डिजिटलीकरण के विभिन्न प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों के बदलते व्यवसायी मॉडल

डिजिटलीकरण के विभिन्न प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों के बदलते व्यवसायी मॉडल

आज के कारोबार में सबसे अधिक प्रचलित शब्द है – “डिजिटलीकरण।”। अधिकांश कंपनियाँ और अधिक डिजीटल होने के लिए प्रयासरत हैं और वे अपने कार्यस्थल में आवश्यक परिवर्तन कर रही हैं। डिजिटलीकरण वास्तव में है क्या? businessdictionary.com के अनुसार, डिजिटलीकरण से आशय होता है – किसी भी रूप (पाठ, तस्वीरें, आवाज, आदि) में मौजूद ऐनालॉग सूचना का उपयुक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (जैसे कि कोई स्कैनर या विशेष कंप्यूटर चिप्स) के द्वारा डिजिटल रूप में रूपांतरण, ताकि सूचना को डिजिटल सर्किटों, उपकरणों, और नेटवर्कों के माध्यम से संसाधित, संग्रहित तथा प्रेषित किया जा सके।

डिजिटलीकरण को प्रेरित करने वाली तीन प्राथमिक शक्तियाँ: 

  • उपभोक्ता आकर्षण: उपभोक्ता और विशेष रूप से ‘सी’ पीढ़ी (युवा पीढ़ी जो मुख्य रूप से 2020 तक, हमेशा एक डिजिटल दुनिया में निवास करेगी) पहले से ही डिजिटल पर्यावरण को पूरी तरह से अपनाना शुरू कर चुके हैं। वे स्वाभाविक रूप से हमेशा जुड़े होने की उम्मीद रखते हैं और अपने व्यक्तिगत डेटा को साझा करने के लिए तैयार हैं।
  • प्रौद्योगिकी प्रेरणा: ब्रॉडबैंड का बढ़ता सामर्थ्य अरबों उपभोक्ताओं के लिए प्रौद्योगिकी तक पहुँचने के मार्ग को विस्तारित कर रहा है। साथ ही साथ कम लागत वाले स्मार्ट उपकरणों को हर उद्योगों में प्रयुक्त किया जा रहा है। क्लाउड कंप्यूटिंग और इसके लिए आवश्यक विशाल सूचना प्रसंस्करण मशीनरी तेजी से विकसित हो रहे हैं
  • आर्थिक लाभ: डिजिटलीकरण के माध्यम से होने वाला आर्थिक लाभ निर्धारण-योग्य है। डिजिटलीकरण की नई प्रौद्योगिकियों के लिए कंपनियों द्वारा काफी पूँजी निवेश किया गया है।

2016 के रुझान: डिजिटलीकरण, एक सर्वोच्च प्राथमिकता

 भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के मजबूत विकास का श्रेय बढ़ते मध्यम वर्ग, बढ़ता प्रयोज्य आय और गांवों के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, ग्रामीण विद्युतीकरण और ई-गवर्नेंस कार्यक्रमों जैसे विभिन्न सरकारी पहलों सहित कई कारकों को जाता है। सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम का लक्ष्य हर नागरिक के घर और दफ्तर तक पहुँचना है। हालांकि, देश भर में प्रौद्योगिकी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए हमें अपनी विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने तथा कुछ मजबूत कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।

2016 में ट्रेंड कुछ इस प्रकार होंगे: 

  • ई-गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया 

अगर हम उन प्रेरकों को देखें जिनका आने वाले महीनों में एक प्रभाव पड़ेगा, ई-गवर्नेंस और डिजिटलीकरण महत्वपूर्ण होंगे। हम मानते हैं कि डिजिटलीकरण के बिना विकास संभव नहीं है। हम अपने विकास लक्ष्यों, जिनकी हम कामना करते हैं को तब तक हासिल नहीं कर सकते जब तक हम डिजीटाईज़ न करें। डिजिटल भारत गांवों को जोड़ने और उनके विकास को सक्षम करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।

