेट टॉप बॉक्स नहीं लगा है, वे जल्द से जल्द सेट टॉप बॉक्स लगवा लें, नहीं तो आपका टेलीविजन डिब्बा बन जाएगा।

जैसा कि हम बार बार कह रहे हैं कि देश में केबल टीवी डिजिटाइजेशन का चौथा चरण आखिरी चरण में पहुंच चुका है। देश भर में डिजिटाइजेशन के लिए सेट टॉप बॉक्स अनिवार्य किया गया है।

दरअसल कई ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में अब भी पुराने एनालॉग प्रणाली के तहत ही केबल चैनल प्रसारण हो रहा है। 31 दिसंबर के बाद पूरे देश भर में एक साथ एनालॉग सिग्नलिंग बंद कर दी जाएगी। इसलिए ग्रामीण इलाकों के लोगों से अपील की जा रही है कि 31 दिसंबर तक सेट टॉप अपने केबल ऑपरेटरों से संपर्क कर लगाएं। गौरतलब है कि केबल टीवी क्षेत्र में सेट टॉप बॉक्स डिजिटाइजेशन के तहत अनिवार्य किया गया है। पहले चरण में देश के चार महानगरों में इसे लागू किया गया था। इसके बाद दूसरे चरण में 38 मझोले शहरों को इसमें शामिल किया गया था। इसके बाद तहसील स्तरों पर इसका काम किया गया। फिर सभी ग्रामीण इलाकों में सेट टॉप बॉक्स लगाना अनिवार्य किया गया, लेकिन केबल टीवी इंडस्ट्री के मुख्य वितरक एमएसओ(मल्टी सिस्टम ऑपरेटर) के पास उतनी तादाद में केबल चैनल उपलब्ध ना होने से अंतिम स्तर तक सेट टॉप बॉक्स पहुंचना कठिन साबित हो रहा था। ऐसे में थोड़ी समय सीमा बढ़ाई गई। अब अंतत: 31 दिसंबर को केबल एनालॉग सिस्टम बंद कर दिए जाने के बाद ग्रामीण इलाकों में भी केबल चैनल सेट टॉप बॉक्स के मार्फत ही देखा जा सकेगा।

संबंधित पोस्ट