केबल टीवी क्रांति से बढ़ी सरकार की कमाई

केबल टीवी क्रांति से बढ़ी सरकार की कमाई

देश में केबल टीवी क्रांति यानी केबल टीवी डिजिटाइजेशन अपने आखिरी चरण में हैं, और इसके साथ ही देश में केबल टीवी का एनालॉग से डिजिटल में परिवर्तित होने का काम पूरा होने वाला है। देश के केबल टीवी इतिहास में ये एक नए युग की शुरुआत होगी। एक ऐसे देश जहां कभी टेलीविजन की शुरुआत एक असंभव सी बात थी, वहां आज केबल टीवी डिजिटल युग में शामिल हो रही है। वैसे तो डिजिटाइजेशन के अलग-अलग तीन चरणों में देश के एक बड़े हिस्से में केबल टीवी का डिजिटाइजेशन हो चुका है। अब ये अपने चौथे और आखिरी चरण में है। इस साल के अंत तक इस चरण के भी पूरा होने का लक्ष्य तय किया गया है। अगर ये तय समय पर पूरा हो जाएगा तो देश में केबल टीवी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

सरकार ने जिन लक्ष्यों को लेकर देश में डिजिटल क्रांति की शुरुआत की थी उनमें से कुछ के असर अब दिखने लगे हैं। देश के एक बड़े हिस्से में अब जहां केबल टीवी दर्शक डिजिटल क्वालिटी में केबल टीवी के चैनल्स देख पा रहे हैं, वहीं अब तक इस असंगठित उद्योग क्षेत्र से अब सरकारी खजाने में भी कमाई में बढ़ोत्तरी होने लगी है। डिजिटाइजेशन शुरू होने से पहले तक देश में केबल टीवी एक असंगठित उद्योग के तौर पर जाना जाता रहा है। पहले केबल ऑपरेटर्स कभी भी अपने ग्राहकों की सही संख्या सरकार को नहीं बताती थी। इससे टैक्स के तौर पर सरकारी खजाने में पूरी रकम नहीं पहुंचती थी, लेकिन डिजिटाइजेशन के बाद केबल ऑपरेटर्स और एमएसओ को अपने ग्राहकों की सही संख्या सरकार को बताना जरूरी कर दिया गया है। दरअसल, केबल टीवी देखने के लिए अब सेट टॉप बॉक्स जरूरी कर दिया गया है और प्रत्येक एक्टिव सेट टॉप बॉक्स की जानकारी केबल ऑपरेटर को सरकार को देना जरूरी हो गया है। इससे अब केबल ऑपरेटर्स को प्रति ग्राहक के हिसाब से सरकारी खजाने में टैक्स जमा कराना पड़ता है। अब ग्राहकों की सही संख्या के मुताबिक टैक्स जमा किए जा रहे हैं। सरकारी खजाने में ग्राहकों की संख्या के मुताबिक टैक्स पहुंचने से सरकार की कमाई में इजाफा हो रही है।

फरवरी में आम बजट से पूर्व संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि केबल टीवी की डिजिटाइजेशन प्रक्रिया की वजह से केंद्र और राज्यों में टैक्स कलेक्शन में इजाफा हुआ है। सरकार का मानना है कि उद्योग में केबल टीवी डिजिटाइजेशन की वजह से आई पारदर्शिता की वजह से ये संभव हुआ है। सैटेलाइट एट इंटरनेट इंडिया के पाठकों को बता दें कि सरकार ने साल 2010 में देश में केबल टीवी की शक्ल-ओ-सूरत बदलने के लिए एक अति महत्वाकांक्षी परियोजना केबल टीवी को डिजिटाइज करने का काम शुरू किया था। इसे अलग अलग चार चरणों में पूरा किया जाना है। अब तक तीन चरण पूरे हो चुके हैं और आखिरी चरण भी करीब करीब अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। इस साल यानी 2016 के 31 दिसंबर तक इसे भी पूरा कर लिया जाना है। इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक शुरुआती डाटा में पता चला है कि केबल टीवी उद्योग के क्षेत्र में डिजिटाइजेशन से आई पारदर्शिता के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि देश में जब केबल टीवी के डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो जाएगा तब इससे ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी। इससे न सिर्फ दर्शकों को केबल टीवी देखने का अनुभव बदल जाएगा बल्कि इस सेवा की गुणवत्ता भी उन्नत हो जाएगी। आंकड़ों की बात करें तो भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टेलीविजन मार्केट है। भारत में 168 मिलियन घरों में टीवी सेट हैं। फीसदी की बात करें तो देश में टीवी का करीब 61 फीसदी पेनेट्रेशन है। इसके साथ ही भारत में पर कैपिटा कंजप्शन में लगातार वृद्धि होने की वजह से कंटेंट कंजप्शन भी काफी अधिक है। इसकी वजह देश में मीडिया पेनेट्रेशन और थ्रीजी डिवाइसेस के प्रयोग में लगातार वृद्धि है।

