केबल टीवी के तार से घर-घर दौड़ रही मौत नियमों की अनदेखी से खतरे में केबलकर्मी

केबल टीवी के तार से घर-घर दौड़ रही मौत नियमों की अनदेखी से खतरे में केबलकर्मी

केबल टीवी और इसके ऑपरेटर्स का काम दर्शकों को उनके ड्राइंग रूम तक उनकी पसंद का मनोरंजन पहुंचाना है, लेकिन इन दिनों कंपीटिशन के चक्कर में केबल टीवी ऑपरेटर्स दर्शकों की जान खतरे में डालने से नहीं चूक रहे हैं। खासकर उन लोगों की जान जो उनके लिए काम करते हैं। यहां हैरानी की बात ये है कि केबल टीवी ऑपरेटर्स को इस बात की परवाह भी नहीं है कि उनकी हरकतों से केबल टीवी दर्शकों या उनके अपने केबल टीवी कर्मचारियों की जान खतरे में पड़ रही है। दरअसल, केबल टीवी के तार जिन बिजली के खंभों के सहारे होते हुए आपके घरों तक पहुंचती हैं, वो केबल टीवी कर्मचारियों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। केबल टीवी ऑपरेटर्स ने बिजली के पोल पर टांग रखे हैं केबल टीवी के तार, इसी के जरिए केबल टीवी ऑपरेटर शहर में मनोरंजन की बजाय मौत का खेल कर रहे हैं और ये सब कुछबिजली विभाग के अधिकारियों की शह पर चल रहा है। बारिश के दिनों में यह और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है। आए दिन केबल टीवी के तार ठीक करते हुए बिजली की नंगी तार के संपर्क में आने से किसी न किसी केबल टीवी कर्मी की मौत हो रही है। फिर भी, प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। पिछले दिनों ही इसी तरह की एक घटना के तहत एक और जान पर बन आयी थी, जब टीवी से केबल को कनेक्ट करते समय सुभाषनगर की रहने वाली एक महिला को करंट मार दिया।

बात नियमों की करें तो बिजली के पोल से केबल कनेक्शन डिस्ट्रिब्यूट नहीं किया जा सकता है। ऐसा करना कानूनन जुर्म है। बावजूद इसके देश भर के हर शहर में बिजली के हर एक पोल पर केबल के तार का जंजाल फैला हुआ देखा जा सकता है। पोल पर जो टीवी केबल का बॉक्स लगा है, उसी के जरिए करंट लोगों के घरों में भी पहुंच रहा है। बॉक्स पर केबल ऑपरेटर दो या तीन सर्किट एक्स्ट्रा छोड़े रखते है। ताकि, नए कस्टमर को सर्विस देनी हो तो उसी सॉकेट से कनेक्शन दिया जा सके। जब यह सॉकेट बिजली के तार के संपर्क में आता है, तो करंट पूरे केबल में दौड़ जाता है। कई बार टीवी भी फुंक जाती है।

सबसे ज्यादा खरता तो बारिश के मौसम में होता है। बारिश में ये केबल के तार और खतरनाक साबित हो रहे है। पानी की धार ही वजह से एलटी लाइनों में दौड़ रहा करंट टीवी केबल में आ जाता है। पिछले वर्ष भी कैंट और जंक्शन रोड दो लोगों की भैंस करंट की चपेट में आकर मर गई थी, लेकिन इसके बाद भी बिजली विभाग नहीं चेत रहा है। आरोप ये है कि क्षेत्र के जेई और लाइनमैन ऑपरेटर से सेटिंग कर पोल पर ही केबल टीवी टांगने की इजाजत दे देते हैं। इसके बदले वह उनसे मोटी रकम वसूलते हैं।

