जानें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है और कैस करता है ये काम

जानें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है और कैस करता है ये काम

हॉलीवुड फिल्मों में हम मशीनों एवं मानवों की जंग देख चुके हैं और प्रायः इन्हें हम फंतासी कथाओं की संज्ञा देते आए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थात् मशीनों को मानवीय भावों से युक्त करने की कवायद आरम्भ हो चुकी है।

हाल ही में सोशल नेटवर्क फेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समर्थन में दिखे थे, वहीं ‘ओपन एआई’ (open AI) नामक एक गैर-लाभकारी कंपनी चलाने वाले एलोन मस्क ने इसे विनाशकारी बताया है।

दरअसल, जुकरबर्ग और मस्क दो अलग-अलग विचारों के चेहरे मात्र हैं, एआई की अवधारणा के प्रतिपादन के समय से ही इसके विघटनकारी प्रभावों को लेकर बहस ज़ारी है।

यह सच है कि एआई विघटनकारी प्रमाणित हो सकता है, लेकिन इसके फायदे भी कम नहीं हैं। इस आलेख में हम एआई से होने वाले लाभ और नुकसान दोनों की चर्चा करेंगे, लेकिन पहले देखते हैं कि एआई है क्या ?

इंटेलिजेंस की मदद से ही मनुष्य कई जानवरों का और कई मशीनों का अपने हित के इस्तेमाल करता है। अब तक जितनी भी मशीनें बनी हैं, वे पहले से निर्धारित काम को करती है। चाहे वह कारखाने हों, मोटर गाड़ी हो या कंप्यूटर हो। लेकिन अब मनुष्यों ने अपनी बुद्धि की मदद से ही मशीनों को बुद्धिमान बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है। हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में ही है, लेकिन इसके क्रांतिकारी नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं।

जैसे, वाहन निर्माण, बैंकिंग और आईटी क्षेत्र में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वैश्विक बाजार 62.9 फीसदी दर से बढ़ रहा है। स्वचालित कार, चैटबॉट (जो वेबसाइट सर्फ करते समय चैटिंग करते हुए सह जानकारी मुहैया कराते हैं), पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट (गूगल असिस्टेंट, अमेजन एलेक्सा, एप्पल सीरी, माइक्रोसॉफ्ट कॉर्टना आदि) कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित होते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दुनिया भर में अध्ययन तेज हुए हैं और इसमें भारी निवेश किया रहा है। स्वचालित कारों का निर्माण हो या गो कम्प्यूटर का निर्माण जो किसी मानव खिलाड़ी को आसानी से हरा सकता है। आईबीएम कंपनी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस डीप ब्ल्यू कंप्यूटर ने कास्पोरोव को शतरंज मे हराया था, तो गूगल ने अल्फागो ने मानव को एक कंप्युटर बोर्ड खेल गो मे हराया था। तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में इतनी क्षमता हो सकती है कि वह मनुष्य से भी आगे निकल जाए।

संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के बजट में यह उल्लेख किया था कि केंद्र सरकार का थिंकटैंक नीति आयोग जल्दी ही राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम (National Artificial Inteliegence Program-NAIP) की रूपरेखा तैयार करेगा। इसके पहले चीन ने अपने त्रिस्तरीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यक्रम की रूपरेखा जारी की थी, जिसके बल पर वह वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में विश्व का अगुआ बनने की सोच रहा है।

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के जनक जॉन मैकार्थी के अनुसार यह बुद्धिमान मशीनों, विशेष रूप से बुद्धिमान कंप्यूटर प्रोग्राम को बनाने का विज्ञान और अभियांत्रिकी है। दूसरे शब्दों में यह मशीनों द्वारा प्रदर्शित इंटेलिजेंस है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट या फिर मनुष्य की तरह इंटेलिजेंस तरीके से सोचने वाला एक सॉफ़्टवेयर बनाने का तरीका है।

यह इसके बारे में अध्ययन करता है कि मानव मस्तिष्क कैसे सोचता है और समस्या को हल करते समय कैसे सीखता है, कैसे निर्णय लेता है और कैसे काम करता। माना जाता है कि एआई का आरंभ 1950 के दशक में ही हो गया था, लेकिन इसकी महत्ता को 1970 के दशक में पहचान मिली।

जापान ने सबसे पहले इस ओर पहल की। उन्होंने 1981 में फिफ्थ जनरेशन नामक योजना की शुरुआत की थी। इसमें सुपर कंप्यूटर के विकास के लिये दस वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी। इसके बाद अन्य देशों ने भी इस ओर ध्यान दिया।

ब्रिटेन ने इसके लिये एल्वी नाम का एक प्रोजेक्ट बनाया। यूरोपीय संघ के देशों ने भी एस्प्रिट नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके बाद 1983 में कुछ निजी संस्थाओं ने मिलकर एआई पर लागू होने वाली उन्नत तकनीकों जैसे वीएलएसआई का विकास करने के लिये एक संघ ‘माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्प्यूटर टेक्नॉलॉजी’ की स्थापना की।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उपयोगिता:

रोज़गार पर प्रभाव:- तीसरी औद्योगिक क्रांति के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने उम्मीद के ठीक विपरीत रोज़गार के प्रचुर अवसर उपलब्ध कराए। गौरतलब है कि 1970 के दशक में जब पहली बार स्वचालित टेलर मशीन (एटीएम) बाज़ारों में पहुँचा तो लोगों को लगा कि यह खुदरा बैंकिंग में श्रमिकों के लिये एक आपदा के समान है।

लेकिन, वास्तव में बैंकिंग सेवा क्षेत्र की नौकरियों में वृद्धि देखी गई। अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकीकरण से रोज़गार की उपलब्धता में कमी नहीं आती, बल्कि रोज़गार के तरीके बदल जाते हैं। अतः एआई से रोज़गार में कमी नहीं आएगी, बल्कि रोज़गार की प्रकृति बदल जाएगी।

क्षमता वृद्धि:- मशीनों का प्रयोग जटिल कार्यों के लिये किया जाता है। एआई द्वारा किया गया कार्य मनुष्यों की तुलना में कम खतरनाक होता है। एआई के उपयोग से गलतियों की कम संभावना होगी और जटिल सॉफ्टवेयर को आसानी से समझने लायक बनाया जा सकता है। संसाधनों तथा समय के व्यय को कम किया जा सकता है, जिससे कम समय में वांछित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

सरकार दे रही बढ़ावा

राष्ट्रीय स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने के लिये नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इसमें सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा शिक्षाविदों तथा उद्योग जगत को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

वर्तमान बजट में सरकार ने फिफ्थ जनरेशन टेक्नोलॉजी स्टार्ट अप के लिये 480 मिलियन डॉलर का प्रावधान किया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3-D प्रिंटिंग और ब्लॉक चेन शामिल हैं।

इसके अलावा सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, बिग डाटा इंटेलिजेंस, रियल टाइम डाटा और क्वांटम कम्युनिकेशन के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण, मानव संसाधन और कौशल विकास को बढ़ावा देने के योजना बना रही है।

क्यों ज़रूरी है सावधानी बरतना ?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हमारे रहने और कार्य करने के तरीकों में व्यापक बदलाव आएगा। रोबोटिक्स और वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकों से तो उत्पादन और निर्माण के तरीकों में क्रान्तिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा। ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के मुताबिक अकेले अमेरिका में अगले दो दशकों में डेढ़ लाख रोज़गार खत्म हो जाएंगे।

हो सकता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में रोज़गार जनित चुनौतियों से हम निपट लें, लेकिन सबसे बड़े खतरे को टालना मुश्किल होगा। अतः स्पष्ट है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस युक्त मशीनों से जितने फायदे हैं, उतने ही खतरे भी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोचने-समझने वाले रोबोट अगर किसी कारण या परिस्थिति में मनुष्य को अपना दुश्मन मानने लगें, तो मानवता के लिये खतरा पैदा हो सकता है। सभी मशीनें और हथियार बगावत कर सकते हैं। ऐसी स्थिति की कल्पना हॉलीवुड की “टर्मिनेटर” जैसी फिल्म में की गई है।

यही कारण है कि जल्द ही संयुक्त राष्ट्र संघ में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिये विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के एक आधिकारिक समूह की बैठक होने वाली है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर 7-सूत्री रणनीति

इससे पहले पिछले वर्ष अक्टूबर में केंद्र सरकार ने 7-सूत्री रणनीति तैयार की थी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने के लिये भारत की सामरिक योजना का आधार तैयार करेगी। इनमें प्रमुख हैं:

मानव मशीन की बातचीत के लिये विकासशील विधियाँ बनाना।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और R&D के साथ एक सक्षम कार्यबल का निर्माण करना।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक, कानूनी और सामाजिक निहितार्थों को समझना तथा उन पर काम करना।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी को मानक मानकर और बेंचमार्क के माध्यम से मापन का मूल्यांकन करना।

टेक्नोलॉजिकल सिंगुलैरिटी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर विशेषज्ञ ‘टेक्नोलॉजिकल सिंगुलैरिटी’ यानी तकनीकी एकलता जैसी किसी स्थिति  के आगमन की ओर संकेत करते हैं। यह दो बातों को संदर्भित करता है:

भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रचना की जाएगी, जो कि मनुष्यों के मस्तिष्क से अधिक तीक्ष्ण है।

यह बुद्धिमत्ता समस्याओं के समाधान बहुत तीव्रता से कर सकेगी, जो कि मनुष्य की क्षमता से परे है।

माना जाता है कि 2045 तक मशीनें स्वयं सीखने और स्वयं को सुधारने में सक्षम हो जाएंगी और इतनी तेज़ गति से सोचने, समझने और काम करने लगेंगी कि मानव विकास का पथ हमेशा के लिये बदल जाएगा।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाएँ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत में शैशवावस्था में है और देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें इसे लेकर प्रयोग किये जा सकते हैं। देश के विकास में इसकी संभावनाओं को देखते हुए उद्योग जगत ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह उन क्षेत्रों की पहचान करे जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल लाभकारी हो सकता है।