इधर, केबल टीवी डिजिटाइजेशन से जहां देश के एक बड़े हिस्से में दर्शक बेहतर केबल टीवी सर्विस का लुत्फ उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई शहरों में डिजिटाइजेशन की वजह से दर्शकों को परेशानी भी उठानी पड़ रही है। सिलीगुड़ी नगर निगम इलाके में पिछले दिनों अचानक एनालॉग केबल टीवी सेवा बंद होने से हजारों लोग टीवी देखने से वंचित हो गए। सिलीगुड़ी शहर के सभी तीनों प्रमुख केबल ऑपरेटरों ने अचानक एनालॉग सिगनल देना बंद कर दिया, जिसकी वजह से सेट टॉप बॉक्स खरीदने के लिए मारा-मारी मच गई। केबल टीवी डिजिटाइजेशन के तहत ट्राई ने 31 मार्च को ही एनालॉग केबल टीवी सेवा बंद करने का निर्देश दिया था।  उसके बाद भी यहां के केबल ऑपरेटर इस सेवा को जारी रखे हुए थे। इस बीच, केबल ऑपरेटरों ने अपने ग्राहकों को सेट टॉप बॉक्स मुहैया कराना भी शुरू कर दिया था, लेकिन सेट टॉप बॉक्स की कीमत इतनी अधिक रखी गई कि काफी ग्राहक सेट टॉप बॉक्स नहीं खरीद रहे थे। ऐसे लोग बगैर सेट टॉप बॉक्स के ही केबल टीवी देख रहे थे। सिलीगुड़ी के एक प्रमुख केबल कंपनी के मुताबिक नियमानुसार 31 मार्च को ही एनालॉग सिगनल बंद करने का निर्देश ट्राई ने जारी किया था। बीच में विधानसभा चुनाव होने और काफी ग्राहकों के सेट टॉप बॉक्स नहीं लेने की वजह से इस सेवा को चालू रखा गया था। एक अन्य केबल ऑपरेटर कंपनी के प्रमुख ने बताया कि दार्जिलिंग जिले के जिला अधिकारी के निर्देश पर एनालॉग केबल टीवी सेवा बंद कर दी गई है। ट्राई ने सभी जिलों के नोडल ऑफिसरों को तत्काल इस सेवा को बंद करने का निर्देश दिया था। जिले के नोडल ऑफिसर जिला अधिकारी होते हैं। उनकी ओर से सिलीगुड़ी के सभी केबल ऑपरटरों को एनालॉग सिगनल बंद करने का निर्देश दिया गया। उसके बाद सभी केबल ऑपरेटरों की एक बैठक हुई और सिगनल को बंद कर दिया गया। केबल ऑपरेटरों के पास सेट टॉप बॉक्स की कोई कमी नहीं है। ऐसे 80 फीसदी से अधिक लोगों ने पहले ही सेट टॉप बॉक्स लगा लिया था। वह लोग सेट टॉप बॉक्स लगाने के लिए ग्राहकों को किश्तों की सुविधा भी दे रहे हैं। 20 फीसदी ही टीवी ग्राहक ऐसे थे, जो सेट टॉप बॉक्स नहीं लगा पाये थे। अब यह सभी लोग भी सेटटॉप बॉक्स लगा रहे हैं। उन्होंने केबल ऑपरेटरों द्वारा सेट टॉप बॉक्स की कीमत अधिक वसूलने के आरोपों को खारिज कर दिया। सिलीगुड़ी में 14 सौ रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक की कीमत पर सेट टॉप बॉक्स उपलब्ध हैं। क्वालिटी के हिसाब से सेट टॉप बॉक्स की कीमतें रखी गई हैं। ट्राई के निर्देश पर ही एनालॉग केबल टीवी सेवा बंद कर दिया गया।