  • ई-वाणिज्य 

प्रौद्योगिकी की दृष्टि से, विभिन्न उद्यमों और उपभोक्ताओं के लिए ई-वाणिज्य मंच का अंगीकरण एक बड़ा खेल परिवर्तक सिद्ध होगा। ई-वाणिज्य हमारे देश में लोगों के खरीदारी करने के तरीके को बदल रहा है और यह किसी भी कंपनी के बाजार तक पहुँचने की कार्यनीति में एक सम्मोहक चैनल साबित हो रहा है। उपभोक्ता के पक्ष पर, छात्रों या अगली पीढ़ी के उपभोक्ताओं द्वारा प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर अपनाया जाना एक दूसरा बड़ा खेल परिवर्तक साबित होने जा रहा है। सरकार और उद्यमियों द्वारा जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी का प्रयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे आईटी क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।

  • ग्रामीण कनेक्टिविटी 

सरकार ग्राम पंचायतों को कनेक्ट करने के लिए कई सारे प्रयास कर रही है और ग्रामीण कनेक्टिविटी की मदद से विभिन्न सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम हो रही है। इस पूरे पहलू में, आईटी अवसंरचना पर निर्भरता महत्वपूर्ण होगी क्योंकि यह बाह्य उत्पादों, सेवाओं, सूचनाओं और सामाजिक संबंधों का उपयोग करने के लिए समुदायों को एक और अधिक विश्वसनीय तथा तेज रास्ता प्रदान करेगी।

  • जीएसटी – एक खेल परिवर्तक

जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) एक बड़ा परिवर्तक साबित हो सकता है, क्योंकि अगर सरकार जीएसटी को लागू करती है तो सभी व्यवसायों, यहां तक कि छोटे व्यवसायों के लिए भी प्रौद्योगिकी को अधिक से अधिक अपनाना अनिवार्य हो जाएगा। स्वचालन उनके लिए देश भर में एक दूसरे के साथ कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान कर देगा। इस तरह से जीएसटी उद्योग को अगले स्तर पर ले जाएगा और भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर विनिर्माण के लिए अपेक्षित प्रेरणा प्रदान करेगा।

  • युवाओं और ग्रामीण भारत का सशक्तीकरण

 सरकार ने घोषणा की कि बीएसएनएल के पास अपने 30 वर्षीय एक्सचेंजों को बदलने के लिए 55 अगली पीढ़ी के नेटवर्क पहले से ही तैयार हैं और यह संख्या वर्ष के अंत तक 683 तक बढ़ जाएगी। बीएसएनएल के पास 53 सक्रिय वाई-फाई हॉटस्पॉट भी हैं और 2016 के अंत तक 2500 हॉटस्पॉट निर्मित करने का लक्ष्य रखता है। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल सभी विवरण प्रदान करेगा और एक ही मंच से सभी प्रमुख प्रक्रियाओं को निष्पादित करेगा, जबकि सरकार एक ऐप की भी शुरूआत करने जा रही है, जिससे नागरिकों के लिए अपने स्मार्टफोन के जरिये सरकारी अस्पतालों से ऐपॉयंटमेंट लेना और फीस का भुगतान करना संभव हो जाएगा। इसी तरह, भारतीय नागरिक अब सुव्यवस्थित डेटा सत्यापन के लिए अपने आधार प्रमाणीकरण संख्या के साथ अपने फोन नंबर को कनेक्ट कर सकते हैं।

 जिंदगियों को बदल रहा है मनोरंजन और मीडिया उद्योग

 दुनिया के सबसे जीवंत और रोमांचक उद्योगों में से एक, भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग का जीवन और भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक जबरदस्त प्रभाव पड़ा है। जैसे-जैसे मनोरंजन और मीडिया उद्योग अपनी पहुँच को विस्तारित कर रहा है, यह प्रभावित करने वाले मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने, लाखों भारतीयों की ऊर्जा को दिशा दिखाने और उनमें आकांक्षाओं का निर्माण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैश्विक मनोरंजन और मीडिया बाजार में पिछले 3-5 वर्षों से लगातार वृद्धि के संकेत देखे गए हैं।