अधिकारियों से शिकायत करने पर उनके पास से कुछ इस तरह का रटा रटाया जवाब मिलता है, “बिजली के पोल पर लगे टीवी केबल कानून गलत हैं। सभी डिवीजन को आदेश जारी करेंगे कि जितना जल्द हो पोल से टीवी केबल हटा कर फेंके”, लेकिन इन आदेशों का और जवाब का कुछ असर होता नहीं है। अभी पिछले दिनों की ही बात है। मैं आपको अपना एक अनुभव शेयर करता हूं। मेरी बेटी सुबह सुबह स्कूल जाने से पहले कार्टून देखने की जिद कर रही थी। टीवी ऑन किया तो सिग्नल नहीं आ रहा था। मैंने सोचा सेटॉप बॉक्स का पिन ढीला हो गया होगा। ठीक करने के लिए मैंने केबल की तार खोलने की कोशिश की तो मुझे करंट का जोर का झटका लगा, मैंने तुरंत केबल वाले को फोन किया, तो उसने आकर सब चेक किया, और केबल वायर में दौड़ती बिजली को हटाया। पूछने पर केबलकर्मी ने कहा कि बारिश की वजह से शॉर्ट सर्किट हो गया था। सोचिए, मैं ये तो ये सोच सोच कर परेशान हो जाता हूं कि अगर मेरी बेटी बिजली वाली उस तार के संपर्क में आ गई होती तो क्या होता।

केबल टीवी के खतरनाक तार से जुड़ी एक और दर्दनाक घटना की जानकारी आपको देते हैं। यूपी में आगरा के पास एक जगह है टूंडला। टुंडला के मोहम्मदाबाद गांव में पिछले दिनों केबल का तार ठीक कर रहा केबल टीवी कर्मचारी करंट की चपेट में आने से खंभे से गिर गया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे आगरा ले जाया गया लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना से ग्रामीणों में जबरदस्त गुस्सा था। लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर हंगामा और नारेबाजी की। नगर के मस्जिद रोड निवासी चालीस साल राकेश दिवाकर आगरा हाईवे स्थित गांव मोहम्मदाबाद में ही रहते हुए केबल टीवी चलाता था। पिछले दिनों दोपहर में बिजली के खंभे से केबल का तार टूटने पर वो उसे सही करने के लिए खंभे पर चढ़ा था। इस दौरान वो करंट की चपेट में आ गया और गिर गया। इस पर मौके पर भीड़ जुट गई। लोग उसे तुरंत एफएच मेडिकल कॉलेज ले गये, जहां से उसे आगरा रेफर कर दिया गया। आगरा में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दरअसल, ये कोई पहला और एकमात्र मामला नहीं है। बिजली विभाग और केबल टीवी ऑपरेटर्स की लापरवाही के चलते बरसात के मौसम में आ रहे खंभों में करंट के चलते आए दिन किसी न किसी की मौत हो रही है। कुछ दिन पहले ही नगला तेजा में पेड़ पर चढ़े किशोर दिव्यांश की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वहीं 15 दिन पूर्व न्यू शिवनगर में बिजली पोल में आ रहे करंट की चपेट में आने से तीन पशुओं की मौत हो गई थी। इसी प्रकार मोहम्मदाबाद में ही बिजली पोल में करंट आने से एक पशु की मौत हो गई थी।