केबल टीवी डिजिटाइजेशन के साथ ही देश में डायरेक्ट टु होम यानी डीटीएच का भी तेजी से विकास हो रहा है। इस क्षेत्र में हर साल दस लाख ग्राहकों की संख्या के हिसाब से वृद्धि हो रही है। जानकारों की मानें तो देश में सौ फीसदी डिजिटाइजेशन में डीटीएच एक अहम रोल निभाने वाला है। यही वजह है कि अब डीटीएच के क्षेत्र में भी मोबाइल की तर्ज पर पोर्टेबिलिटी लाने पर काम हो रहा है। अब वो दिन दूर नहीं जब डीटीएच की भी पोर्टेबिलिटी हो सकेगी। आप अगर टीवी चैनल देखने के लिए एक ही डीटीएच कंपनी से ऊब चुके हैं तो पोर्टेबिलिटी की तैयारी कर लें। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय डीटीएच में भी पोर्टेबिलिटी का इंतजाम करने जा रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मीडिया उद्योग से कहा कि इस दिशा में काम करें। अभी तक केवल उपभोक्ता दूसरी कंपनी का डीटीएच तभी ले सकता है जब पहली कंपनी की सेवाएं बंद करा दे। मंत्रालय की सोच है कि सेट टॉप बॉक्स एक ही रहे और कंपनी बदली जा सके। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि उपभोक्ताओं को केबल टीवी क्षेत्र का डिजिटलीकरण करने के सरकार के अभियान से फायदा मिलना चाहिए। उन्होंने ऐसे सेट टॉप बॉक्स बनाने पर जोर दिया जो उपभोक्ता की पसंद वाले किसी भी सेवा प्रदाता की सेवा पर चल सकें। डिजिटलीकरण अभियान के तीसरे और चौथे चरण के लिए उनके मंत्रालय द्वारा गठित कार्यबल की पहली बैठक को संबोधित करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि ये महत्वपूर्ण है कि उपभोक्ताओं को समुचित दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले सिग्नल मिलें। दूरसंचार क्षेत्र का जिक्र करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि उपभोक्ता किसी भी कंपनी के हैंडसेंट का चयन कर सकता है और साथ ही वो अपनी पसंद का कोई भी सेवा प्रदाता चुन सकता है। जावड़ेकर ने कहा किलेकिन एसटीबी के मामले में उपभोक्ताओं को ये आजादी नहीं मिल पा रही है। उसे वही एसटीबी क्यों खरीदना पड़ रहा है जो उससे मल्टी सिस्टम ऑपरेटर खरीदने को कहता है। यदि एक ही एसटीबी सब में चल सके तो ये बहुत अच्छी बात होगी। मंत्री ने कहा कि अन्य प्रौद्योगिकी संभावनाओं का पता लगाना चाहिए।

ट्राई ऐसे सेट टॉप बॉक्स बनाने की बात कर रही है जिसे ग्राहक एक बार खरीदने के बाद निश्चिंत हो जाएंगे और वो चाहें किसी भी ऑपरेटर की सेवा ले सकेंगे। यहां तक कि केबल टीवी के ग्राहक डीटीएच की सेवा ले सकेंगे वहीं डीटीएच के ग्राहक केबल टीवी की सेवा ले सकेंगे। सबसे खास बात ये होगी इसके लिए उन्हें अपना सेट टॉप बॉक्स भी नहीं बदलना होगा। अब तक ऐसा होता है कि अगर आपने एक बार जो सेट टॉप बॉक्स खरीद लिया, आपको उसकी ही सेवा का उपभोग करना पड़ता है। चाहे आपको उसकी सेवा पसंद हो या नहीं। अगर आप ऑपरेटर बदलना चाहते हैं तो आपको सेट टॉप बॉक्स भी बदलना होता है, जो कि एक खर्चीला विकल्प है, लेकिन पोर्टेबिलिटी शुरू होने से ग्राहकों को इस परेशानी से निजात मिल जाएगी। सेवा पसंद नहीं आने पर वे बड़ी आसानी से ऑपरेटर बदल सकेंगे। जानकारों का मानना है कि ट्राई की इस पहल से सेट टॉप बॉक्स की कीमत में भी कमी आएगी। इसके लिए जो कंसेप्ट पेपर्स तैयार किए गए हैं उनमें उद्योग और ग्राहकों से भी राय मांगी गई है।

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