सरकार भी चाहती है कि सुशासन के लिहाज़ से देश में जहां संभव हो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाए। सरकार ने उद्योग जगत से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के लिये एक मॉडल बनाने में सहयोग करने की अपील की है। उद्योग जगत ने सरकार से इसके लिये कुछ बिंदुओं पर फोकस करने को कहा है:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिये देश में एक अथॉरिटी बने जो इसके नियम-कायदे तय करे और पूरे क्षेत्र की निगरानी करे।

सरकार उन क्षेत्रों की पहचान करे जहाँ प्राथमिकता के आधार पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, कृषि आदि इसके लिये उपयुक्त क्षेत्र हो सकते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रमुख अनुप्रयोग

कंप्यूटर गेम-Computer Gaming

प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण-Natural Language Processing

प्रवीण प्रणाली-Expert System

दृष्टि प्रणाली-Vision System

वाक् पहचान-Speech Recognition

बुद्धिमान रोबोट-Intelligent Robot

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रकार

पूर्णतः प्रतिक्रियात्मक (Purely Reactive)

सीमित स्मृति (Limited Memory)

मस्तिष्क सिद्धांत (Brain Theory)

आत्म-चेतन (Self Conscious)

क्यों ज़रूरी है सावधानी बरतना ?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हमारे रहने और कार्य करने के तरीकों में व्यापक बदलाव आएगा।

रोबोटिक्स और वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकों से उत्पादन और निर्माण के तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा।

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में बताया गया है कि केवल अमेरिका में अगले दो दशकों में डेढ़ लाख रोज़गार खत्म हो जाएंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस युक्त मशीनों से जितने फायदे हैं, उतने ही खतरे भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोचने-समझने वाले रोबोट अगर किसी कारण या परिस्थिति में मनुष्य को अपना दुश्मन मानने लगें, तो मानवता के लिये खतरा पैदा हो सकता है। सभी मशीनें और हथियार बगावत कर सकते हैं। ऐसी स्थिति की कल्पना हॉलीवुड की ‘टर्मिनेटर’ फिल्म में की गई है।

चीन में क्या है स्थिति?

चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित एक अनुसंधान प्रयोगशाला खोलने के बाद गूगल ने अपना एक और कार्यालय खोला है। गूगल का यह नया कार्यालय शेनझेन शहर में है। शेनझेन शहर में गूगल के कई उपभोक्ता और साझेदार हैं और उनके साथ अच्छे से कार्य और संवाद कायम करने के लिये एक ई-सूट कार्यालय स्थापित किया गया है। चीन में गूगल का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर बुद्धिमत्ता सम्मेलन और कार्यशालाओं को प्रायोजित करके कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान समुदाय को प्रोत्साहन दे रहा है। यह एशिया का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर है।

निष्कर्ष

इंटेलिजेंट यानी अक्लमंद होना मानव का मुख्य गुण है। हमारी सभ्यता ने जो भी उपलब्धियाँ हासिल की हैं, वे मानव-बुद्धि का ही नतीजा हैं। फिर चाहे आग के इस्तेमाल में महारत हासिल करना हो, अनाज उपजाना हो या ब्रह्मांड को समझना।

दरअसल, आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमता पर दुनिया भर में बड़े पैमाने पर अध्ययन हो रहे हैं। इसमें भारी निवेश भी हो रहा है। जब हमारा दिमाग किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित होगा, तो हम किस उपलब्धि को पा सकते हैं, यह अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। संभव है कि इस नई क्रांति के बूते हम उस नुकसान की भी भरपाई कर सकें, जो औद्योगिकीकरण की वज़ह से इस संसार को हुआ है।

इसके पास यह ताकत भी है कि हम गरीबी और बीमारी को खत्म करने का अपना लक्ष्य पाने में सफल होंगे। संक्षेप में कहें, तो आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस का निर्माण हमारी सभ्यता के इतिहास की सबसे बड़ी घटना होगी।

हालाँकि सच यह भी है कि अगर हमने इसके जोखिम से बचने का तरीका नहीं ढूँढा, तो सभ्यता खत्म भी हो सकती है। तमाम लाभ के बावजूद आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस के अपने खतरे हैं। इसकी मदद से शक्तिशाली स्वचालित हथियार बन सकते हैं या फिर ऐसे उपकरण, जिनके सहारे चंद लोग एक बड़ी आबादी का शोषण कर सकें। यह अर्थव्यवस्था को भी बड़ी चोट पहुँचा सकती है।

कुल मिलाकर एक सशक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमता का उदय हमारे लिये फायदेमंद भी होगा और नुकसानदेह भी। फिलहाल हम नहीं जानते कि इसका स्वरूप आगे क्या होगा? इसीलिये इस संदर्भ में और ज़्यादा शोध किए जाने की ज़रूरत है।

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