कहने को तो सरकार ने केबल टीवी के लेकर कानून बनाया है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सख्त प्रबंध हैं, लेकिन असल में क्या होता है ये सब आप देख रहे हैं, जान रहे हैं। हालांकि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जल्दी ही केबल टीवी नियमों में कुछ और बदलाव भी करने वाली है। सरकार ने केबल टीवी ऑपरेटरों को चैनल दिखाने के अधिकार से संबंधित लाइसेंस नीति में बदलाव को हरी झंडी दे दी है। बदले नियमों के मुताबि अब राज्य सरकारों को डीटीएच यानी डायरेक्ट टू होम का लाइसेंस जारी करने का अधिकार होगा। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में राज्य सरकार की कंपनियों को केबल वितरण के अधिकार मिले हैं। केंद्र ने डीटीएच की लाइसेंस फीस घटा दी है और सेवा अवधि बढ़ा दी है।  लाइसेंस नीति में बदलाव के फैसले का अभी तक आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव एनके सिन्हा के अनुसार नीतिगत फैसले के बारे में कैबिनेट की आधिकारिक मंजूरी मिलनी बाकी है। हालांकि, नई नीति के मद्देनजर काम शुरू कर दिया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दो राज्यों में राज्य सरकार की कंपनियों- तमिलनाडु में ‘तमिलनाडु अरासू केबल टीवी कॉरपोरेशन लिमिटेड’ और ‘आंध्र प्रदेश एपीएसएफ लिमिटेड’ को केबल वितरण के अधिकार सौंप दिए हैं। सरकार की इस पहल के बाद कंपनियां तकनीकी सरंजाम जुटाने में लग गई हैं। दोनों कंपनियां 17 अगस्त से अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी में हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के द्वारा दिए गए कई सुझावों में लाइसेंस नीति में बदलाव के सुझाव को अमल में लाया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत लोगों को कम खर्च में  ज्यादा चैनल देखने की सुविधा दिए जाने का तर्क दिया जा रहा है, लेकिन इन नीति पर सवाल उठाने वाले जानकार टेलीविजन चैनलों के प्रसारण पर राज्यों में सत्ताधारी राजनीतिक दलों के नियंत्रण की संभावना जता रहे हैं। दूसरी ओर, वित्तीय नुकसान का हवाला देते हुए पहले से राष्ट्रीय स्तर पर मैदान में डटीं डीटीएच कंपनियों ने सूचना व प्रसारण मंत्रालय के द्वार खटखटाने शुरू कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत डीटीएच कंपनियों को 20 साल के लिए लाइसेंस मिलेगा और सालाना फीस घटाकर कुल समेकित राजस्व (एजीआर) का आठ फीसद कर दिया गया है। अभी तक सकल राजस्व का 10 फीसद लाइसेंस फीस के रूप में डीटीएच कंपनियां चुकाती रही हैं। 10 साल के लिए लाइसेंस दिया जाता है। डीटीएच ऑपरेटरों को 10 करोड़ रुपए की इंट्री फी चुकानी होती है। ट्राई के एक आला अधिकारी के अनुसार, मंत्रालय ने हमारी सिफारिशें मान ली हैं और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। जुलाई, 2014 में ट्राई ने डीटीएच नीति की समीक्षा की थी और लाइसेंस और सालाना शुल्क में बदलाव के साथ ही एक और प्रावधान सुझाया था कि एक आॅपरेटर को एक ही प्लेटफॉर्म पर काम करने की अनुमति हो- या तो डीटीएच या केबल कंपनी।

अभी भारत में छह डीटीएच कंपनियां हैं- जी समूह की डिश टीवी, रिलायंस बिग टीवी, टाटा स्काई, वीडियोकॉन डीटूएच लिमिटेड, सन डाइरेक्टटीवी प्राइवेट लिमिटेड और भारती टेलीमीडिया लिमिटेड और राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता दूरदर्शन की डिश टीवी। 2016-17 में सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने डीटीएच कंपनियों से लाइसेंस फीस के बाबत 747.78 करोड़ रुपए कमाए थे। पिछले तीन वित्त वर्ष में कुल 2,400.45 करोड़ की कमाई हुई है। अब डीटीएच लाइसेंस नीति में बदलाव से असहज राष्ट्रीय कंपनियों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के द्वार खटखटाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, इस बाबत आधिकारिक तौर पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। तमिलनाडु में सरकारी कंपनी अरासू ने मुफ्त में सेट टॉप बॉक्स देने की घोषणा कर दी है। इस बाबत एआइएडीएमके ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया है। अरासू को अभी केंद्रीय मंत्रालय ने ‘प्रोविजनल डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (Þडीएएस)’ लाइसेंस उपलब्ध कराया गया है। आंध्र प्रदेश में इसकी प्रक्रिया चल रही है। पंजाब समेत कई राज्य इस कतार में बताए जा रहे हैं।

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