डिजिटलीकरण के क्षेत्र में चरणबद्ध प्रगति उद्योग के विकास और सफलता के लिए प्रारंभिक प्रयास रही है, जिससे प्रमुख संकेतकों, विशेष रूप से टीवी और फिल्म क्षेत्रों के डोमेन के भीतर एक अभूतपूर्व बदलाव आया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने भारत में मौजूदा प्रसारण परिदृश्य में विकास को बढ़ावा देने हेतु एक रूपरेखा बनाने के लिए और प्रौद्योगिकी की शक्ति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कई पहलों की शुरुआत की है।

  • मोबाइल की और और अधिक आकर्षित होता जा रहा है भारत

भारत के कुल इंटरनेट उपभोक्ता आधार में लगभग 214 मिलियन की वृद्धि हुई, जिनमें लगभग 130 मिलियन मोबाइल उपकरणों का उपयोग कर ऑनलाइन होते हैं। डिजिटल मीडिया पर विज्ञापन में किसी अन्य विज्ञापन श्रेणी की तुलना में 38 प्रतिशत तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। स्मार्टफोनों, 3जी, 4जी और विविध मोबाइल ऐपों के बढ़ते प्रसार के कारण मोबाइल, सोशल और वीडियो विज्ञापन के क्षेत्र में स्टार कैटेगरी के रूप में उभर कर आए हैं। 

डिजिटलीकरण का आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर अलग-अलग प्रभाव

 हाल ही के वर्षों में, डिजिटलीकरण, उपभोक्ताओं, उद्यमों, और सरकारों द्वारा कनेक्टेड डिजिटल सेवाओं का बड़े पैमाने पर अपनाया जाना सामाजिक-आर्थिक लाभ का एक प्रमुख प्रेरक और संबल के रूप में उभरा है। दरअसल, प्रतिकूल वैश्विक आर्थिक स्थितियों के बावजूद, डिजिटलीकरण आर्थिक विकास और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए नीति निर्माताओं की सहायता करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, प्रबंधन परामर्श फर्म बूज़ ऐंड कंपनी के अर्थमितीय विश्लेषण के अनुसार, देशों और क्षेत्रों पर इसका काफी भिन्न-भिन्न प्रभाव होता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, डिजिटलीकरण उत्पादकता में सुधार करता है और विकास को प्रभावित करता है, फिर भी, इससे नौकरियों में छटांई हो सकती है। इसके विपरीत, उभरते बाजारों को डिजिटलीकरण का विकास पर प्रभाव की तुलना में रोजगार पर प्रभाव से अधिक लाभ हासिल होने की उम्मीद है। डिजिटलीकरण के नतीजे को बेहतर रूप से चैनलाईज़ करने के लिए, नीति निर्माताओं को यह योजना बनानी होगी कि कैसे वे विशिष्ट क्षेत्रों को डिजीटाईज़ करेंगे और अधिकतम प्रभाव प्राप्त करने में मदद करने के लिए क्षमताओं और आर्थिक समर्थकों के विकास को प्रोत्साहित करेंगे।

 डिजिटलीकरण का आर्थिक प्रभाव 

दुनिया भर में, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अविश्वसनीय गति से विकास को जारी रखे हुए हैं, तथापि, उनके प्रभाव देशों और क्षेत्रों पर असमान हैं। बूज़ ऐंड कंपनी के एक भागीदार, बहजत एल डारविच का कहना है कि इन सेवाओं तक पहुंच नीति निर्माताओं के लिए अब प्राथमिक मुद्दा नहीं रह गया है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कैसे नीति निर्माता अंगीकरण, उपयोग और प्रभाव को अधिकतम बढ़ाएँगे। नीति निर्माताओं को सक्रिय रूप से डिजिटल बाजारों का निर्माण करने की जरूरत है।

  • उद्योग डिजिटलीकरण सूचकांक 

2012 में, बूज़ ऐंड कंपनी ने एक सूचकांक, जो देश-वार डिजिटलीकरण को स्कोर करता है, बनाते हुए डिजिटलीकरण के प्रभाव का निर्धारण करने की शुरुआत की थी। यह विश्लेषण डिजिटलीकरण के स्तर और आर्थिक व सामाजिक कारकों पर इसके वास्तविक प्रभाव को मापता है। इस शोध से यह भी पता चला है कि जिन देशों ने अपने डिजिटलीकरण के स्तर में वृद्धि की है, उन्होंने अपनी अर्थव्यवस्थाओं, अपने समाज और अपने सार्वजनिक क्षेत्रों के कामकाज में लाभ हासिल किया है। डिजिटलीकरण के मामले में जो देश जितना अधिक उन्नत होगा, वह उतना ही अधिक लाभान्वित होगा।

  • डिजिटलीकरण का सकल घरेलू उत्पाद प्रति व्यक्ति पर प्रभाव 

बूज़ ऐंड कंपनी के विश्लेषण से पता चलता है कि किसी देश के डिजिटलीकरण स्कोर में 10 प्रतिशत की वृद्धि उसके सकल घरेलू उत्पाद प्रति व्यक्ति में 0.75 प्रतिशत की वृद्धि को प्रेरित करती है।

  • बेरोजगारी पर प्रभाव

डिजिटलीकरण डिजिटलीकरण स्कोर में 10 प्वाईंट वृद्धि के साथ रोजगार पैदा करता है, जिसके फलस्वरूप बेरोजगारी के दर में 1.02 प्रतिशत की गिरावट होती है। बूज़ ऐंड कंपनी के अध्ययन के अनुसार, 2011 में, डिजिटलीकरण का विवश और डिजीटल रूप में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रोजगार पर सबसे बड़ा प्रभाव पड़ा था। पूर्व एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया, और लैटिन अमेरिका के सभी क्षेत्रों में रोजगार में अधिकांश वृद्धि हुई थी और इन क्षेत्रों में डिजिटलीकरण में सुधार के परिणामस्वरूप 4 लाख से अधिक नौकरियाँ प्राप्त की थी।

डिजिटलीकरण का क्षेत्रीय प्रभाव 

उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादकता और रोजगार सृजन के मामले में, डिजिटलीकरण के प्रभाव में महत्वपूर्ण अंतर को समझने के लिए, हम पहले यह समझना होगा कि डिजिटलीकरण किसी भी उद्यम के कामकाज को कैसे प्रभावित करता है। किसी भी सामान्य कंपनी के कार्यों को चार क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है:

  • व्यवसाय: डिजिटलीकरण मौलिक रूप से व्यवसाय मॉडल को नया आकार दे रहा है। यह प्रवेश के लिए बाधाओं को कम कर रहा है और उद्यमों के लिए बाजार पहुँच का विस्तार कर रहा है। 
  • बाजार जाओ: डिजिटलीकरण कंपनियों के ब्रैंड और उत्पादों का निर्माण करने, संवाद करने और अपने ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करने की प्रक्रिया को बदल रहा है। कंपनियाँ ब्रैंड निर्माण के लिए अधिकाधिक सोशल मीडिया पर भरोसा कर रही हैं। ग्राहक अपनी खरीद पर राय ऑनलाइन दे रहे हैं।
  • उत्पादन: डिजिटलीकरण कंपनियों की उत्पादन संपत्तियों के प्रबंधन में भी बदलाव ला रहा है। इसने कंपनियों को सर्वश्रेष्ठ डिजाइन और यूजर इंटरफेस विकसित करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हुए उभरती अर्थव्यवस्थाओं में श्रम प्रधान कार्यों को स्थानांतरित करने के लिए सक्षम बनाया है।
  • संचालन: अंत में, डिजिटलीकरण का कंपनियों द्वारा प्रतिस्पर्धी लाभ उत्पन्न करने हेतु संगठित होकर काम करने पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। डिजिटलीकरण ने अधिक वैश्विक संस्थाओं का सृजन किया है और कार्यालय क्षेत्र की अवधारणा को नए सिरे से परिभाषित किया है।

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